सिंहपुर। चिलूली गांव में बुधवार को कवि सम्मेलन में कवियों का जमावड़ा हुआ। कवि अबरार अहमद जायसी ने, कोई आया ही नहीं सच को बचाने के लिए, मुत्तहिद हो गए अब सच को बचाने के लिए... पढ़ा तो श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।
इसके बाद कवि रमजान अली सफीर ने मंच संभाला। मुरझा गए थे फूल जो फिर से खिला दिया, अरमां जो सो गए थे वो फिर से जगा दिया सुनाकर जमकर तालियां बटोरीं। कवि रामशंकर सिंह ने, पढ़े लिखे औ समझदार कै देखा नहीं विकास, आधा अंगना बहु बहारे आधा अंगना सास... सुनाकर आज के पारिवारिक हालात को जाहिर किया। कवि जितेंद्र मिश्र यायावर, कवि संदीप वर्मा इस्माइल, श्रवण कुमार सिंह ने भी अपनी रचनाओं से माहौल बनाया।
बाराबंकी के कवि वेद प्रकाश सिंह ने, सत्ता धन बिछौना हो गया है, स्वार्थ में संबंध बौना हो गया... पढ़कर मौजूदा राजनीतिक हालात को प्रदर्शित किया। कवि सम्मेलन में सुशील चंद्र पांडेय, संत प्रसाद जिज्ञासु, हरि प्रसाद सिंह, इंद्रेश भदौरिया ने काव्य पाठ किया। आयोजक कृष्ण कुमार सिंह ने सभी के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंद्रेश भदौरिया,अध्यक्षता ज्ञानेंद्र पांडेय और संचालन प्रवीण त्रिपाठी ने किया।