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Amethi News: संगीता ने संघर्ष से बनाई पहचान
Wed, 22 Jul 2026 01:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Wed, 22 Jul 2026 01:05 AM IST
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अमेठी के कटरा फुलकुंवर में संगीता यादव के डेयरी व्यवसाय का निरीक्षण करती जिला मिशन प्रबंधक प्रव
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अमेठी सिटी। कटरा फुलकुंवर निवासी संगीता यादव ने संघर्ष और मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। कुछ वर्ष पहले तक उनका परिवार केवल खेती पर निर्भर था। सीमित आय में घर और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना आसान नहीं था। आर्थिक तंगी से बाहर निकलने के लिए उन्होंने वर्ष 2021 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर डेयरी व्यवसाय शुरू किया। यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
संगीता ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें उद्यमिता और स्वरोजगार का प्रशिक्षण मिला। शुरुआती दौर में पूंजी की कमी, सीमित संसाधन और बाजार की जानकारी का अभाव सबसे बड़ी चुनौतियां थीं। समूह के सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। बाद में बैंक सखी के रूप में भी कार्य शुरू किया, जिससे उनकी आय का एक और स्रोत जुड़ गया। पहले परिवार की मासिक आय करीब 15,800 रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 28,500 रुपये हो गई है। बढ़ी आय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और बच्चों की शिक्षा समेत अन्य जरूरतें आसानी से पूरी होने लगीं।
आज उनका डेयरी व्यवसाय केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनके उद्यम से 15 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। भविष्य में पशुओं की संख्या बढ़ाकर डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने और करीब 100 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही हैं।
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संगीता ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें उद्यमिता और स्वरोजगार का प्रशिक्षण मिला। शुरुआती दौर में पूंजी की कमी, सीमित संसाधन और बाजार की जानकारी का अभाव सबसे बड़ी चुनौतियां थीं। समूह के सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। बाद में बैंक सखी के रूप में भी कार्य शुरू किया, जिससे उनकी आय का एक और स्रोत जुड़ गया। पहले परिवार की मासिक आय करीब 15,800 रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 28,500 रुपये हो गई है। बढ़ी आय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और बच्चों की शिक्षा समेत अन्य जरूरतें आसानी से पूरी होने लगीं।
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आज उनका डेयरी व्यवसाय केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनके उद्यम से 15 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। भविष्य में पशुओं की संख्या बढ़ाकर डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने और करीब 100 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही हैं।
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