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Amethi News: रास्ता बंद होने से बिफरे ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 23 Feb 2026 12:19 AM IST
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अमेठी के रेभा गांव में प्रदर्शन करते ग्रामीण। स्रोत ग्रामीण
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अमेठी। निर्माणाधीन बाईपास फेज-2 के कारण रेभा गांव में लोगों की परेशानी बढ़ गई है। रविवार को ग्रामीणों ने अंडरपास बनाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि सार्वजनिक रास्ता बंद होने से रोजाना आने-जाने में दिक्कत हो रही है।
ग्रामीण रामकृष्ण, मनोज कुमार, शिव प्रसाद और शिवशंकर के अनुसार अमेठी-प्रतापगढ़ मार्ग से रेभा होते हुए विशेश्वरगंज तक जाने वाली सड़क का उपयोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग करते हैं। छात्र-छात्राएं भी इसी रास्ते से विद्यालय आते-जाते हैं। बाईपास निर्माण के दौरान अंडरपास की व्यवस्था न होने से आवाजाही बाधित हो गई है। खेत, बाजार और स्कूल तक पहुंचने के लिए अब लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि सड़क किनारे बना नाला अस्थायी मार्ग के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। जब कर्मचारी उसे बंद करने पहुंचे तो गांव के लोग मौके पर पहुंच गए और विरोध दर्ज कराया। लोगों की मांग है कि नाले को चौड़ा और सुरक्षित बनाकर अंडरपास का रूप दिया जाए, जिससे आवागमन सुचारु रह सके। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि किसानों को भी खेतों तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समस्या का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी है, लेकिन गांव के रास्ते बंद होने से जनजीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए। इस मौके पर अनिकेत मिश्र, बृजेश आदि मौजूद रहे।
283.86 करोड़ की लागत से बन रहा बाईपास
बाईपास फेज-2 परियोजना के अंतर्गत 283.86 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं। करीब 8.1 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण एनएच-931 के 30.050 किमी से 34.500 किमी तक किया जा रहा है। कई गांवों की भूमि अधिग्रहित हो चुकी है। दक्षिणी हिस्से में बन रहा यह मार्ग पहले भी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा में रहा है। अब अंडरपास की मांग ने नई चिंता खड़ी कर दी है।
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ग्रामीण रामकृष्ण, मनोज कुमार, शिव प्रसाद और शिवशंकर के अनुसार अमेठी-प्रतापगढ़ मार्ग से रेभा होते हुए विशेश्वरगंज तक जाने वाली सड़क का उपयोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग करते हैं। छात्र-छात्राएं भी इसी रास्ते से विद्यालय आते-जाते हैं। बाईपास निर्माण के दौरान अंडरपास की व्यवस्था न होने से आवाजाही बाधित हो गई है। खेत, बाजार और स्कूल तक पहुंचने के लिए अब लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
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उन्होंने बताया कि सड़क किनारे बना नाला अस्थायी मार्ग के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। जब कर्मचारी उसे बंद करने पहुंचे तो गांव के लोग मौके पर पहुंच गए और विरोध दर्ज कराया। लोगों की मांग है कि नाले को चौड़ा और सुरक्षित बनाकर अंडरपास का रूप दिया जाए, जिससे आवागमन सुचारु रह सके। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि किसानों को भी खेतों तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से समस्या का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी है, लेकिन गांव के रास्ते बंद होने से जनजीवन प्रभावित नहीं होना चाहिए। इस मौके पर अनिकेत मिश्र, बृजेश आदि मौजूद रहे।
283.86 करोड़ की लागत से बन रहा बाईपास
बाईपास फेज-2 परियोजना के अंतर्गत 283.86 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं। करीब 8.1 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण एनएच-931 के 30.050 किमी से 34.500 किमी तक किया जा रहा है। कई गांवों की भूमि अधिग्रहित हो चुकी है। दक्षिणी हिस्से में बन रहा यह मार्ग पहले भी विभिन्न मुद्दों पर चर्चा में रहा है। अब अंडरपास की मांग ने नई चिंता खड़ी कर दी है।
