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Amroha News: गोशालाओं में बायोगैस संयंत्र लगाने की कवायद तेज, मिलेगा सस्ता ईंधन

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2026 02:07 AM IST
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Efforts to set up biogas plants in cow shelters are in full swing, fuel will be available at cheaper rates.
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अमरोहा। जिले में गैस की बढ़ती किल्लत और महंगाई के बीच अब गोशालाओं को ऊर्जा के नए स्रोत के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल तेज हो गई है। प्रशासन ने जनपद की विभिन्न गोशालाओं में बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत चयनित गोशालाओं की सूची तैयार कर जल्द ही प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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वर्तमान में जिले की दो गोशालाओं में बायोगैस प्लांट पहले से संचालित हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन्हीं अनुभवों के आधार पर अब अन्य गोशालाओं में भी बायोगैस संयंत्र स्थापित कराने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे नहीं केवल गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती और सुलभ गैस की आपूर्ति भी संभव हो सकेगी। मुख्य विकास अधिकारी अश्वनी कुमार मिश्रा ने बताया कि जिले में अधिक से अधिक गोशालाओं को बायोगैस प्लांट से जोड़ने की मुहिम चलाई जा रही है।
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उपलब्ध बजट के अनुसार चरणबद्ध तरीके से संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिसे जल्द ही शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। जिले में वर्तमान में करीब 25 गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें पांच हजार से अधिक गौवंशीय पशु संरक्षित हैं। इन गोशालाओं से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गोबर निकलता है, जिसका वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर बायोगैस का उत्पादन किया जा सकता है। इससे रसोई गैस का सस्ता विकल्प तैयार होगा और ग्रामीण परिवारों को महंगी एलपीजी से राहत मिल सकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार गोबर से बनने वाली बायोगैस नहीं केवल ईंधन के रूप में उपयोगी है, बल्कि इससे निकलने वाला स्लरी जैविक खाद के रूप में खेतों के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होगी और खेती की लागत भी घटेगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि इससे प्रदूषण में कमी आएगी। प्रशासन का मानना है कि यह योजना ग्रामीण भारत में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। साथ ही गोशालाओं की आय बढ़ाने और उनके संचालन को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा गौकास्ट यूनिट जैसी योजनाओं को भी गोशालाओं में संचालित कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। बायोगैस संयंत्रों की स्थापना से जहां एक ओर गोशालाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों को सस्ती, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा का विकल्प भी उपलब्ध हो सकेगा।
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