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Amroha News: ग्राहक को नया स्कूटर या 1.13 लाख लौटाने का आदेश
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अमरोहा। वारंटी अवधि में इलेक्ट्रिक स्कूटर खराब होने के बाद भी कंपनी ने उसे ठीक नहीं कराया। करीब एक साल तक स्कूटर सर्विस सेंटर पर खड़ा रहा। मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए नया स्कूटर देने या 1,13,721 रुपये वापस करने का आदेश दिया है।
मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए कंपनी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। एक माह में आदेश का पालन नहीं करने पर स्कूटर की कीमत पर 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
मामला डिडौली थाना क्षेत्र के चौधरपुर गांव निवासी सद्दाम हुसैन का है। उन्होंने 28 अगस्त 2024 को 1,13,721 रुपये में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा था।
इसके लिए 50,227 रुपये डाउन पेमेंट और 63,494 रुपये का ऋण कराया था। 10 अगस्त 2025 को स्कूटर की मोटर में खराबी आने पर उसे मुरादाबाद स्थित अधिकृत सर्विस सेंटर में जमा कराया गया।
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सर्विस सेंटर ने टिकट और जॉब कार्ड जारी किया। सद्दाम का आरोप था कि कई दिन बाद भी स्कूटर ठीक नहीं हुआ। उन्होंने कंपनी अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने के साथ तीन बार ईमेल से शिकायत की और 22 सितंबर 2025 को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की।
कंपनी ने आरोपों का विरोध करते हुए दावा किया कि खराबी अनुचित उपयोग और नियमित रखरखाव की कमी से हुई थी। कंपनी ने यह भी कहा कि स्कूटर की मरम्मत कर ग्राहक को लेने के लिए सूचना दी गई थी, लेकिन उसने वाहन लेने से इनकार कर दिया। आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने दस्तावेजों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का अध्ययन किया। आयोग ने पाया कि स्कूटर वारंटी अवधि में खराब हुआ और अधिकृत सर्विस सेंटर में जमा होने के बावजूद उपभोक्ता को उपलब्ध नहीं कराया गया। बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
आयोग ने कंपनी के निदेशक, प्रबंधकों और अधिकृत सर्विस सेंटर को संयुक्त रूप से उत्तरदायी ठहराते हुए एक माह में 1,13,721 रुपये वापस करने या नया इलेक्ट्रिक स्कूटर देने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 25 हजार रुपये भी देने होंगे।
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मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए कंपनी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। एक माह में आदेश का पालन नहीं करने पर स्कूटर की कीमत पर 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
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मामला डिडौली थाना क्षेत्र के चौधरपुर गांव निवासी सद्दाम हुसैन का है। उन्होंने 28 अगस्त 2024 को 1,13,721 रुपये में इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा था।
इसके लिए 50,227 रुपये डाउन पेमेंट और 63,494 रुपये का ऋण कराया था। 10 अगस्त 2025 को स्कूटर की मोटर में खराबी आने पर उसे मुरादाबाद स्थित अधिकृत सर्विस सेंटर में जमा कराया गया।
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सर्विस सेंटर ने टिकट और जॉब कार्ड जारी किया। सद्दाम का आरोप था कि कई दिन बाद भी स्कूटर ठीक नहीं हुआ। उन्होंने कंपनी अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने के साथ तीन बार ईमेल से शिकायत की और 22 सितंबर 2025 को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की।
कंपनी ने आरोपों का विरोध करते हुए दावा किया कि खराबी अनुचित उपयोग और नियमित रखरखाव की कमी से हुई थी। कंपनी ने यह भी कहा कि स्कूटर की मरम्मत कर ग्राहक को लेने के लिए सूचना दी गई थी, लेकिन उसने वाहन लेने से इनकार कर दिया। आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने दस्तावेजों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का अध्ययन किया। आयोग ने पाया कि स्कूटर वारंटी अवधि में खराब हुआ और अधिकृत सर्विस सेंटर में जमा होने के बावजूद उपभोक्ता को उपलब्ध नहीं कराया गया। बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
आयोग ने कंपनी के निदेशक, प्रबंधकों और अधिकृत सर्विस सेंटर को संयुक्त रूप से उत्तरदायी ठहराते हुए एक माह में 1,13,721 रुपये वापस करने या नया इलेक्ट्रिक स्कूटर देने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 25 हजार रुपये भी देने होंगे।