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Amroha News: न्यायालय ने बीमा कंपनी को तीन लाख रुपये के भुगतान का दिया आदेश
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अमरोहा। गंभीर चोट के इलाज के बाद बीमा क्लेम को निरस्त करने के मामले में न्यायालय ने बीमा कंपनी को तीन लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत भुगतान करने का आदेश दिया। साथ ही आर्थिक और मानसिक पीड़ा व वाद व्यय के रूप में खर्च 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
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para_count-1 अमरोहा नगर के मोहल्ला मंडी चौब में रविंद्र नाथ सक्सैना का परिवार रहता है। उन्होंने अपनी पुरानी पालिसी को दूसरी बीमा कंपनी से पोर्ट कराकर 23 जनवरी 2022 से 22 जनवरी 2023 तक नवीनीकृत किया था। पालिसी नवीनीकरण के समय उनकी पूर्व बीमारियों को भी कवर किया गया और लंबित समय माफ किया गया। इसके बाद 17 फरवरी 2022 को नहाते समय फिसलने से रविंद्र नाथ सक्सैना को गंभीर चोट लगी। उनके बाएं हिस्से में कमजोरी उत्पन्न हुई। लिहाजा परिजनों ने उन्हें नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती कर इलाज करवाया। बीमा कंपनी ने शुरुआत में 30 हजार रुपये का कैशलेस अनुमति पत्र जारी किया लेकिन बाद में इसे निरस्त कर दिया। para_count-1
para_count-2 इसके बाद रविंद्र नाथ सक्सैना के बेटे ने 3,03,276 रुपये का भुगतान कर इलाज कराया। जब रविन्द्र नाथ ने क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने इसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि यह बीमारी पालिसी शुरुआत होने से पूर्व की है और 2019 में हुई बीमारी को छिपाया गया। बीमा कंपनी ने सुनवाई नहीं की तो जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य मंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। इस मामले में न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद साक्ष्यों के आधार पर पाया कि बीमा कंपनी द्वारा क्लेम निरस्त करने का आधार मनमाना और निराधार है। न्यायालय ने कहा कि पॉलिसी पोर्ट करने और नवीनीकृत करने के समय पीड़ित ने सभी आवश्यक दस्तावेज और पूर्व पालिसी की जानकारी कंपनी को उपलब्ध कराई थी। इसके बावजूद कंपनी ने क्लेम को निरस्त किया, यह गलत है। para_count-2
para_count-3 मामले में उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को इलाज में हुए खर्च 3,03,276 रुपये को नौ प्रतिशत समेत चुकाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक एवं आर्थिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये और वाद व्यय के 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पूरी धनराशि एक माह के भीतर अदा करनी होगी। इस फैसले से बीमा कंपनियों के क्लेम निरस्तीकरण के मनगढंत आधारों पर अंकुश लगाने और पालिसीधारकों के अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत संदेश मिला है। para_count-3
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para_count-1 अमरोहा नगर के मोहल्ला मंडी चौब में रविंद्र नाथ सक्सैना का परिवार रहता है। उन्होंने अपनी पुरानी पालिसी को दूसरी बीमा कंपनी से पोर्ट कराकर 23 जनवरी 2022 से 22 जनवरी 2023 तक नवीनीकृत किया था। पालिसी नवीनीकरण के समय उनकी पूर्व बीमारियों को भी कवर किया गया और लंबित समय माफ किया गया। इसके बाद 17 फरवरी 2022 को नहाते समय फिसलने से रविंद्र नाथ सक्सैना को गंभीर चोट लगी। उनके बाएं हिस्से में कमजोरी उत्पन्न हुई। लिहाजा परिजनों ने उन्हें नोएडा के निजी अस्पताल में भर्ती कर इलाज करवाया। बीमा कंपनी ने शुरुआत में 30 हजार रुपये का कैशलेस अनुमति पत्र जारी किया लेकिन बाद में इसे निरस्त कर दिया। para_count-1
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para_count-2 इसके बाद रविंद्र नाथ सक्सैना के बेटे ने 3,03,276 रुपये का भुगतान कर इलाज कराया। जब रविन्द्र नाथ ने क्लेम के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने इसे यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि यह बीमारी पालिसी शुरुआत होने से पूर्व की है और 2019 में हुई बीमारी को छिपाया गया। बीमा कंपनी ने सुनवाई नहीं की तो जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य मंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। इस मामले में न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद साक्ष्यों के आधार पर पाया कि बीमा कंपनी द्वारा क्लेम निरस्त करने का आधार मनमाना और निराधार है। न्यायालय ने कहा कि पॉलिसी पोर्ट करने और नवीनीकृत करने के समय पीड़ित ने सभी आवश्यक दस्तावेज और पूर्व पालिसी की जानकारी कंपनी को उपलब्ध कराई थी। इसके बावजूद कंपनी ने क्लेम को निरस्त किया, यह गलत है। para_count-2
para_count-3 मामले में उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को इलाज में हुए खर्च 3,03,276 रुपये को नौ प्रतिशत समेत चुकाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक एवं आर्थिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये और वाद व्यय के 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पूरी धनराशि एक माह के भीतर अदा करनी होगी। इस फैसले से बीमा कंपनियों के क्लेम निरस्तीकरण के मनगढंत आधारों पर अंकुश लगाने और पालिसीधारकों के अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत संदेश मिला है। para_count-3
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