{"_id":"6339f4d1ae58f811996fb001","slug":"wishes-would-be-fulfilled-by-visiting-maa-shera-wali-dhanaura-news-mbd443151450","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां शेरा वाली के दर्शन करने से पूरी होतीं मुराद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां शेरा वाली के दर्शन करने से पूरी होतीं मुराद
सार
नगर में स्थित प्राचीन देवी मंदिर का इतिहास लगभग 300 से अधिक पुराना बताया जाता है।मंदिर के महंत नित्यानंद त्रिवेदी बताते हैं कि मंदिर परिसर में स्थित वट वृक्ष पर पंचमुखी नाग अक्सर देखे जाते हैं।बायीं ओर भगवान महादेव का मंदिर निर्माणाधीन है।
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मंडी धनौरा। नगर में स्थित प्राचीन देवी मंदिर का इतिहास लगभग 300 से अधिक पुराना बताया जाता है। नवरात्र के दौरान प्राचीन देवी मंदिर में विराजी मां शेरा वाली के दर्शन करने से श्रद्धालुओं की हर मुराद पूरी होतीं है।
महादेव क्षेत्र में स्थित प्राचीन देवी मंदिर सैकड़ों साल पुुराना है। यहां वैष्णो देवी गुफा में स्थित मां शारदे, मां महालक्ष्मी व मां काली की मूर्तियों की तरह तीनों देवियों की मूर्तियां स्थापित हैं। चैत्र व नवरात्र के दौरान सुबह से लेकर रात तक हजारों की तादाद में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के महंत नित्यानंद त्रिवेदी ने बताया कि मंदिर की स्थापना के बाद इसका कई बार जीर्णोद्धार कराया गया।
12 साल पहले भी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। अब इसे नवदुर्गा प्राचीन मंदिर भी कहते हैं। प्राचीन देवी मंदिर में देवी के नौ स्वरूपों की भी मूर्तियां लगी हुई है। हनुमान जी महाराज व भैरो बाबा की मूर्ति स्थापित हैं। पांच साल पहले मंदिर के पीछे एक हाँल बनाया गया है। इसमें राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
विज्ञापन
मंदिर के महंत नित्यानंद त्रिवेदी बताते हैं कि मंदिर परिसर में स्थित वट वृक्ष पर पंचमुखी नाग अक्सर देखे जाते हैं। उनका दावा है कि इस सर्प की आयु सैंकड़ों साल पुरानी है और वट वृक्ष के कोटर में ही उनका वास है। मंदिर के बाहर मां भगवती की 12 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की गई है। बायीं ओर भगवान महादेव का मंदिर निर्माणाधीन है। राजस्थान से आए कारीगर दिन रात मंदिर निर्माण में जुटे हुए हैं।
विज्ञापन
महादेव क्षेत्र में स्थित प्राचीन देवी मंदिर सैकड़ों साल पुुराना है। यहां वैष्णो देवी गुफा में स्थित मां शारदे, मां महालक्ष्मी व मां काली की मूर्तियों की तरह तीनों देवियों की मूर्तियां स्थापित हैं। चैत्र व नवरात्र के दौरान सुबह से लेकर रात तक हजारों की तादाद में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के महंत नित्यानंद त्रिवेदी ने बताया कि मंदिर की स्थापना के बाद इसका कई बार जीर्णोद्धार कराया गया।
विज्ञापन
12 साल पहले भी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। अब इसे नवदुर्गा प्राचीन मंदिर भी कहते हैं। प्राचीन देवी मंदिर में देवी के नौ स्वरूपों की भी मूर्तियां लगी हुई है। हनुमान जी महाराज व भैरो बाबा की मूर्ति स्थापित हैं। पांच साल पहले मंदिर के पीछे एक हाँल बनाया गया है। इसमें राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं स्थापित हैं।
विज्ञापन
मंदिर के महंत नित्यानंद त्रिवेदी बताते हैं कि मंदिर परिसर में स्थित वट वृक्ष पर पंचमुखी नाग अक्सर देखे जाते हैं। उनका दावा है कि इस सर्प की आयु सैंकड़ों साल पुरानी है और वट वृक्ष के कोटर में ही उनका वास है। मंदिर के बाहर मां भगवती की 12 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की गई है। बायीं ओर भगवान महादेव का मंदिर निर्माणाधीन है। राजस्थान से आए कारीगर दिन रात मंदिर निर्माण में जुटे हुए हैं।