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Auraiya News: आज के बाद 35 दिन नहीं गूंजेगी शहनाई, 19 जून से सहालग
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 14 May 2026 12:29 AM IST
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औरैया। मई की सहालग में महज आज ही शादी कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसके बाद अधिकमास लगने के चलते करीब 35 दिन तक विवाह के मुहूर्त नहीं रहेंगे।
ऐसे में इस बीच बाजार मंद पड़ने की आशंका है। हालांकि 19 जून से आठ जुलाई के बीच सात दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे। फिर करीब चार माह तक 20 नवंबर तक विवाह के मुहूर्त नहीं रहेंगे।
आचार्य वीरेंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2083 के ज्येष्ठ मास में 17 मई से अधिकमास या मलमास शुरू होगा। इस माह को धर्म-कर्म के लिए श्रेष्ठ माना जाता है लेकिन विवाह सहित मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
आचार्य श्याम बिहारी दुबे ने बताया कि इस बार ज्येष्ठ मास दो मई से शुरू होकर 29 जून को समाप्त होगा। ज्येष्ठ मास के मध्य में पुरुषोत्तम मास आएगा, जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा। 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिकमास होने के कारण विवाह मुहूर्त नहीं रहेंगे। इसी तरह 16 जुलाई से आठ अगस्त तक गुरु का तारा अस्त रहने से विवाह मुहूर्त नहीं होंगे।
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उन्होंने बताया कि 25 जुलाई से 20 नवंबर तक हरि शयन काल होने से भी विवाह नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि अधिकमास में विष्णु सहस्रनाम जप और भगवद् गीता का पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है। इस अवधि में अनुष्ठान, उपवास और पूजा-पाठ से ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है, जबकि वैदिक परंपरा में इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
उधर, व्यापारी राजेश कुमार, विवेक सोनी, अवधेश सिंह, पुनीत कुमार आदि ने बताया कि सहालग का सीजन खत्म होने के बाद अब पारंपरिक व्यवसाय पर फोकस रहेगा। अगले चार माह सहालग न के बराबर है।
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विवाह के मुहूर्त
मई- 14
जून- 19, 22, 27, 28, 29
जुलाई- 7, 8
नवंबर- 24, 25, 29
दिसंबर- 2, 3, 9
ऐसे में इस बीच बाजार मंद पड़ने की आशंका है। हालांकि 19 जून से आठ जुलाई के बीच सात दिन विवाह के मुहूर्त रहेंगे। फिर करीब चार माह तक 20 नवंबर तक विवाह के मुहूर्त नहीं रहेंगे।
आचार्य वीरेंद्र मोहन शुक्ला ने बताया कि पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2083 के ज्येष्ठ मास में 17 मई से अधिकमास या मलमास शुरू होगा। इस माह को धर्म-कर्म के लिए श्रेष्ठ माना जाता है लेकिन विवाह सहित मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
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आचार्य श्याम बिहारी दुबे ने बताया कि इस बार ज्येष्ठ मास दो मई से शुरू होकर 29 जून को समाप्त होगा। ज्येष्ठ मास के मध्य में पुरुषोत्तम मास आएगा, जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा। 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिकमास होने के कारण विवाह मुहूर्त नहीं रहेंगे। इसी तरह 16 जुलाई से आठ अगस्त तक गुरु का तारा अस्त रहने से विवाह मुहूर्त नहीं होंगे।
उन्होंने बताया कि 25 जुलाई से 20 नवंबर तक हरि शयन काल होने से भी विवाह नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि अधिकमास में विष्णु सहस्रनाम जप और भगवद् गीता का पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है। इस अवधि में अनुष्ठान, उपवास और पूजा-पाठ से ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है, जबकि वैदिक परंपरा में इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
उधर, व्यापारी राजेश कुमार, विवेक सोनी, अवधेश सिंह, पुनीत कुमार आदि ने बताया कि सहालग का सीजन खत्म होने के बाद अब पारंपरिक व्यवसाय पर फोकस रहेगा। अगले चार माह सहालग न के बराबर है।
विवाह के मुहूर्त
मई- 14
जून- 19, 22, 27, 28, 29
जुलाई- 7, 8
नवंबर- 24, 25, 29
दिसंबर- 2, 3, 9