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Auraiya News: बैंक में फंसी रकम के साथ मिला हर्जाना
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 08 Mar 2026 11:41 PM IST
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औरैया। बैंकिंग सेवाओं में लापरवाही और तकनीकी खामियों के चलते एक जागरूक उपभोक्ता को बैंक में फंसी रकम हर्जाने के साथ शनिवार को मिली। कानपुर के पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम से रुपये न निकलने के बावजूद खाते से राशि कटने के मामले में बैंक को झुकना पड़ा।
मूल रूप से औरैया के रहने वाले सुयश तिवारी ने 24 जनवरी 2026 को कानपुर के लखनपुर स्थित पीएनबी एटीएम से 10 हजार रुपये निकालने का प्रयास किया था। एटीएम से नकदी नहीं निकली, लेकिन सुयश के मोबाइल पर राशि डेबिट होने का मेसेज आ गया। तत्काल शिकायत और ईमेल करने के बावजूद बैंक ने अपनी शुरूआती जांच में ट्रांजेक्शन सफल बताकर पल्ला झाड़ लिया।
इस पर सुयश ने अधिवक्ता से संपर्क करने के बाद आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल पोर्टल पर अपना पक्ष रखा। इसके बाद बैंक के उच्चाधिकारियों को साक्ष्यों के साथ ईमेल भेजे गए। अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने बताया कि आरबीआई के एक सर्कुलर के अनुसार एटीएम ट्रांजेक्शन फेल होने पर यदि बैंक निर्धारित समय सीमा के भीतर पैसा वापस नहीं करता तो उसे सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होता है।
इसी नियम के तहत बैंक को 18 दिन की देरी के लिए 1800 रुपये अतिरिक्त देने पड़े। आरबीआई के कड़े रुख के बाद बैंक ने न केवल उपभोक्ता की फंसी हुई 10 हजार रुपये की राशि वापस की, बल्कि देरी के लिए 1800 रुपये का हर्जाना भी भरा।
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मूल रूप से औरैया के रहने वाले सुयश तिवारी ने 24 जनवरी 2026 को कानपुर के लखनपुर स्थित पीएनबी एटीएम से 10 हजार रुपये निकालने का प्रयास किया था। एटीएम से नकदी नहीं निकली, लेकिन सुयश के मोबाइल पर राशि डेबिट होने का मेसेज आ गया। तत्काल शिकायत और ईमेल करने के बावजूद बैंक ने अपनी शुरूआती जांच में ट्रांजेक्शन सफल बताकर पल्ला झाड़ लिया।
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इस पर सुयश ने अधिवक्ता से संपर्क करने के बाद आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल पोर्टल पर अपना पक्ष रखा। इसके बाद बैंक के उच्चाधिकारियों को साक्ष्यों के साथ ईमेल भेजे गए। अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने बताया कि आरबीआई के एक सर्कुलर के अनुसार एटीएम ट्रांजेक्शन फेल होने पर यदि बैंक निर्धारित समय सीमा के भीतर पैसा वापस नहीं करता तो उसे सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होता है।
इसी नियम के तहत बैंक को 18 दिन की देरी के लिए 1800 रुपये अतिरिक्त देने पड़े। आरबीआई के कड़े रुख के बाद बैंक ने न केवल उपभोक्ता की फंसी हुई 10 हजार रुपये की राशि वापस की, बल्कि देरी के लिए 1800 रुपये का हर्जाना भी भरा।
