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Auraiya News: बहू-पोती को हक दिए बिना कोर्ट ने पैतृक संपत्ति बेचने पर लगाई रोक
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औरैया। फफूंद के गांव माखनपुर में बहू और उसकी मासूम बेटी को बेदखल कर पैतृक संपत्ति बेचने की साजिश को न्यायालय ने करारा झटका दिया है। सिविल जज की अदालत ने मामले में एकपक्षीय निर्णय सुनाते हुए ससुर और देवर को विवादित भूमि बेचने से रोक दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक संपत्ति का बंटवारा नहीं हो जाता, तब तक कोई भी पक्ष जमीन की बिक्री नहीं करेगा।
गांव माखनपुर निवासी बेबी की शादी पांच मई 2017 को देवेंद्र प्रसाद के साथ हुई थी। दंपती की एक बेटी अनुष्का है। 11 फरवरी 2020 को देवेंद्र प्रसाद के निधन के बाद से ही घर में कलह शुरू हो गई। वादिनी बेबी ने अदालत को बताया कि उसके ससुर और देवर उसे पैतृक संपत्ति से बेदखल कर घर से निकालना चाहते हैं। आरोप है कि ससुर ने धमकी दी थी कि वह पूरी पैतृक जमीन बेचकर बहू और पोती को सड़क पर ला देंगे और उन्हें दर-दर भटकने को मजबूर कर देंगे। अपने और अपनी बेटी के भरण-पोषण के लिए जब भी बहू ने पति के हिस्से की जमीन की बात की, तो उसे मारपीट कर धमकी दी गई।
अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए प्रतिवादी ससुर और देवर को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन वे न तो अदालत में उपस्थित हुए और न ही अपना जवाब दाखिल किया। बुधवार को मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि बेटे की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी का संपत्ति में वही हक होता है जो उसके पति का था। बिना कानूनी आवश्यकता और सह-दायिकों की सहमति के संयुक्त पारिवारिक संपत्ति का विक्रय नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने अपने आदेश में प्रतिवादी ससुर को माखनपुर स्थित पैतृक भूमि का विक्रय किसी अन्य व्यक्ति के हक में न करनें और न ही दूसरे प्रतिवादी देवर के नाम बैनामा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने बहू के शांतिपूर्ण कब्जे में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने का भी निर्देश दिया है।
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गांव माखनपुर निवासी बेबी की शादी पांच मई 2017 को देवेंद्र प्रसाद के साथ हुई थी। दंपती की एक बेटी अनुष्का है। 11 फरवरी 2020 को देवेंद्र प्रसाद के निधन के बाद से ही घर में कलह शुरू हो गई। वादिनी बेबी ने अदालत को बताया कि उसके ससुर और देवर उसे पैतृक संपत्ति से बेदखल कर घर से निकालना चाहते हैं। आरोप है कि ससुर ने धमकी दी थी कि वह पूरी पैतृक जमीन बेचकर बहू और पोती को सड़क पर ला देंगे और उन्हें दर-दर भटकने को मजबूर कर देंगे। अपने और अपनी बेटी के भरण-पोषण के लिए जब भी बहू ने पति के हिस्से की जमीन की बात की, तो उसे मारपीट कर धमकी दी गई।
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अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए प्रतिवादी ससुर और देवर को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन वे न तो अदालत में उपस्थित हुए और न ही अपना जवाब दाखिल किया। बुधवार को मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि बेटे की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी का संपत्ति में वही हक होता है जो उसके पति का था। बिना कानूनी आवश्यकता और सह-दायिकों की सहमति के संयुक्त पारिवारिक संपत्ति का विक्रय नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने अपने आदेश में प्रतिवादी ससुर को माखनपुर स्थित पैतृक भूमि का विक्रय किसी अन्य व्यक्ति के हक में न करनें और न ही दूसरे प्रतिवादी देवर के नाम बैनामा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने बहू के शांतिपूर्ण कब्जे में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने का भी निर्देश दिया है।
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