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Auraiya News: चार चिट्ठियों के बाद भी 94 पंचायतों की डिजिटल लाइब्रेरी ताले में कैद
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ग्राम पंचायत बमरोलिया सचिवालय में बंद ताला। संवाद
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औरैया। ग्राम पंचायत स्तर पर युवाओं से लेकर बड़े बुजुर्गों को लाइब्रेरी मुहैया कराने को लेकर सिस्टम का रवैया लचर नजर आ रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले की 94 ग्राम पंचायतों में तीन माह से डिजिटल लाइब्रेरी के संचालन नहीं हो पा रहा है। इसके पीछे की वजह जरूरी कंप्यूटर उपकरणों को यूपी डेस्को मुहैया नहीं करा सका है। यह स्थिति तब है, जबकि पंचायती राज विभाग की ओर से चार बार चिट्ठी भी लिखी जा चुकी है।
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले विद्यार्थियों को पढ़ने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए ग्राम पंचायत में ही शिक्षा की पर्याप्त सुविधा हो, इसके लिए राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनवाने का कार्य किया है। जिले में पहले फेज में 94 ग्राम पंचायतों में लाइब्रेरी का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। उसमें किताबें भी आ गई हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपी डेस्को) को तीन माह पहले शासन स्तर से हुए करोड़ों के भुगतान के बाद भी कंप्यूटर सहित अन्य आईटी उपकरण इन पंचायतों में नहीं भेजे गए हैं।
इस कारण ग्राम पंचायतों में बनी लाइब्रेरी अब तक डिजिटल नहीं बन पाई है। हालांकि विभागीय अधिकारी इस मामले में बार-बार यूपी डेस्को को पत्राचार करने का हवाला दे रहे हैं। महज इन उपकरणों के अभाव में पंचायत सचिवालयों में बनाई गई लाइब्रेरी ग्रामीणों की सुविधा के लिए शुरू नहीं हो पाई हैं। जबकि यह प्रयास गांव की आबादी को शहर जैसी पाठ्य सामग्री मुहैया कराने का अहम माध्यम बन सकती है। इस लेटलतीफी को लेकर सरकारी सिस्टम सुस्त नजर आ रहा है।
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एक लाइब्रेरी बनाने में करीब चार लाख हो रहे खर्च
जिले के सात ब्लॉक में कुल 477 ग्राम पंचायतें हैं। शासन के निर्देश पर पहले फेज में 94 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण कार्य कराया गया है। एक लाइब्रेरी के संसाधन जुटाने में करीब चार लाख खर्च किए गए हैं। करोड़ों में पहुंची यह धनराशि खर्च हो जाने के बाद भी गांवों में रहने वाली जनता को अभी तक लाइब्रेरी की सुविधा नहीं मिल पाई है। हालांकि इन पंचायत सचिवालयों में विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर व किताबों की व्यवस्था प्रत्येक लाइब्रेरी में की जा चुकी है। दो कंप्यूटर, प्रिंटर, कैमरे और इन्वर्टर समेत अन्य उपकरणों की सप्लाई को लेकर अधिकारी यूपी डेस्को से सप्लाई मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
जिला स्तर पर जुटे संसाधन, शासन पर टिकी निगाहें
प्रत्येक ग्राम पंचायत में 4 लाख रुपये भेजे गए हैं। इसमें से 70 हजार रुपये फर्नीचर, 1.80 लाख रुपये से नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) व अन्य प्रकाशक की पुस्तकें जुटाई गई है। वहीं 1.30 लाख रुपये से यूपी डेस्को से कंप्यूटर व अन्य उपकरण खरीदे जाने हैं। लेकिन यूपी डेस्को की ओर से अभी तक जिले की किसी भी पंचायत में सामग्री नहीं भेजी गई है।
इन पंचायतों में दी जानी है डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा
रजुआमऊ, खानपुर, जैतपुर, क्योंटरा, हरचंदपुर, बूढ़ादाना, कोठीपुर, बमरोलिया, मुरादगंज, सहायल समेत 94 पंचायतें शामिल हैं।
वर्जन
94 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी को लेकर किताबें और फर्नीचर जुटाया जा चुका है। यूपी डेस्को की ओर से कंप्यूटर व बिजली आधारित उपकरणों की खेप नहीं आई है। इसके लिए जरूरी पत्राचार भी किया जा चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सप्लाई मिलते ही डिजिटल लाइब्रेरी का संचालन शुरू हो जाएगा।-रामकृपाल, सीडीओ
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ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले विद्यार्थियों को पढ़ने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए ग्राम पंचायत में ही शिक्षा की पर्याप्त सुविधा हो, इसके लिए राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी बनवाने का कार्य किया है। जिले में पहले फेज में 94 ग्राम पंचायतों में लाइब्रेरी का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। उसमें किताबें भी आ गई हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपी डेस्को) को तीन माह पहले शासन स्तर से हुए करोड़ों के भुगतान के बाद भी कंप्यूटर सहित अन्य आईटी उपकरण इन पंचायतों में नहीं भेजे गए हैं।
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इस कारण ग्राम पंचायतों में बनी लाइब्रेरी अब तक डिजिटल नहीं बन पाई है। हालांकि विभागीय अधिकारी इस मामले में बार-बार यूपी डेस्को को पत्राचार करने का हवाला दे रहे हैं। महज इन उपकरणों के अभाव में पंचायत सचिवालयों में बनाई गई लाइब्रेरी ग्रामीणों की सुविधा के लिए शुरू नहीं हो पाई हैं। जबकि यह प्रयास गांव की आबादी को शहर जैसी पाठ्य सामग्री मुहैया कराने का अहम माध्यम बन सकती है। इस लेटलतीफी को लेकर सरकारी सिस्टम सुस्त नजर आ रहा है।
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एक लाइब्रेरी बनाने में करीब चार लाख हो रहे खर्च
जिले के सात ब्लॉक में कुल 477 ग्राम पंचायतें हैं। शासन के निर्देश पर पहले फेज में 94 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण कार्य कराया गया है। एक लाइब्रेरी के संसाधन जुटाने में करीब चार लाख खर्च किए गए हैं। करोड़ों में पहुंची यह धनराशि खर्च हो जाने के बाद भी गांवों में रहने वाली जनता को अभी तक लाइब्रेरी की सुविधा नहीं मिल पाई है। हालांकि इन पंचायत सचिवालयों में विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर व किताबों की व्यवस्था प्रत्येक लाइब्रेरी में की जा चुकी है। दो कंप्यूटर, प्रिंटर, कैमरे और इन्वर्टर समेत अन्य उपकरणों की सप्लाई को लेकर अधिकारी यूपी डेस्को से सप्लाई मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
जिला स्तर पर जुटे संसाधन, शासन पर टिकी निगाहें
प्रत्येक ग्राम पंचायत में 4 लाख रुपये भेजे गए हैं। इसमें से 70 हजार रुपये फर्नीचर, 1.80 लाख रुपये से नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) व अन्य प्रकाशक की पुस्तकें जुटाई गई है। वहीं 1.30 लाख रुपये से यूपी डेस्को से कंप्यूटर व अन्य उपकरण खरीदे जाने हैं। लेकिन यूपी डेस्को की ओर से अभी तक जिले की किसी भी पंचायत में सामग्री नहीं भेजी गई है।
इन पंचायतों में दी जानी है डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा
रजुआमऊ, खानपुर, जैतपुर, क्योंटरा, हरचंदपुर, बूढ़ादाना, कोठीपुर, बमरोलिया, मुरादगंज, सहायल समेत 94 पंचायतें शामिल हैं।
वर्जन
94 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी को लेकर किताबें और फर्नीचर जुटाया जा चुका है। यूपी डेस्को की ओर से कंप्यूटर व बिजली आधारित उपकरणों की खेप नहीं आई है। इसके लिए जरूरी पत्राचार भी किया जा चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सप्लाई मिलते ही डिजिटल लाइब्रेरी का संचालन शुरू हो जाएगा।-रामकृपाल, सीडीओ

ग्राम पंचायत बमरोलिया सचिवालय में बंद ताला। संवाद