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Auraiya News: हत्या व लूट के मामले में चार दोषमुक्त हुए
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 13 Jun 2026 11:52 PM IST
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औरैया। दिबियापुर थाना क्षेत्र में हत्या और लूट के एक चर्चित मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश ने चारों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। कोर्ट ने सबूतों के अभाव और अभियोजन पक्ष के बयानों में विरोधाभास के चलते आरोपियों को राहत दी है।
मामला 19 अगस्त 2013 का है। वादी रामसजीवन ने आरोप लगाया था कि गांव के ही ओमप्रकाश, कैलाश बाबू, चंदर और शिवकुमार उसके पिता बेटालाल को भैंस खरीदने के बहाने घर से ले गए थे। तहरीर के अनुसार रास्ते में आरोपियों ने बेटालाल के साथ गाली-गलौज और मारपीट की, उनके पास मौजूद 35 हजार रुपये लूट लिए और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।
रामसजीवन ने दावा किया था कि उसने घटना को अपनी आंखों से देखा था और आरोपियों ने उसे भी जान से मारने की धमकी दी थी। शनिवार को मामले अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किया गया एकमात्र चश्मदीद गवाह रामसजीवन पूरी तरह से अविश्वसनीय है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादी के बयानों में कई विरोधाभास थे।
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अदालत ने कहा कि वादी रामसजीवन का चश्मदीद होना सिद्ध नहीं हो सका। पंचायतनामा में सूचना देने वाले के रूप में किसी और का नाम दर्ज था, जो वादी के दावों को कमजोर करता है। वारदात के करीब डेढ़ महीने बाद मुकदमा दर्ज कराई गई थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। जिसके चलते, कानून का लाभ देते हुए ओमप्रकाश, कैलाश बाबू, चंदर और शिवकुमार को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।
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बिजली चोरी में आरोपी दोषमुक्त
औरैया। विशेष न्यायालय विद्युत अधिनियम ने बिजली चोरी के एक पुराने मामले में आरोपी गुरुचरन को दोषमुक्त कर दिया है। वर्ष 2019 में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। सुनवाई के दौरान स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने 9952 रुपये राजस्व और चार हजार रुपये शमन शुल्क जमा कर दिया है। इसके आधार पर विभाग ने नो ड्यूज प्रमाणपत्र जारी किया। न्यायाधीश राजीव कुमार वत्स ने आरोपी को दोषमुक्त कर केस निस्तारित कर दिया गया। (संवाद)
मामला 19 अगस्त 2013 का है। वादी रामसजीवन ने आरोप लगाया था कि गांव के ही ओमप्रकाश, कैलाश बाबू, चंदर और शिवकुमार उसके पिता बेटालाल को भैंस खरीदने के बहाने घर से ले गए थे। तहरीर के अनुसार रास्ते में आरोपियों ने बेटालाल के साथ गाली-गलौज और मारपीट की, उनके पास मौजूद 35 हजार रुपये लूट लिए और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।
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रामसजीवन ने दावा किया था कि उसने घटना को अपनी आंखों से देखा था और आरोपियों ने उसे भी जान से मारने की धमकी दी थी। शनिवार को मामले अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किया गया एकमात्र चश्मदीद गवाह रामसजीवन पूरी तरह से अविश्वसनीय है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादी के बयानों में कई विरोधाभास थे।
अदालत ने कहा कि वादी रामसजीवन का चश्मदीद होना सिद्ध नहीं हो सका। पंचायतनामा में सूचना देने वाले के रूप में किसी और का नाम दर्ज था, जो वादी के दावों को कमजोर करता है। वारदात के करीब डेढ़ महीने बाद मुकदमा दर्ज कराई गई थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। जिसके चलते, कानून का लाभ देते हुए ओमप्रकाश, कैलाश बाबू, चंदर और शिवकुमार को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।
बिजली चोरी में आरोपी दोषमुक्त
औरैया। विशेष न्यायालय विद्युत अधिनियम ने बिजली चोरी के एक पुराने मामले में आरोपी गुरुचरन को दोषमुक्त कर दिया है। वर्ष 2019 में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। सुनवाई के दौरान स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने 9952 रुपये राजस्व और चार हजार रुपये शमन शुल्क जमा कर दिया है। इसके आधार पर विभाग ने नो ड्यूज प्रमाणपत्र जारी किया। न्यायाधीश राजीव कुमार वत्स ने आरोपी को दोषमुक्त कर केस निस्तारित कर दिया गया। (संवाद)