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Auraiya News: डीएम की अनुमति के बिना करा ली जमीन की रजिस्ट्री
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 30 Mar 2026 12:21 AM IST
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औरैया। अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन खरीदने के लिए डीएम की अनुमति अनिवार्य है। इसके बावजूद अजीतमल क्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर करीब चार करोड़ रुपये कीमत की जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई।
अब शिकायत के बाद हुई जांच में मामला सही पाए जाने पर अब इस जमीन को राज्य सरकार के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रकरण में एसडीएम अजीतमल कोर्ट में वाद दर्ज कर छह लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
मामला सराय बाबरपुर स्थित हाईवे किनारे की करीब 800 वर्ग मीटर जमीन का है। यह पूर्व में अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम दर्ज थी। आजादनगर निवासी अरुण कुमार दुबे ने आठ सितंबर 2025 को इस संबंध में शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि डीएम की अनुमति के बिना एक ही परिवार के छह लोगों ने इस जमीन को अपने नाम करा लिया है।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीएम के निर्देश पर एसडीएम अजीतमल ने तहसीलदार अविनाश चंद्र से जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जमीन अनुसूचित जाति के व्यक्ति की थी और खरीद के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 98 (1) का उल्लंघन मानते हुए जमीन को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने की संस्तुति की है। इसके आधार पर शासकीय अधिवक्ता की ओर से एसडीएम कोर्ट में सरकार बनाम रवि चौधरी व अन्य के नाम से वाद दाखिल किया गया है।
यह पूरा मामला सराय बाबरपुर की गाटा संख्या 701 व 708 से संबंधित है। जमीन खरीदने वालों में रवि चौधरी, रजत चौधरी, मिथलेश कुमारी, धनंजय दुबे, आशा देवी और अरविंद कुमार दुबे शामिल हैं। सभी को कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।
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पहले भी सामने आ चुका ऐसा मामला
बिना अनुमति अनुसूचित जाति की जमीन खरीदने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले औरैया शहर के जालौन रोड क्षेत्र में भी इसी तरह का प्रकरण सामने आया था, जिसमें एसडीएम न्यायिक कोर्ट ने जमीन को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने के आदेश दिए थे। अजीतमल का यह दूसरा मामला सामने आने के बाद ऐसे प्रकरण प्रशासन की निगरानी में आ गए हैं।
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जाति छिपाकर हुआ खेल
दरअसल, इस जमीन को खरीदने के लिए विक्रेता की जाति को छिपा लिया गया था। रजिस्ट्रार कार्यालय को भी इसकी भनक नहीं लगी। यदि रजिस्ट्रार कार्यालय में बैनामा के दौरान विक्रेता का ब्योरा देख लिया जाता तो यह फर्जीवाड़ा नहीं हो पाता। एक साल बाद हुई शिकायत पर जांच हुई तो सच सामने आ गया।
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तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर वाद दर्ज कराया गया है। जांच में बिना डीएम की अनुमति अनुसूचित जाति के व्यक्ति से जमीन खरीदने का मामला सही पाया गया है। सभी संबंधितों को नोटिस जारी किए गए हैं।
- निखिल राजपूत, एसडीएम अजीतमल
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अब शिकायत के बाद हुई जांच में मामला सही पाए जाने पर अब इस जमीन को राज्य सरकार के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रकरण में एसडीएम अजीतमल कोर्ट में वाद दर्ज कर छह लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
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मामला सराय बाबरपुर स्थित हाईवे किनारे की करीब 800 वर्ग मीटर जमीन का है। यह पूर्व में अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम दर्ज थी। आजादनगर निवासी अरुण कुमार दुबे ने आठ सितंबर 2025 को इस संबंध में शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि डीएम की अनुमति के बिना एक ही परिवार के छह लोगों ने इस जमीन को अपने नाम करा लिया है।
शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीएम के निर्देश पर एसडीएम अजीतमल ने तहसीलदार अविनाश चंद्र से जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जमीन अनुसूचित जाति के व्यक्ति की थी और खरीद के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी।
तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 98 (1) का उल्लंघन मानते हुए जमीन को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने की संस्तुति की है। इसके आधार पर शासकीय अधिवक्ता की ओर से एसडीएम कोर्ट में सरकार बनाम रवि चौधरी व अन्य के नाम से वाद दाखिल किया गया है।
यह पूरा मामला सराय बाबरपुर की गाटा संख्या 701 व 708 से संबंधित है। जमीन खरीदने वालों में रवि चौधरी, रजत चौधरी, मिथलेश कुमारी, धनंजय दुबे, आशा देवी और अरविंद कुमार दुबे शामिल हैं। सभी को कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं।
पहले भी सामने आ चुका ऐसा मामला
बिना अनुमति अनुसूचित जाति की जमीन खरीदने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले औरैया शहर के जालौन रोड क्षेत्र में भी इसी तरह का प्रकरण सामने आया था, जिसमें एसडीएम न्यायिक कोर्ट ने जमीन को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने के आदेश दिए थे। अजीतमल का यह दूसरा मामला सामने आने के बाद ऐसे प्रकरण प्रशासन की निगरानी में आ गए हैं।
जाति छिपाकर हुआ खेल
दरअसल, इस जमीन को खरीदने के लिए विक्रेता की जाति को छिपा लिया गया था। रजिस्ट्रार कार्यालय को भी इसकी भनक नहीं लगी। यदि रजिस्ट्रार कार्यालय में बैनामा के दौरान विक्रेता का ब्योरा देख लिया जाता तो यह फर्जीवाड़ा नहीं हो पाता। एक साल बाद हुई शिकायत पर जांच हुई तो सच सामने आ गया।
तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर वाद दर्ज कराया गया है। जांच में बिना डीएम की अनुमति अनुसूचित जाति के व्यक्ति से जमीन खरीदने का मामला सही पाया गया है। सभी संबंधितों को नोटिस जारी किए गए हैं।
- निखिल राजपूत, एसडीएम अजीतमल