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Auraiya News: कबीर आश्रम में लूट के मामले में परिवाद दर्ज करने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:35 PM IST
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औरैया। थाना दिबियापुर क्षेत्र स्थित कबीर आश्रम में लूटपाट और धमकी देने के मामले में अदालत ने संज्ञान लिया है। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने पीड़ित के प्रार्थना पत्र को अब परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिए हैं।
गांव लखनपुर निवासी साध्वी मानदास ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि 3 जनवरी 2026 की शाम जब वह आश्रम में पूजा-अर्चना कर रही थी, तब सुनील कुमार, रीमा देवी, संतोष कुमार और श्याम बाबू ने अलमारी का ताला तोड़कर सामान और 27 हजार रुपये लूट लिए। विरोध करने पर आरोपी धारदार हथियार लहराते धमकी देते हुए मौके से भाग गए।
साध्वी का आरोप है कि शिकायत करने पर एक मई को आरोपी ने फिर आश्रम आए और गाली-गलौज करते हुए दानपेटी लूट ले गए। इस संबंध में थाना दिबियापुर और एसपी को शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने अदालत की शरण ली।
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अदालत ने इस मामले में थाना दिबियापुर से आख्या तलब की थी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह घटना नहीं हुई है और आरोपित पक्ष सुनील व रीमा आश्रम के पूर्व बाबा जयदास के परिजन हैं।
हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रार्थिनी ने अपने प्रार्थना पत्र में कई महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट नहीं किए थे, जैसे कि आश्रम से विपक्षीगणों का पारिवारिक संबंध और घटना के समय पुलिस को सूचना न देना। अदालत ने इस मामले को अब परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है और बयान के लिए 28 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
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गैरहाजिर रहने पर मुकदमों के परिवाद खारिज
औरैया। विशेष सत्र न्यायालय की अदालत ने चार अलग-अलग मामलों में दायर परिवाद को निरस्त कर दिया है। विशेष न्यायाधीश महेश कुमार ने परिवादियों की ओर से पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न करने, अदालती कार्यवाही में रुचि न लेने और लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उठाया है। अदालत ने सभी मामलों की पत्रावलियों को दाखिल-दफ्तर करने के आदेश दिए हैं।
पहला मामला फफूंद थाना क्षेत्र का है। परिवादिनी किरन कुमारी ने 12 दिसंबर 2023 को धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे कोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को परिवाद के रूप में दर्ज किया था। परिवादिनी लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद भी वह साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। जनवरी 2025 में सिर्फ एक गवाह राकेश कुमार का बयान दर्ज हुआ, जिसके बाद से वह गायब रहीं।
सुनवाई के दौरान न तो परिवादिनी आईं और न ही उनके अधिवक्ता। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में मुकदमा बंद कर दिया। दूसरे मामले में सुघर सिंह ने 30 मई 2022 को मनोज कठेरिया व दो अज्ञात के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया था। सुघर सिंह ने बयान तो दर्ज कराए, लेकिन धारा 202 के तहत कोर्ट में कोई गवाह पेश नहीं किया।
अदालत ने इसे लापरवाही मानते हुए परिवाद को खारिज कर दिया। इसी प्रकार तीसरे मामले में अजीतमल थाना क्षेत्र की निवासी रुखसाना बेगम ने प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे 25 जुलाई 2025 को परिवाद माना गया था। मामला साक्ष्य के लिए था लेकिन रुखसाना बेगम पिछली कई तारीखों से कोर्ट नहीं पहुंचीं। इससे साक्ष्य का अवसर समाप्त करते हुए कोर्ट ने परिवाद निरस्त कर दिया।
एक अन्य मामले में परिवादी रामऔतार ने 18 अक्तूबर 2024 को प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे 19 दिसंबर 2024 को परिवाद के रूप में दर्ज कर विपक्षियों को नोटिस जारी किए गए थे। दिसंबर 2025 में बयान भी हुए। इसके बाद से परिवादी जगराम सिंह लगातार अनुपस्थित चल रहे थे। कोर्ट ने पाया कि मामले में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। न्यायाधीश महेश कुमार ने परिवाद को भी खारिज कर दिया। (संवाद)
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युवती को ले जाने के आरोपी को मिली जमानत
औरैया। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र में युवती को ले जाने और धमकी देने के आरोपी गौरव उर्फ छोटू को जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है। प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेश कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें और पीड़िता के बयानों का अवलोकन करने के बाद यह आदेश जारी किया।
अजीतमल थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने 24 मई 2026 को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 20 मई को गौरव और गुलशन उसकी 20 वर्षीय बेटी ले जाने गए। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई की गई। न्यायालय के समक्ष पीड़िता ने अपने बयानों में स्पष्ट कहा कि वह गौरव के साथ अपनी मर्जी से गई थी।
गौरव ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान धनराशि के दो जमानतदारों को पेश करने पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया गया है। गौरव दो जून से न्यायिक हिरासत में था। (संवाद)
गांव लखनपुर निवासी साध्वी मानदास ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि 3 जनवरी 2026 की शाम जब वह आश्रम में पूजा-अर्चना कर रही थी, तब सुनील कुमार, रीमा देवी, संतोष कुमार और श्याम बाबू ने अलमारी का ताला तोड़कर सामान और 27 हजार रुपये लूट लिए। विरोध करने पर आरोपी धारदार हथियार लहराते धमकी देते हुए मौके से भाग गए।
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साध्वी का आरोप है कि शिकायत करने पर एक मई को आरोपी ने फिर आश्रम आए और गाली-गलौज करते हुए दानपेटी लूट ले गए। इस संबंध में थाना दिबियापुर और एसपी को शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने अदालत की शरण ली।
अदालत ने इस मामले में थाना दिबियापुर से आख्या तलब की थी। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह घटना नहीं हुई है और आरोपित पक्ष सुनील व रीमा आश्रम के पूर्व बाबा जयदास के परिजन हैं।
हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रार्थिनी ने अपने प्रार्थना पत्र में कई महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट नहीं किए थे, जैसे कि आश्रम से विपक्षीगणों का पारिवारिक संबंध और घटना के समय पुलिस को सूचना न देना। अदालत ने इस मामले को अब परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है और बयान के लिए 28 जुलाई की तिथि निर्धारित की है।
गैरहाजिर रहने पर मुकदमों के परिवाद खारिज
औरैया। विशेष सत्र न्यायालय की अदालत ने चार अलग-अलग मामलों में दायर परिवाद को निरस्त कर दिया है। विशेष न्यायाधीश महेश कुमार ने परिवादियों की ओर से पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न करने, अदालती कार्यवाही में रुचि न लेने और लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उठाया है। अदालत ने सभी मामलों की पत्रावलियों को दाखिल-दफ्तर करने के आदेश दिए हैं।
पहला मामला फफूंद थाना क्षेत्र का है। परिवादिनी किरन कुमारी ने 12 दिसंबर 2023 को धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे कोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को परिवाद के रूप में दर्ज किया था। परिवादिनी लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद भी वह साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। जनवरी 2025 में सिर्फ एक गवाह राकेश कुमार का बयान दर्ज हुआ, जिसके बाद से वह गायब रहीं।
सुनवाई के दौरान न तो परिवादिनी आईं और न ही उनके अधिवक्ता। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में मुकदमा बंद कर दिया। दूसरे मामले में सुघर सिंह ने 30 मई 2022 को मनोज कठेरिया व दो अज्ञात के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया था। सुघर सिंह ने बयान तो दर्ज कराए, लेकिन धारा 202 के तहत कोर्ट में कोई गवाह पेश नहीं किया।
अदालत ने इसे लापरवाही मानते हुए परिवाद को खारिज कर दिया। इसी प्रकार तीसरे मामले में अजीतमल थाना क्षेत्र की निवासी रुखसाना बेगम ने प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे 25 जुलाई 2025 को परिवाद माना गया था। मामला साक्ष्य के लिए था लेकिन रुखसाना बेगम पिछली कई तारीखों से कोर्ट नहीं पहुंचीं। इससे साक्ष्य का अवसर समाप्त करते हुए कोर्ट ने परिवाद निरस्त कर दिया।
एक अन्य मामले में परिवादी रामऔतार ने 18 अक्तूबर 2024 को प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे 19 दिसंबर 2024 को परिवाद के रूप में दर्ज कर विपक्षियों को नोटिस जारी किए गए थे। दिसंबर 2025 में बयान भी हुए। इसके बाद से परिवादी जगराम सिंह लगातार अनुपस्थित चल रहे थे। कोर्ट ने पाया कि मामले में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। न्यायाधीश महेश कुमार ने परिवाद को भी खारिज कर दिया। (संवाद)
युवती को ले जाने के आरोपी को मिली जमानत
औरैया। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र में युवती को ले जाने और धमकी देने के आरोपी गौरव उर्फ छोटू को जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है। प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेश कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें और पीड़िता के बयानों का अवलोकन करने के बाद यह आदेश जारी किया।
अजीतमल थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने 24 मई 2026 को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 20 मई को गौरव और गुलशन उसकी 20 वर्षीय बेटी ले जाने गए। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई की गई। न्यायालय के समक्ष पीड़िता ने अपने बयानों में स्पष्ट कहा कि वह गौरव के साथ अपनी मर्जी से गई थी।
गौरव ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। उसे एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान धनराशि के दो जमानतदारों को पेश करने पर जेल से रिहा करने का आदेश दिया गया है। गौरव दो जून से न्यायिक हिरासत में था। (संवाद)