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Auraiya News: सखी मार्ट से समूह की महिलाओं को मिलेगी समृद्धि की राह
Thu, 09 Jul 2026 12:15 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 09 Jul 2026 12:15 AM IST
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औरैया। समूह की महिलाओं के बनाए गए उत्पादों को अब मॉल व मार्ट के जरिये व्यावसायिक बाजार दिया जाएगा। एक ही छत के नीचे उनके स्वदेसी उत्पादों को बाजार मुहैया होगा।
इसके लिए एनआरएलएम की ओर से सखी मार्ट की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके लिए शहर समेत ब्लॉक स्तर के कस्बों में किराये के भवनों की तलाश शुरू की गई है।
जिले में 60 से ज्यादा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा अलग-अलग उत्पाद बनाए जा रहे हैं। वहीं 30 से ज्यादा समूह सेवा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। महिलाओं के द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों को बाजार में उतारने पर कई तरह की कठिनाई आती हैं। इसमें ब्रांडेड कंपनियों की ओर से सस्ते भाव और पैकेजिंग की अवधारणा चुनौती पेश करती है।
इस समस्या का एनआरएलएम ने तोड़ निकाला है। इसके लिए मॉल व मार्ट का विकल्प तैयार किया गया है। जहां स्वदेशी के मंत्र के जरिये समूह की महिलाओं के उत्पाद लोगों को एक ही छत के नीचे मिल सकेंगे। थोक दुकानों के जरिए होने वाले व्यवसाय की कड़ी अब सीधे ग्राहकों से जुड़ जाएंगी।
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एनआरएलएम की ओर से सखी मार्ट की रूपरेखा तैयार की गई है। जिसे जल्द ही शहर व कस्बों में तैयार किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने समूहों के साथ सामंजस्य बैठाते हुए दुकानों की तलाश शुरू कर दी है।
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सखी मार्ट को लेकर बनेगा बायलॉज
महिलाओं के उत्पाद सखी मार्ट में पहुंचने और बिक्री से लेकर आय व्यय की गुणा-गणित व्यवस्थित हो। इसके लिए एनआरएलएम एक बायलॉज भी निर्धारित करेगा। इस बायलॉज के जरिये उत्पादों की बिक्री के साथ मार्ट की बिजली व किराये से लेकर विक्रेता का मेहनताना सब कुछ तय हो जाएगा। सखी मार्ट से जुड़ने वाले समूहों को भी इसकी व्यवस्थाओं में भागीदारी निभानी होगी। किसी भी स्तर पर अनियमितता न हो। इसके लिए गाइडलाइन भी तय होगी।
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ये उत्पाद बना रहीं महिलाएं
आंवले के लड्डू, कैंडी, अचार, बुकनू, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बल्ब, मशरूम उत्पादन, फूल व सब्जी उत्पादन, गोबर के दीये और मूर्ति, मोमबत्ती, अगरबत्ती, बड़ी, मसाले, शहद, दलिया, शुद्ध आटा, शहद समेत कई उत्पाद महिलाएं बना रही हैं।
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समूह की महिलाओं के द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों को अब सखी मार्ट के जरिए व्यवसायिक माहौल दिया जाएगा। इसके लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है। शहर कस्बों की प्राइम लोकेशन पर दुकानें देखी जा रही हैं।- मनीष कुमार मौर्या, प्रभारी डीसी एनआरएलएम
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इसके लिए एनआरएलएम की ओर से सखी मार्ट की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके लिए शहर समेत ब्लॉक स्तर के कस्बों में किराये के भवनों की तलाश शुरू की गई है।
जिले में 60 से ज्यादा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा अलग-अलग उत्पाद बनाए जा रहे हैं। वहीं 30 से ज्यादा समूह सेवा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। महिलाओं के द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों को बाजार में उतारने पर कई तरह की कठिनाई आती हैं। इसमें ब्रांडेड कंपनियों की ओर से सस्ते भाव और पैकेजिंग की अवधारणा चुनौती पेश करती है।
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इस समस्या का एनआरएलएम ने तोड़ निकाला है। इसके लिए मॉल व मार्ट का विकल्प तैयार किया गया है। जहां स्वदेशी के मंत्र के जरिये समूह की महिलाओं के उत्पाद लोगों को एक ही छत के नीचे मिल सकेंगे। थोक दुकानों के जरिए होने वाले व्यवसाय की कड़ी अब सीधे ग्राहकों से जुड़ जाएंगी।
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एनआरएलएम की ओर से सखी मार्ट की रूपरेखा तैयार की गई है। जिसे जल्द ही शहर व कस्बों में तैयार किया जाएगा। इसके लिए विभाग ने समूहों के साथ सामंजस्य बैठाते हुए दुकानों की तलाश शुरू कर दी है।
सखी मार्ट को लेकर बनेगा बायलॉज
महिलाओं के उत्पाद सखी मार्ट में पहुंचने और बिक्री से लेकर आय व्यय की गुणा-गणित व्यवस्थित हो। इसके लिए एनआरएलएम एक बायलॉज भी निर्धारित करेगा। इस बायलॉज के जरिये उत्पादों की बिक्री के साथ मार्ट की बिजली व किराये से लेकर विक्रेता का मेहनताना सब कुछ तय हो जाएगा। सखी मार्ट से जुड़ने वाले समूहों को भी इसकी व्यवस्थाओं में भागीदारी निभानी होगी। किसी भी स्तर पर अनियमितता न हो। इसके लिए गाइडलाइन भी तय होगी।
ये उत्पाद बना रहीं महिलाएं
आंवले के लड्डू, कैंडी, अचार, बुकनू, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बल्ब, मशरूम उत्पादन, फूल व सब्जी उत्पादन, गोबर के दीये और मूर्ति, मोमबत्ती, अगरबत्ती, बड़ी, मसाले, शहद, दलिया, शुद्ध आटा, शहद समेत कई उत्पाद महिलाएं बना रही हैं।
समूह की महिलाओं के द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों को अब सखी मार्ट के जरिए व्यवसायिक माहौल दिया जाएगा। इसके लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है। शहर कस्बों की प्राइम लोकेशन पर दुकानें देखी जा रही हैं।- मनीष कुमार मौर्या, प्रभारी डीसी एनआरएलएम