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Auraiya News: बीमा कंपनी को ब्याज समेत देनी होगी क्लेम की राशि
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Fri, 13 Mar 2026 11:51 PM IST
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औरैया। विश्व उपभोक्ता दिवस (15 मार्च) से ठीक पहले जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनियों की मनमानी पर कड़ा प्रहार किया है। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस को सेवा में दोषी पाया।
आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह परिवादी को पांच लाख रुपये की बीमित राशि, ब्याज और मानसिक कष्ट के लिए धनराशि अदा करे।
दिबियापुर थाना क्षेत्र के गांव उसरारी निवासी चंद्रशेखर उर्फ अनिल यादव ने साल 2019 से चली आ रही अपनी पुरानी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को 18642 रुपये प्रीमियम देकर स्टार हेल्थ में पोर्ट कराया था। दिसंबर 2024 में अचानक हृदय संबंधी बीमारी के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और सर्जरी करवानी पड़ी। जब उन्होंने कैशलेस इलाज के लिए दावा किया तो कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम निरस्त कर दिया कि उन्होंने पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमारी की जानकारी छिपाई थी।
इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। अधिवक्ता ने बहस करते हुए साक्ष्य पेश किए। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ऐसा एक भी ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो सके कि मरीज को पॉलिसी लेने से पहले से यह बीमारी थी। आयोग ने कंपनी के तर्क को बेबुनियाद करार दिया।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्रा ने इसे सेवा में बड़ी लापरवाही और कमी माना। साथ ही कंपनी को 45 दिनों के अंदर पांच लाख रुपये इलाज की बीमित धनराशि सात प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए। इसके अतिरिक्त एक लाख रुपये मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए जुर्माना देने का आदेश दिया है।
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आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह परिवादी को पांच लाख रुपये की बीमित राशि, ब्याज और मानसिक कष्ट के लिए धनराशि अदा करे।
दिबियापुर थाना क्षेत्र के गांव उसरारी निवासी चंद्रशेखर उर्फ अनिल यादव ने साल 2019 से चली आ रही अपनी पुरानी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को 18642 रुपये प्रीमियम देकर स्टार हेल्थ में पोर्ट कराया था। दिसंबर 2024 में अचानक हृदय संबंधी बीमारी के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और सर्जरी करवानी पड़ी। जब उन्होंने कैशलेस इलाज के लिए दावा किया तो कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम निरस्त कर दिया कि उन्होंने पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमारी की जानकारी छिपाई थी।
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इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। अधिवक्ता ने बहस करते हुए साक्ष्य पेश किए। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ऐसा एक भी ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो सके कि मरीज को पॉलिसी लेने से पहले से यह बीमारी थी। आयोग ने कंपनी के तर्क को बेबुनियाद करार दिया।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जगन्नाथ मिश्रा ने इसे सेवा में बड़ी लापरवाही और कमी माना। साथ ही कंपनी को 45 दिनों के अंदर पांच लाख रुपये इलाज की बीमित धनराशि सात प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करने के आदेश दिए। इसके अतिरिक्त एक लाख रुपये मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए जुर्माना देने का आदेश दिया है।