{"_id":"69baf08f2e2658f9460f14b5","slug":"the-ultramodern-burn-unit-built-at-a-cost-of-rs-1-crore-has-been-closed-for-10-years-auraiya-news-c-211-1-aur1020-141464-2026-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: एक करोड़ से बनी अत्याधुनिक बर्न यूनिट 10 साल से बंद पड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: एक करोड़ से बनी अत्याधुनिक बर्न यूनिट 10 साल से बंद पड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:05 AM IST
विज्ञापन
फोटो-15-मेडिकल कॉलेज में बनी प्लास्टिक सर्जरी व बर्न यूनिट। संवाद
विज्ञापन
औरैया/ककोर। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की हकीकत मेडिकल कॉलेज चिचौली की प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट की बदहाल स्थिति बयां कर रही है। दस साल पहले करीब एक करोड़ रुपये से तैयार की गई बर्न यूनिट पर अब भी ताला पड़ा है। यहां न डॉक्टर तैनात हो सके और न ही पैरामेडिकल स्टाफ।
वर्ष 2015 में इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैसकर गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए तैयार किया गया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि अब जनपद के लोगों को आग से झुलसने जैसी गंभीर स्थिति में बाहर नहीं भागना पड़ेगा और प्लास्टिक सर्जरी जैसी जटिल चिकित्सा सेवाएं भी जिले में ही उपलब्ध होंगी।
लेकिन यह उम्मीदें कागजों तक ही सिमटकर रह गईं। आज हालात यह हैं कि यूनिट के गेट पर ताला लटक रहा है और अंदर धूल, गंदगी व बदहाली का अंबार है। खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं, दीवारों की टाइल्स उखड़ने लगी हैं और फर्श कई जगह धंस चुका है। लाखों रुपये की कीमत वाले उपकरण रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि यह भवन अब पक्षियों का बसेरा बन चुका है। कबूतरों ने यहां स्थायी डेरा डाल लिया है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते एक खंडहर में तब्दील होती जा रही है।
वहीं, बर्न यूनिट के संचालन न होने का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। आग से झुलसे गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज नहीं मिल पाता। मजबूरी में उन्हें लगभग 80 किलोमीटर दूर सैफई रेफर किया जाता है। कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं। परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक बन जाती है। लोगों का कहना है कि यहां सुविधाआें के बाद भी इलाज नहीं उपलब्ध है। ऐसे में मरीजों को यहां-वहां भागना पड़ रहा है।
Trending Videos
वर्ष 2015 में इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैसकर गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए तैयार किया गया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि अब जनपद के लोगों को आग से झुलसने जैसी गंभीर स्थिति में बाहर नहीं भागना पड़ेगा और प्लास्टिक सर्जरी जैसी जटिल चिकित्सा सेवाएं भी जिले में ही उपलब्ध होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
लेकिन यह उम्मीदें कागजों तक ही सिमटकर रह गईं। आज हालात यह हैं कि यूनिट के गेट पर ताला लटक रहा है और अंदर धूल, गंदगी व बदहाली का अंबार है। खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं, दीवारों की टाइल्स उखड़ने लगी हैं और फर्श कई जगह धंस चुका है। लाखों रुपये की कीमत वाले उपकरण रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे खराब हो रहे हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि यह भवन अब पक्षियों का बसेरा बन चुका है। कबूतरों ने यहां स्थायी डेरा डाल लिया है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते एक खंडहर में तब्दील होती जा रही है।
वहीं, बर्न यूनिट के संचालन न होने का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। आग से झुलसे गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज नहीं मिल पाता। मजबूरी में उन्हें लगभग 80 किलोमीटर दूर सैफई रेफर किया जाता है। कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं। परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक बन जाती है। लोगों का कहना है कि यहां सुविधाआें के बाद भी इलाज नहीं उपलब्ध है। ऐसे में मरीजों को यहां-वहां भागना पड़ रहा है।