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Auraiya News: बेमौसम बारिश से सब्जी व दलहनी फसलें प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 14 Jun 2026 12:12 AM IST
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फोटो-26 खेत में खड़ी टमाटर की फसल।संवाद
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बिधूना। मई और जून में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदला हुआ है। नौतपा के दौरान भी कई बार बारिश हुई। इसके बाद बृहस्पतिवार और फिर शनिवार को हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
नौतपा के दौरान हुई बारिश ने मक्का की फसल को संजीवनी देने का काम किया। वहीं, सब्जी, मूंग और उड़द जैसी फसलों के लिए यह नुकसानदायक साबित हुई।
किसानों ने बताया कि लगातार हो रही बारिश का सबसे अधिक असर सब्जी उत्पादन पर पड़ रहा है। क्षेत्र में लौकी, तुरई, टमाटर और बैंगन की फसलें अत्यधिक नमी और जलभराव के कारण प्रभावित हो रही हैं। टमाटर में सड़न की समस्या तेजी से बढ़ रही है जबकि लौकी और तुरई की बेलों में कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। बैंगन की फसल भी रोगों की चपेट में आने लगी है। इससे किसानों की लागत बढ़ रही और उत्पादन घटने की आशंका पैदा हो गई है।
बारिश से खेतों में पानी भर जाने से जोताई, धान की नर्सरी डालने व अन्य कृषि कार्यों पर भी असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि मौसम का यह असामान्य चक्र खेती के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहा तो खरीफ सीजन की कई फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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तापमान में आई एक डिग्री की गिरावट
बिधूना। शनिवार तड़के जनपद में छह मिमी बारिश दर्ज की गई। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. राम पलट सिंह ने बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान 39 व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति करीब 16 किलोमीटर प्रति घंटे रही। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण तापमान में मामूली गिरावट तो आई है लेकिन वातावरण में नमी बढ़ने से उमस बनी हुई है। आने वाले दिनों में बारिश होने की उम्मीद है। (संवाद)
नौतपा के दौरान हुई बारिश ने मक्का की फसल को संजीवनी देने का काम किया। वहीं, सब्जी, मूंग और उड़द जैसी फसलों के लिए यह नुकसानदायक साबित हुई।
किसानों ने बताया कि लगातार हो रही बारिश का सबसे अधिक असर सब्जी उत्पादन पर पड़ रहा है। क्षेत्र में लौकी, तुरई, टमाटर और बैंगन की फसलें अत्यधिक नमी और जलभराव के कारण प्रभावित हो रही हैं। टमाटर में सड़न की समस्या तेजी से बढ़ रही है जबकि लौकी और तुरई की बेलों में कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। बैंगन की फसल भी रोगों की चपेट में आने लगी है। इससे किसानों की लागत बढ़ रही और उत्पादन घटने की आशंका पैदा हो गई है।
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बारिश से खेतों में पानी भर जाने से जोताई, धान की नर्सरी डालने व अन्य कृषि कार्यों पर भी असर पड़ा है। किसानों का कहना है कि मौसम का यह असामान्य चक्र खेती के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहा तो खरीफ सीजन की कई फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
तापमान में आई एक डिग्री की गिरावट
बिधूना। शनिवार तड़के जनपद में छह मिमी बारिश दर्ज की गई। कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. राम पलट सिंह ने बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान 39 व न्यूनतम 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति करीब 16 किलोमीटर प्रति घंटे रही। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण तापमान में मामूली गिरावट तो आई है लेकिन वातावरण में नमी बढ़ने से उमस बनी हुई है। आने वाले दिनों में बारिश होने की उम्मीद है। (संवाद)