{"_id":"69cd69d2411a3f070403d654","slug":"wind-and-rain-caused-crop-damage-wheat-harvesting-in-danger-auraiya-news-c-211-1-ka11004-142300-2026-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: हवा और बारिश से गिरी फसल, गेहूं की कटाई पर संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: हवा और बारिश से गिरी फसल, गेहूं की कटाई पर संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 02 Apr 2026 12:24 AM IST
विज्ञापन
फोटो-28-खेतों में गेहूं के गट्ठर बांधते किसान। संवाद
विज्ञापन
औरैया। गेहूं और सरसों की तैयार फसल पर अब मौसम की मार पड़ रही है। मंगलवार रात को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से गेहूं की मड़ाई पर ब्रेक लग गया है।
दूसरी तरफ गेहूं की फसल खेतों में गिर रही है, इससे कटाई का काम भी प्रभावित हो रहा है। किसान इस बात से और भी चिंतित हैं कि आगे मौसम खराब होने का आसार जताया गया है।
जिले में करीब 1.02 लाख हेक्टेयर में किसान गेहूं की फसल उगाते हैं। करीब पांच माह की कड़ी मेहनत से अब खेतों में फसल तैयार है। कई जगह कटाई और मड़ाई शुरू हो गई है। इस बीच मौसम मुश्किल खड़ी कर रहा है। बीते एक पखवाड़े में कई बार मौसम बदलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मंगलवार रात को भी कुछ ऐसा ही हुआ।
रात करीब नौ बजे मौसम ने करवट बदली और तेज हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। करीब एक घंटे तक तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी होती रही। इसके चलते खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल में नमी आ गई। सुबह जगह किसान खेतों में मड़ाई के लिए पहुंचे तो फसल में नमी देखकर उन्हें काम रोकना पड़ा।
गांव सेहुद निवासी सर्वेश्वर दयाल ने बताया कि नम फसल की कटाई में गेहूं में कचरा आता है। साथ ही भूसा भी गठीला हो जाता है। इसके साथ-साथ ट्रैक्टर में डीजल भी अधिक लगता है। इसी कारण अन्य किसान भी बुधवार को मड़ाई नहीं करा सके। कटी पड़ी सरसों की फसल में भी नुकसान है। हालांकि अधिकांश किसान सरसों की फसल घर पहुंचा चुके हैं लेकिन जहां भी देरी हुई है, वहां चिंता बरकरार है। मौसम बुधवार को सुबह साफ रहा। ऐसे में दोपहर बाद किसान गेहूं के गट्ठर बांधते नजर आए।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम पलट सिंह ने बताया कि तापमान में खास बदलाव नहीं आया। अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री ही दर्ज किया गया। मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मौसम का पूर्वानुमान भी किसानों के लिए राहत भरा नहीं है। दो और तीन अप्रैल को जहां बादल छाए रहने के आसार हैं तो चार अप्रैल को बारिश का भी पूर्वानुमान है। ऐसे में किसानों की मुश्किलें अभी और बढ़ सकती हैं। हालांकि दूसरी तरफ बीच-बीच बूंदाबांदी से लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिल रही है।
-- --
किसान बोले, बारिश से नुकसान
बूंदाबांदी से फसल में नमी आ गई है। इससे फसल कटाई में दिक्कत हो रही है। यदि बारिश होती है तो नुकसान तय है।
-मनोज यादव
-- -
इस समय बारिश होना किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह टूट सकती है।
-संतोष सिंह
-- -
मजदूरों की कमी के कारण कई खेतों में अभी कटाई शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि मशीनों से काम तेजी से कराया जा रहा है।
-सुरेंद्र सिंह पाल
-- -
पहले आलू सब्जियों की फसल के दौरान भी बारिश ने परेशान किया था। अब गेहूं पर भी खतरा मंडरा रहा है।
-महेश शाक्य
-- -- -- -- -
गेहूं कटाई की चिंता में हार्वेस्टर की थ्रेसिंग हो गई महंगी
औरैया। खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल पर आफत के बादल मंडरा रहे हैं। यह फसल सुरक्षित घरों तक पहुंच जाए इस चिंता में किसानों ने हाथों के बजाय हार्वेस्टर से कटाई करानी शुरू कर दी है। किसानों की इस जुगत को देखते हुए हार्वेस्टर मशीन संचालकों ने कटाई का भाव भी बढ़ा दिया है।
हार्वेस्टर से गेहूं की फसल कटाई का भाव इस बार 400 रुपये प्रति बीघा से शुरू हुआ। जिले में तीन-चार दिन से जारी कटाई के बीच मंगलवार रात आसमान में घने बादल और छुटपुट बूंदाबांदी ने हार्वेस्टर से गेहूं कटाई का भाव बढ़ा दिया है। हार्वेस्टर संचालक अब प्रति बीघा के हिसाब से 500 रुपये लेने लगे हैं। यही नहीं हार्वेस्टर के बाद रीपर से भूसा बनाना भी महंगा हो गया है।
रीपर से एक ट्रॉली भूसा निकालने का भाव शुरुआती दौर में 1800 रुपये था जो अब 2000 रुपये तक पहुंच गया है। चुनिंदा हार्वेस्टर व रीपर मशीनें होने की वजह से किसानों को बार-बार चक्कर भी लगाने पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ डीजल को लेकर भी हार्वेस्टर और रीपर संचालक चिंता में हैं। वह लगातार कीमतों पर नजर बनाए हैं। उन्हें डर है कि अगर डीजल ऊंचे दामों पर मिला या नहीं मिला तो उनके लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। (संवाद)
Trending Videos
दूसरी तरफ गेहूं की फसल खेतों में गिर रही है, इससे कटाई का काम भी प्रभावित हो रहा है। किसान इस बात से और भी चिंतित हैं कि आगे मौसम खराब होने का आसार जताया गया है।
जिले में करीब 1.02 लाख हेक्टेयर में किसान गेहूं की फसल उगाते हैं। करीब पांच माह की कड़ी मेहनत से अब खेतों में फसल तैयार है। कई जगह कटाई और मड़ाई शुरू हो गई है। इस बीच मौसम मुश्किल खड़ी कर रहा है। बीते एक पखवाड़े में कई बार मौसम बदलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मंगलवार रात को भी कुछ ऐसा ही हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
रात करीब नौ बजे मौसम ने करवट बदली और तेज हवा के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। करीब एक घंटे तक तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी होती रही। इसके चलते खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल में नमी आ गई। सुबह जगह किसान खेतों में मड़ाई के लिए पहुंचे तो फसल में नमी देखकर उन्हें काम रोकना पड़ा।
गांव सेहुद निवासी सर्वेश्वर दयाल ने बताया कि नम फसल की कटाई में गेहूं में कचरा आता है। साथ ही भूसा भी गठीला हो जाता है। इसके साथ-साथ ट्रैक्टर में डीजल भी अधिक लगता है। इसी कारण अन्य किसान भी बुधवार को मड़ाई नहीं करा सके। कटी पड़ी सरसों की फसल में भी नुकसान है। हालांकि अधिकांश किसान सरसों की फसल घर पहुंचा चुके हैं लेकिन जहां भी देरी हुई है, वहां चिंता बरकरार है। मौसम बुधवार को सुबह साफ रहा। ऐसे में दोपहर बाद किसान गेहूं के गट्ठर बांधते नजर आए।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम पलट सिंह ने बताया कि तापमान में खास बदलाव नहीं आया। अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री ही दर्ज किया गया। मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मौसम का पूर्वानुमान भी किसानों के लिए राहत भरा नहीं है। दो और तीन अप्रैल को जहां बादल छाए रहने के आसार हैं तो चार अप्रैल को बारिश का भी पूर्वानुमान है। ऐसे में किसानों की मुश्किलें अभी और बढ़ सकती हैं। हालांकि दूसरी तरफ बीच-बीच बूंदाबांदी से लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिल रही है।
किसान बोले, बारिश से नुकसान
बूंदाबांदी से फसल में नमी आ गई है। इससे फसल कटाई में दिक्कत हो रही है। यदि बारिश होती है तो नुकसान तय है।
-मनोज यादव
इस समय बारिश होना किसानों के लिए सबसे बड़ा संकट है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह टूट सकती है।
-संतोष सिंह
मजदूरों की कमी के कारण कई खेतों में अभी कटाई शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि मशीनों से काम तेजी से कराया जा रहा है।
-सुरेंद्र सिंह पाल
पहले आलू सब्जियों की फसल के दौरान भी बारिश ने परेशान किया था। अब गेहूं पर भी खतरा मंडरा रहा है।
-महेश शाक्य
गेहूं कटाई की चिंता में हार्वेस्टर की थ्रेसिंग हो गई महंगी
औरैया। खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल पर आफत के बादल मंडरा रहे हैं। यह फसल सुरक्षित घरों तक पहुंच जाए इस चिंता में किसानों ने हाथों के बजाय हार्वेस्टर से कटाई करानी शुरू कर दी है। किसानों की इस जुगत को देखते हुए हार्वेस्टर मशीन संचालकों ने कटाई का भाव भी बढ़ा दिया है।
हार्वेस्टर से गेहूं की फसल कटाई का भाव इस बार 400 रुपये प्रति बीघा से शुरू हुआ। जिले में तीन-चार दिन से जारी कटाई के बीच मंगलवार रात आसमान में घने बादल और छुटपुट बूंदाबांदी ने हार्वेस्टर से गेहूं कटाई का भाव बढ़ा दिया है। हार्वेस्टर संचालक अब प्रति बीघा के हिसाब से 500 रुपये लेने लगे हैं। यही नहीं हार्वेस्टर के बाद रीपर से भूसा बनाना भी महंगा हो गया है।
रीपर से एक ट्रॉली भूसा निकालने का भाव शुरुआती दौर में 1800 रुपये था जो अब 2000 रुपये तक पहुंच गया है। चुनिंदा हार्वेस्टर व रीपर मशीनें होने की वजह से किसानों को बार-बार चक्कर भी लगाने पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ डीजल को लेकर भी हार्वेस्टर और रीपर संचालक चिंता में हैं। वह लगातार कीमतों पर नजर बनाए हैं। उन्हें डर है कि अगर डीजल ऊंचे दामों पर मिला या नहीं मिला तो उनके लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। (संवाद)

फोटो-28-खेतों में गेहूं के गट्ठर बांधते किसान। संवाद

फोटो-28-खेतों में गेहूं के गट्ठर बांधते किसान। संवाद

फोटो-28-खेतों में गेहूं के गट्ठर बांधते किसान। संवाद

फोटो-28-खेतों में गेहूं के गट्ठर बांधते किसान। संवाद

फोटो-28-खेतों में गेहूं के गट्ठर बांधते किसान। संवाद