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Auraiya News: बीस साल पुराने अपहरण कांड में गवाह पलटे, आरोपी पहलवान बरी
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औरैया। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के दो दशक पुराने अपहरण और फिरौती के बहुचर्चित मामले में विशेष न्यायालय ने मुख्य आरोपी पांडेय उर्फ पहलवान को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायाधीश महेश कुमार ने बृहस्पतिवार को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव और गवाहों के मुकर जाने के कारण यह फैसला सुनाया। हालांकि, अदालत ने अपने बयान से पलटने वाले मुख्य गवाह छोटेलाल के खिलाफ वाद दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
नवंबर 2006 में रजपुरा गांव के गंभीर सिंह और छोटेलाल को यमुना नदी के बीहड़ से अगवा किया गया था। हथियारों से लैस पांच-छह बदमाशों ने उन्हें बंधक बनाकर एक लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। रकम न मिलने पर दोनों को पीटा भी गया था। 16 नवंबर 2006 को इटावा के चकरनगर थाने में मुनेश भदौरिया, भानु प्रताप सिंह, ददुआ जाटव और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में यह मामला अजीतमल कोतवाली को स्थानांतरित कर दिया गया। आरोपी पांडेय उर्फ पहलवान का ट्रायल अन्य आरोपियों से अलग चलाया गया। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने में विफल रहा। वादी गंभीर सिंह की गवाही से पहले ही सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी, जिसकी पुष्टि पुलिस रिपोर्ट से हुई।
मुख्य साक्षी छोटेलाल, लक्ष्मीनारायण, कृष्ण मुरारी और रमेश चंद्र अदालत में अपने पुराने बयानों से मुकर गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरोपी पांडेय उर्फ पहलवान ने उनका अपहरण नहीं किया था। गवाहों ने यह भी कहा कि वे आरोपी को पहचानते नहीं हैं। बचाव पक्ष ने अभियोजन दस्तावेज की सत्यता स्वीकार कर ली थी, जिससे विवेचक और डॉक्टरों के परीक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ी। विशेष न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को दोषमुक्त किया। अदालत ने उसके पुराने जमानतनामे निरस्त कर दिए। हालांकि, छह माह की अपील अवधि के लिए नई जमानतें स्वीकार की गईं। वहीं, बयान से मुकरने वाले मुख्य गवाह छोटेलाल पर वाद दर्ज करने के निर्देश दिए।
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नवंबर 2006 में रजपुरा गांव के गंभीर सिंह और छोटेलाल को यमुना नदी के बीहड़ से अगवा किया गया था। हथियारों से लैस पांच-छह बदमाशों ने उन्हें बंधक बनाकर एक लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। रकम न मिलने पर दोनों को पीटा भी गया था। 16 नवंबर 2006 को इटावा के चकरनगर थाने में मुनेश भदौरिया, भानु प्रताप सिंह, ददुआ जाटव और अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। बाद में यह मामला अजीतमल कोतवाली को स्थानांतरित कर दिया गया। आरोपी पांडेय उर्फ पहलवान का ट्रायल अन्य आरोपियों से अलग चलाया गया। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने में विफल रहा। वादी गंभीर सिंह की गवाही से पहले ही सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी, जिसकी पुष्टि पुलिस रिपोर्ट से हुई।
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मुख्य साक्षी छोटेलाल, लक्ष्मीनारायण, कृष्ण मुरारी और रमेश चंद्र अदालत में अपने पुराने बयानों से मुकर गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरोपी पांडेय उर्फ पहलवान ने उनका अपहरण नहीं किया था। गवाहों ने यह भी कहा कि वे आरोपी को पहचानते नहीं हैं। बचाव पक्ष ने अभियोजन दस्तावेज की सत्यता स्वीकार कर ली थी, जिससे विवेचक और डॉक्टरों के परीक्षण की आवश्यकता नहीं पड़ी। विशेष न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को दोषमुक्त किया। अदालत ने उसके पुराने जमानतनामे निरस्त कर दिए। हालांकि, छह माह की अपील अवधि के लिए नई जमानतें स्वीकार की गईं। वहीं, बयान से मुकरने वाले मुख्य गवाह छोटेलाल पर वाद दर्ज करने के निर्देश दिए।
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