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Ayodhya News: फार्मासिस्ट का दावा, इंचार्ज प्राचार्य के दबाव में किया था खंडन
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 07 Mar 2026 08:24 PM IST
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अयोध्या। मेडिकल कॉलेज में बगैर ऑर्डर के आपूर्ति किए गए 139 गत्ता सामानों का मामला तूल पकड़ रहा है। अब स्टोर के फार्मासिस्ट रहे योगेश मिश्रा का अपर निदेशक स्वास्थ्य को दिया शिकायती पत्र सार्वजनिक हुआ है। इसमें उन्होंने इंचार्ज प्राचार्य डॉ. डीके सिंह के दबाव में खंडन युक्त पत्र लिखने का दावा किया है।
27 फरवरी को फार्मासिस्ट योगेश मिश्रा ने मेडिकल कॉलेज के केंद्रीय औषधि भंडार के प्रभारी अधिकारी को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने प्रयागराज की कुशवाहा आरपी नामक फर्म से 21 जनवरी से 25 फरवरी के बीच 139 गत्ता सामान आपूर्ति होने की जानकारी दी थी। बताया कि इसमें प्राप्तकर्ता का नाम चीफ फार्मासिस्ट/स्टोर इंचार्ज अंकित है, लेकिन उन्होंने ऐसा कोई भी ऑर्डर नहीं किया है।
यह पत्र सार्वजनिक होने के बाद कॉलेज प्रशासन में हलचल मची तो 24 घंटे बाद ही योगेश मिश्रा का दूसरा पत्र सार्वजनिक हुआ। इसमें उन्होंने 27 फरवरी के लिखे पत्र को भ्रामक स्थिति उत्पन्न होने के कारण लिखने का दावा करके उसका खंडन किया। मीडिया में भी यह मुद्दा उछला तो मेडिकल कॉलेज की खूब किरकिरी हुई। अब उसी फार्मासिस्ट का 28 फरवरी का ही एक और पत्र वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने इंचार्ज प्राचार्य रहे डॉ. डीके सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अपर निदेशक स्वास्थ्य को संबोधित इस पत्र में उन्होंने लिखा कि प्रभारी अधिकारी केंद्रीय औषधि भंडार के मौखिक आदेश पर उन्होंने 139 गत्ता औषधि रिसीव करके रखवा दिया था। इन औषधियों के बिल, वाउचर न होने से स्टॉक बुक में उनका अंकन नहीं किया गया। 27 फरवरी को उन्होंने मामले से अवगत कराया तो अगले दिन शाम पांच बजे इंचार्ज प्राचार्य डॉ. डीके सिंह ने उन्हें गंज स्थित प्रशासनिक भवन में बुलवाया। वहां उनके ऊपर दबाव बनाकर 27 फरवरी के पत्र का खंडन लिखवाया गया, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हैं। उन्होंने 28 फरवरी को लिए स्वीकृत पत्र में उनकी अभ्युक्ति न होने का दावा किया है।
बोले जिम्मेदार...
28 फरवरी को इंचार्ज प्राचार्य रहे ब्लड बैंक विभागाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने बताया कि वह सिर्फ कार्यवाहक प्राचार्य थे। दबाव बनाने का आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने सिर्फ उचित माध्यम से शिकायत करने के लिए फार्मासिस्ट को समझाया था। वहीं, अपर निदेशक डॉ. बीके सिंह चौहान ने बताया कि डाक में शिकायती पत्र रिसीव कराया गया होगा, जानकारी की जा रही है।
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27 फरवरी को फार्मासिस्ट योगेश मिश्रा ने मेडिकल कॉलेज के केंद्रीय औषधि भंडार के प्रभारी अधिकारी को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने प्रयागराज की कुशवाहा आरपी नामक फर्म से 21 जनवरी से 25 फरवरी के बीच 139 गत्ता सामान आपूर्ति होने की जानकारी दी थी। बताया कि इसमें प्राप्तकर्ता का नाम चीफ फार्मासिस्ट/स्टोर इंचार्ज अंकित है, लेकिन उन्होंने ऐसा कोई भी ऑर्डर नहीं किया है।
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यह पत्र सार्वजनिक होने के बाद कॉलेज प्रशासन में हलचल मची तो 24 घंटे बाद ही योगेश मिश्रा का दूसरा पत्र सार्वजनिक हुआ। इसमें उन्होंने 27 फरवरी के लिखे पत्र को भ्रामक स्थिति उत्पन्न होने के कारण लिखने का दावा करके उसका खंडन किया। मीडिया में भी यह मुद्दा उछला तो मेडिकल कॉलेज की खूब किरकिरी हुई। अब उसी फार्मासिस्ट का 28 फरवरी का ही एक और पत्र वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने इंचार्ज प्राचार्य रहे डॉ. डीके सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अपर निदेशक स्वास्थ्य को संबोधित इस पत्र में उन्होंने लिखा कि प्रभारी अधिकारी केंद्रीय औषधि भंडार के मौखिक आदेश पर उन्होंने 139 गत्ता औषधि रिसीव करके रखवा दिया था। इन औषधियों के बिल, वाउचर न होने से स्टॉक बुक में उनका अंकन नहीं किया गया। 27 फरवरी को उन्होंने मामले से अवगत कराया तो अगले दिन शाम पांच बजे इंचार्ज प्राचार्य डॉ. डीके सिंह ने उन्हें गंज स्थित प्रशासनिक भवन में बुलवाया। वहां उनके ऊपर दबाव बनाकर 27 फरवरी के पत्र का खंडन लिखवाया गया, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हैं। उन्होंने 28 फरवरी को लिए स्वीकृत पत्र में उनकी अभ्युक्ति न होने का दावा किया है।
बोले जिम्मेदार...
28 फरवरी को इंचार्ज प्राचार्य रहे ब्लड बैंक विभागाध्यक्ष डॉ. डीके सिंह ने बताया कि वह सिर्फ कार्यवाहक प्राचार्य थे। दबाव बनाने का आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने सिर्फ उचित माध्यम से शिकायत करने के लिए फार्मासिस्ट को समझाया था। वहीं, अपर निदेशक डॉ. बीके सिंह चौहान ने बताया कि डाक में शिकायती पत्र रिसीव कराया गया होगा, जानकारी की जा रही है।
