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Azamgarh News: ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगी के आरोप में 12वीं और बीकॉम के छात्र गिरफ्तार

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:05 AM IST
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12th and B.Com students arrested for cheating in the name of online shopping
इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरफ्तार शातिर साइबर अपराधी अवन राजभर व प् - फोटो : बैडमिंटन टूर्नामेंट के समपान पर सम्मानित हुए ​खिलाड़ी।
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आजमगढ़। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर देशभर के लोगों से ठगी करने वाले संगठित गिरोह का साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों प्रियांशू यादव और अवन राजभर को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डा. अनिल कुमार के निर्देशन में की गई। प्रियांशू 12 तो अवन बीकॉम का छात्र है। दोनों आजमगढ़ के निवासी हैं।
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एसपी ट्रैफिक विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि गुजरात के अहमदाबाद स्टटी वटवा निवासी अजमेरी ने नौ मार्च 2026 को एनसीआरपी पोर्टल पर ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर क्राइम थाना पुलिस ने जांच शुरू की। 24 मार्च को तकनीकी साक्ष्यों और प्रतिबिंब पोर्टल से प्राप्त इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने कोतवाली क्षेत्र के कोल बाजबहादुर में दबिश देकर रानी की सराय थाना क्षेत्र के ऊंचागांव निवासी अवन राजभर (22) और तहबरपुर थाना क्षेत्र के शिवरामपुर गांव निवासी प्रियांशू यादव (19) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम पर “गंगा हिल्स, गंगा_हिल्स, गंगा क्लॉथ, वेलसाइड.क्लॉथिंग, गंगा हिल्स, गंगा_हिल्स, गंगा क्लॉथ, वेलसाइड.क्लॉथिंग, वेलसाइड_क्लॉथिंग ” जैसे नामों से फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करते थे। ग्राहकों को कम दाम में अच्छे उत्पाद देने का लालच देकर व्हाट्सएप बिजनेस नंबर के माध्यम से संपर्क कराते थे और फिर क्यूआर कोड के जरिए एडवांस भुगतान करा लेते थे। भुगतान मिलने के बाद या तो सामान भेजते नहीं थे या फिर घटिया सामान भेजकर ग्राहक को ब्लॉक कर देते थे। जांच में पता चला कि ठगी की रकम पहले अपने बैंक खातों में मंगाते थे, लेकिन खाते फ्रीज होने लगे तो अन्य लोगों के खातों का इस्तेमाल करने लगे।
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ग्राहकों से हुई चैट और लेन-देन से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य भी मिले
पुलिस को आरोपियों से जुड़े 13 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिन पर असम, बंगाल, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से कुल 27 एनसीआरपी शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 550 रुपये नकद, 13 बैंक पासबुक, एक चेकबुक, पांच एटीएम कार्ड, नौ सिम कार्ड, 30 डमी पार्सल पैकेट तथा पैकेजिंग सामग्री बरामद की है। मोबाइल फोन की जांच में ग्राहकों से की गई चैट और लेन-देन से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। पुलिस ने बताया कि गिरोह योजनाबद्ध तरीके से ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड कर रहा था और लगातार नए फर्जी पेज बनाकर लोगों को ठग रहा था। मामले में थाना साइबर क्राइम पर विभिन्न धाराओं एवं आईटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज किया गया है।

खुद साइबर ठगी का शिकार हुआ तो गिरोह में हो गया शामिल
आजमगढ़। इंस्टाग्राम शॉपिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह में शामिल एक आरोपी खुद पहले ऑनलाइन ठगी का शिकार हो चुका था। बाद में उसने उसी तरीके से लोगों को ठगना शुरू कर दिया। यह खुलासा पुलिस पूछताछ में हुआ है। साइबर थाना प्रभारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि तहबरपुर थाना क्षेत्र के शिवरामपुर निवासी प्रियांशू यादव अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र है और वर्तमान में इंटर का छात्र है। पूछताछ में उसने बताया कि पहले उसने ऑनलाइन कार्गो पैंट ऑर्डर किया था, लेकिन जब पार्सल उसके पास पहुंचा और उसने खोला तो उसमें खराब कपड़े भरे थे। इस घटना के बाद वह ठगी करने वाले गिरोह के संपर्क में आ गया और खुद भी इस तरह की ठगी करने लगा। इसके बाद वह इंस्टाग्राम पर फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर लोगों से एडवांस भुगतान लेकर ठगी करने लगा। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कुछ समय से अपने साथी अवन राजभर के साथ मिलकर साइबर ठगी कर रहा था। अवन राजभर बीकॉम का छात्र है।
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आरोपी पार्सल में मिट्टी व खराब कपड़े भरकर करते थे डिलीवरी
आजमगढ़। एसपी ट्रैफिक विवेक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इंस्टाग्राम शॉपिंग के नाम पर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के बारे में पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी ग्राहकों से एडवांस भुगतान लेने के बाद उन्हें पार्सल में मिट्टी और खराब कपड़े भरकर भेज देते थे। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी इंस्टाग्राम पर फर्जी शॉपिंग पेज बनाकर सस्ते दाम में ब्रांडेड कपड़े और अन्य सामान देने का विज्ञापन पोस्ट करते थे। जब ग्राहक उनसे संपर्क करते थे तो उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से प्रोडक्ट की फोटो और वीडियो भेजकर विश्वास में लेते थे और फिर क्यूआर कोड के जरिए एडवांस भुगतान करा लेते थे। भुगतान मिलते ही आरोपी या तो सामान भेजते ही नहीं थे या फिर पार्सल में मिट्टी, पुराने और खराब कपड़े भरकर भेज देते थे।
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