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Azamgarh News: पुलिस हिरासत में हत्या के 22 साल बाद फैसला, रिटायर्ड एसओ को उम्रकैद
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27 रानी की सराय थाने में आरोपी को गोली मारे जाने के मामले में आरोपी तत्तकालीन थाना प्रभारी जेके
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-दूसरे आरोपी रिटायर्ड हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की 2017 में ही हो चुकी है मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। पुलिस हिरासत में एफसीआई कर्मचारी हरिलाल यादव की गोली मारकर हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय की कोर्ट ने तत्कालीन थानाध्यक्ष रानी की सराय जेके सिंह को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। 22 साल तक मामले की सुनवाई चली। वहीं मामले में दूसरे आरोपी रहे हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की रिटायरमेंट के बाद 2017 में मौत हो चुकी है।
बताते चलें कि रानी की सराय थाने की पुलिस ने 29 मार्च 2003 को एफसीआई के कर्मचारी हरिलाल यादव को बैटरी चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार कर हवालात में बंद कर दिया। हरिलाल यादव के पुत्र जितेंद्र ने आरोप लगाया था कि जब वह रात को खाना लेकर रानी की सराय थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी जेके सिंह के ललकारने पर हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह ने उनके पिता हरिलाल यादव को गोली मार दी थी। घायल हरिलाल यादव को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई। घटना के समय जितेंद्र यादव और रामबचन यादव को हवालात में बंद कर दिया गया। घटना के दूसरे दिन 30 मार्च को कोतवाली में जितेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। वहीं कस्टडी में मौत के मामले में रानी की सराय थाने की पुलिस ने हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह पर भी प्राथमिकी दर्ज की।
इनसेट
मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई
हाई प्रोफाइल मामला होने के चलते छह महीने बाद सितंबर 2003 में ही इस मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। जांच में फरवरी 2005 में सीबीसीआईडी ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। मामले की सुनवाई के दौरान 2017 में हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की भी मौत हो गई। लगभग 22 साल तक न्यायालय में मामले की सुनवाई चलती रही। सुनवाई पूरी होने के बाद बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी जेके सिंह को दोषी करार देते हुए एक लाख रुपये अर्थदंड और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही गाली गलौच के मामले में दर्ज 504 के मामले में एक साल की सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
आजमगढ़। पुलिस हिरासत में एफसीआई कर्मचारी हरिलाल यादव की गोली मारकर हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय की कोर्ट ने तत्कालीन थानाध्यक्ष रानी की सराय जेके सिंह को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। 22 साल तक मामले की सुनवाई चली। वहीं मामले में दूसरे आरोपी रहे हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की रिटायरमेंट के बाद 2017 में मौत हो चुकी है।
बताते चलें कि रानी की सराय थाने की पुलिस ने 29 मार्च 2003 को एफसीआई के कर्मचारी हरिलाल यादव को बैटरी चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार कर हवालात में बंद कर दिया। हरिलाल यादव के पुत्र जितेंद्र ने आरोप लगाया था कि जब वह रात को खाना लेकर रानी की सराय थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी जेके सिंह के ललकारने पर हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह ने उनके पिता हरिलाल यादव को गोली मार दी थी। घायल हरिलाल यादव को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई। घटना के समय जितेंद्र यादव और रामबचन यादव को हवालात में बंद कर दिया गया। घटना के दूसरे दिन 30 मार्च को कोतवाली में जितेंद्र की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी। वहीं कस्टडी में मौत के मामले में रानी की सराय थाने की पुलिस ने हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह पर भी प्राथमिकी दर्ज की।
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मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई
हाई प्रोफाइल मामला होने के चलते छह महीने बाद सितंबर 2003 में ही इस मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। जांच में फरवरी 2005 में सीबीसीआईडी ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। मामले की सुनवाई के दौरान 2017 में हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की भी मौत हो गई। लगभग 22 साल तक न्यायालय में मामले की सुनवाई चलती रही। सुनवाई पूरी होने के बाद बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी जेके सिंह को दोषी करार देते हुए एक लाख रुपये अर्थदंड और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही गाली गलौच के मामले में दर्ज 504 के मामले में एक साल की सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
