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Azamgarh News: जिले में किराये का बैंक खाता, फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाला गिरोह सक्रिय
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विकास विश्वकर्मा आजमगढ़। साइबर अपराधियों ने अब ठगी करने के तरीके बदल दिए हैं। अब केवल ओटीपी या फर्जी कॉल के जरिए ही नहीं, बल्कि किराये के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट), फर्जी निवेश एप, ऑनलाइन गेमिंग और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। जिले में साइबर अपराधियों को किराये का बैंक खाता और फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने का गिरोह सक्रिय है। एसपी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि साइबर गिरोह 20 से 30 हजार रुपये का लालच देकर लोगों के बैंक खाते और मोबाइल सिम किराये पर लेते हैं। ठगी की रकम पहले इन्हीं खातों में जमा कराई जाती है। फिर कुछ ही मिनटों में कई अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी जाती है। इससे रकम का स्रोत तलाशना कठिन हो जाता है। साल 2026 में अब तक साइबर क्राइम थाने में 25 मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें 14 मामलों में 2.97 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हुई है। पुलिस ने 19 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया, 3.66 लाख रुपये बरामद किए। पीड़ितों के 49.66 लाख रुपये फ्रीज कराए।
क्या है म्यूल अकाउंट
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसे साइबर अपराधी किराये या लालच देकर दूसरे व्यक्ति से हासिल करते हैं। ठगी की रकम पहले इसी खाते में आती है और फिर तुरंत कई अन्य खातों में भेज दी जाती है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
केस-1
गंभीरपुर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने साइबर अपराधियों को म्यूल खाता उपलब्ध कराने, ठगी की रकम निकालने व वाले गिरोह के सदस्य दयालपुर निवासी यश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से बायोमेट्रिक मशीन, मोबाइल पीओएस मशीन, कूटरचित अंगूठा क्लोन, एटीएम कार्ड, दो मोबाइल फोन, 1,750 रुपये नकद और एक वाहन बरामद किया गया है।
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केस-2
साइबर सेल और अहरौला पुलिस की संयुक्त टीम ने 16 जून को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसमें अहरौला थाना क्षेत्र के इटौरा निवासी सुधाकर, तहबरपुर थाना क्षेत्र के मखदूमपुर निवासी नितिन मिश्रा, अहरौला थाना क्षेत्र के शम्भूपुरपपुरा गहजी निवासी नवनीत सिंह व बाकरकोल गांव निवासी सुमित सिंह शामिल हैं। जांच में सामने आया कि फर्जी फर्मों और म्यूल खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया जा रहा था। इन खातों से जुड़ी 448 साइबर शिकायतें मिलीं थीं। जबकि एक खाते में महज तीन दिनों में करीब 40 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान साइबर ठगी से संबंधित करीब 10 लाख रुपये फ्रीज कराए। आरोपियों के कब्जे से छह एटीएम कार्ड, फर्जी आधार, पैन व वोटर आईडी, कूटरचित मुहरें, ब्लैंक चेक, विदेशी सिम, चार मोबाइल फोन, एक महिंद्रा थार और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई।
साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा मनोविज्ञान का करते हैं इस्तेमाल
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि आज के साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा मनोविज्ञान (सोशल इंजीनियरिंग) का इस्तेमाल करते हैं। वे पहले डर, लालच या जल्दबाजी पैदा करते हैं और फिर चंद सेकेंड में लोगों से गलती करवा देते हैं। बैंक, पुलिस, बिजली विभाग या सरकारी अधिकारी बनकर कोई भी फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, सीबीवी (कार्ड वेरीफिकेशन वैल्यू) या स्क्रीन शेयर करने को कहे तो तुरंत कॉल काट दें।
ठगी के बाद पहले 24 घंटे में क्या करें
- तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
- राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को तत्काल ट्रांजेक्शन रोकने की सूचना दें।
- मोबाइल, बैंक खाते व ईमेल के पासवर्ड तुरंत बदलें।
- ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक विवरण साझा न करें।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
- हर ऑनलाइन खाते के लिए अलग, लंबा और मजबूत पासवर्ड बनाएं तथा समय-समय पर उसे बदलते रहें।
- अपने सभी महत्वपूर्ण ऑनलाइन खातों में दो-चरणीय सत्यापन सक्षम करें, जिससे सुरक्षा की अतिरिक्त परत मिलती है।
- मोबाइल, कंप्यूटर और सभी ऐप्स को हमेशा नवीनतम संस्करण में अपडेट करें, ताकि सुरक्षा संबंधी कमियां दूर हो सकें।
- केवल आधिकारिक ऐप स्टोर या भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें। अज्ञात लिंक या वेबसाइट से डाउनलोड करने से बचें।
- किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अनजान कॉल, मैसेज या ई-मेल पर अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
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क्या है म्यूल अकाउंट
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसे साइबर अपराधी किराये या लालच देकर दूसरे व्यक्ति से हासिल करते हैं। ठगी की रकम पहले इसी खाते में आती है और फिर तुरंत कई अन्य खातों में भेज दी जाती है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
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केस-1
गंभीरपुर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने साइबर अपराधियों को म्यूल खाता उपलब्ध कराने, ठगी की रकम निकालने व वाले गिरोह के सदस्य दयालपुर निवासी यश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपित के कब्जे से बायोमेट्रिक मशीन, मोबाइल पीओएस मशीन, कूटरचित अंगूठा क्लोन, एटीएम कार्ड, दो मोबाइल फोन, 1,750 रुपये नकद और एक वाहन बरामद किया गया है।
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केस-2
साइबर सेल और अहरौला पुलिस की संयुक्त टीम ने 16 जून को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसमें अहरौला थाना क्षेत्र के इटौरा निवासी सुधाकर, तहबरपुर थाना क्षेत्र के मखदूमपुर निवासी नितिन मिश्रा, अहरौला थाना क्षेत्र के शम्भूपुरपपुरा गहजी निवासी नवनीत सिंह व बाकरकोल गांव निवासी सुमित सिंह शामिल हैं। जांच में सामने आया कि फर्जी फर्मों और म्यूल खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया जा रहा था। इन खातों से जुड़ी 448 साइबर शिकायतें मिलीं थीं। जबकि एक खाते में महज तीन दिनों में करीब 40 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान साइबर ठगी से संबंधित करीब 10 लाख रुपये फ्रीज कराए। आरोपियों के कब्जे से छह एटीएम कार्ड, फर्जी आधार, पैन व वोटर आईडी, कूटरचित मुहरें, ब्लैंक चेक, विदेशी सिम, चार मोबाइल फोन, एक महिंद्रा थार और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई।
साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा मनोविज्ञान का करते हैं इस्तेमाल
एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि आज के साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा मनोविज्ञान (सोशल इंजीनियरिंग) का इस्तेमाल करते हैं। वे पहले डर, लालच या जल्दबाजी पैदा करते हैं और फिर चंद सेकेंड में लोगों से गलती करवा देते हैं। बैंक, पुलिस, बिजली विभाग या सरकारी अधिकारी बनकर कोई भी फोन पर ओटीपी, यूपीआई पिन, सीबीवी (कार्ड वेरीफिकेशन वैल्यू) या स्क्रीन शेयर करने को कहे तो तुरंत कॉल काट दें।
ठगी के बाद पहले 24 घंटे में क्या करें
- तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
- राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को तत्काल ट्रांजेक्शन रोकने की सूचना दें।
- मोबाइल, बैंक खाते व ईमेल के पासवर्ड तुरंत बदलें।
- ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक विवरण साझा न करें।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
- हर ऑनलाइन खाते के लिए अलग, लंबा और मजबूत पासवर्ड बनाएं तथा समय-समय पर उसे बदलते रहें।
- अपने सभी महत्वपूर्ण ऑनलाइन खातों में दो-चरणीय सत्यापन सक्षम करें, जिससे सुरक्षा की अतिरिक्त परत मिलती है।
- मोबाइल, कंप्यूटर और सभी ऐप्स को हमेशा नवीनतम संस्करण में अपडेट करें, ताकि सुरक्षा संबंधी कमियां दूर हो सकें।
- केवल आधिकारिक ऐप स्टोर या भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही ऐप इंस्टॉल करें। अज्ञात लिंक या वेबसाइट से डाउनलोड करने से बचें।
- किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अनजान कॉल, मैसेज या ई-मेल पर अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।