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Azamgarh News: शिया सुन्नी झड़प में मारे गए थे अली अकबर, 27 साल बाद तीन भाइयों समेत 12 को उम्रकैद
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मुबारकपुर में दंगा के दौरान अली अकबर की हत्या के मामले में न्यायालय की ओर से सजा सुनाने के बाद
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- जिला एवं सत्र न्यायालय का बड़ा फैसला, हर दोषी पर 66,500-66,500 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
- वर्ष 1999 में मोहर्रम जुलूस के बाद शिया-सुन्नी समुदाय के बीच हुआ था संघर्ष, अली अकबर की हुई थी हत्या
आजमगढ़। मुबारकपुर में वर्ष 1999 में हुए शिया-सुन्नी समुदाय के दौरान हुई झड़प में अली अकबर हत्याकांड में 27 वर्ष बाद मंगलवार को फैसला आया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने सुनवाई पूरी करने के बाद तीन भाईयों समेत 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर दोषियों पर 66,500-66,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोषियों में तीन सगे भाई मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर और मोहम्मद याकूब भी हैं।
पीड़ित नासिर हुसैन ने 30 अप्रैल 1999 को मुबारकपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर में उन्होंने बताया कि पूरा ख्वाजा निवासी उनके चाचा अली अकबर 27 अप्रैल से लापता हैं। अली अकबर के पुत्र जैगम ने 28 अप्रैल को गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई। 30 अप्रैल 1999 को अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद की गई। पुलिस की जांच में सामने आया कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय सुन्नी समुदाय के आरोपियों ने अली अकबर की मारपीट कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामले में हुसैन अहमद निवासी हैदराबाद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब सभी निवासी दुल्हनपूरा, अली जहीर, इरशाद निवासी पूरासोफी, मोहम्मद असद, अफजाल, अलाउद्दीन, दिलशाद और वसीम निवासी हैदराबाद समेत अन्य के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की थी।
इनसेट
27 साल की सुनवाई में चार अभियुक्तों की मौत
प्राथमिकी की सुनवाई के दौरान 27 साल की लंबी अवधि में हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक और हाजी अब्दुल खालिक की मृत्यु हो गई। पीड़ित पक्ष की ओर से डीजीसी फौजदारी एवं एडीजीसी ने नौ गवाहों की गवाही कराई। शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अभियुक्तों को सजा सुनाई।
यह हैं दोषी
हुसैन अहमद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब, अली जहीर, इरशाद, मोहम्मद असद, अफजाल, अलाउद्दीन, दिलशाद और वसीम को अली अकबर की हत्या का दोषी करार दिया था।
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- वर्ष 1999 में मोहर्रम जुलूस के बाद शिया-सुन्नी समुदाय के बीच हुआ था संघर्ष, अली अकबर की हुई थी हत्या
आजमगढ़। मुबारकपुर में वर्ष 1999 में हुए शिया-सुन्नी समुदाय के दौरान हुई झड़प में अली अकबर हत्याकांड में 27 वर्ष बाद मंगलवार को फैसला आया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने सुनवाई पूरी करने के बाद तीन भाईयों समेत 12 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर दोषियों पर 66,500-66,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोषियों में तीन सगे भाई मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर और मोहम्मद याकूब भी हैं।
पीड़ित नासिर हुसैन ने 30 अप्रैल 1999 को मुबारकपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर में उन्होंने बताया कि पूरा ख्वाजा निवासी उनके चाचा अली अकबर 27 अप्रैल से लापता हैं। अली अकबर के पुत्र जैगम ने 28 अप्रैल को गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई। 30 अप्रैल 1999 को अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद की गई। पुलिस की जांच में सामने आया कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय सुन्नी समुदाय के आरोपियों ने अली अकबर की मारपीट कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामले में हुसैन अहमद निवासी हैदराबाद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब सभी निवासी दुल्हनपूरा, अली जहीर, इरशाद निवासी पूरासोफी, मोहम्मद असद, अफजाल, अलाउद्दीन, दिलशाद और वसीम निवासी हैदराबाद समेत अन्य के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की थी।
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27 साल की सुनवाई में चार अभियुक्तों की मौत
प्राथमिकी की सुनवाई के दौरान 27 साल की लंबी अवधि में हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक और हाजी अब्दुल खालिक की मृत्यु हो गई। पीड़ित पक्ष की ओर से डीजीसी फौजदारी एवं एडीजीसी ने नौ गवाहों की गवाही कराई। शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अभियुक्तों को सजा सुनाई।
यह हैं दोषी
हुसैन अहमद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब, अली जहीर, इरशाद, मोहम्मद असद, अफजाल, अलाउद्दीन, दिलशाद और वसीम को अली अकबर की हत्या का दोषी करार दिया था।

मुबारकपुर में दंगा के दौरान अली अकबर की हत्या के मामले में न्यायालय की ओर से सजा सुनाने के बाद

मुबारकपुर में दंगा के दौरान अली अकबर की हत्या के मामले में न्यायालय की ओर से सजा सुनाने के बाद