UP: एंटी करप्शन ने सेक्रेटरी व रोजगार सेवक को घूस लेते पकड़ा, भुगतान जारी करने को मांगे थे 10 हजार रुपये
Azamgarh News: आजमगढ़ में पूरा बाल नारायण गांव के पूर्व प्रधान की शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाकर बनकटा चौराहे पर कार्रवाई की। यहां ग्राम सचिव और रोजगार सेवक ने रुपये लेकर बुलाया था। 10 हजार लेते ही टीम ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।
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UP Crime: जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरैया ब्लॉक के एक ग्राम सचिव और रोजगार सेवक को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने यह कार्रवाई बनकटा बाजार गोसाई क्षेत्र में की, जहां दोनों आरोपी 10 हजार रुपये की घूस लेते हुए पकड़े गए। इस कार्रवाई से स्थानीय प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
एंटी करप्शन ट्रैप टीम के प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार पासवान ने बताया कि हरैया ब्लॉक क्षेत्र के पूरा बाल नारायण गांव के पूर्व प्रधान अमित कुमार यादव ने टीम से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके कार्यकाल वर्ष 2021 के दौरान कराए गए विकास कार्यों जैसे खड़ंजा, इंटरलॉकिंग सड़क और पक्की नाली निर्माण के बिलों का भुगतान लंबित है। करीब एक लाख रुपये का भुगतान अभी तक जारी नहीं किया गया था।
शिकायत के अनुसार, इस बकाया भुगतान को पास कराने के एवज में ग्राम सचिव शशिकांत सोनकर और संविदा पर कार्यरत रोजगार सेवक चंद्रेश यादव द्वारा 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। आरोप है कि दोनों लगातार पूर्व प्रधान पर भुगतान के लिए दबाव बना रहे थे और बिना घूस दिए फाइल आगे बढ़ाने से इंकार कर रहे थे।
टीम ने की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एंटी करप्शन टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप बिछाया। पूर्व प्रधान को तय रकम लेकर आरोपियों के पास भेजा गया। जैसे ही दोनों ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के दौरान टीम ने रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शहर कोतवाली क्षेत्र के कोलघाट मोहल्ला निवासी ग्राम सचिव शशिकांत सोनकर और जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के चकलालचंद गांव निवासी रोजगार सेवक चंद्रेश यादव शामिल हैं। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई को जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।