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आजमगढ़ का जायका बनेगा ग्लोबल : सफेद गाजर का हलवा, तहरी और लौंगलता होंगे ब्रांड
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सफेद गाजर का हलवा। संवाद
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आजमगढ़। पूर्वांचल के पारंपरिक स्वाद अब राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहे हैं। प्रदेश सरकार ने ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ की तर्ज पर शुरू की गई ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना में आजमगढ़ के प्रसिद्ध सफेद गाजर का हलवा, तहरी और लौंगलता को शामिल किया है। इससे इन पारंपरिक व्यंजनों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, प्रशिक्षण और गुणवत्ता सुधार का द्वार खुलेगा। साथ ही, इन व्यंजनों को तैयार करने वाले कारीगरों और दुकानदारों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रभारी उपायुक्त उद्योग प्रभात रंजन ने बताया कि प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय व्यंजनों को नई पहचान दिलाने के साथ रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। योजना के तहत चयनित व्यंजनों की आकर्षक पैकेजिंग, ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे जिले के पारंपरिक स्वाद को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
आजमगढ़ का सफेद गाजर का हलवा लंबे समय से लोगों की पसंद बना हुआ है। खासकर मुबारकपुर क्षेत्र में तैयार होने वाला यह हलवा अपनी मिठास और अलग स्वाद के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। वहीं तहरी और लौंगलता भी जिले की पहचान मानी जाती हैं। शादी-ब्याह और त्योहारों से लेकर आम दिनों तक इन व्यंजनों की मांग बनी रहती है। व्यापारियों का मानना है कि सरकारी स्तर पर पहचान मिलने से इन व्यंजनों की मांग बढ़ेगी। पैकेजिंग और गुणवत्ता सुधार होने पर इन्हें प्रदेश के बाहर भी बड़े स्तर पर बाजार मिल सकता है। इससे स्थानीय दुकानदारों, हलवाईयों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत व्यंजन तैयार करने वालों को प्रशिक्षण देने के साथ खाद्य गुणवत्ता मानकों पर भी काम किया जाएगा। इससे पारंपरिक स्वाद को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
सफेद गाजर के उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा- मुबारकपुर क्षेत्र में पैदा होने वाली सफेद गाजर से तैयार हलवा जिले की खास पहचान है। ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना में शामिल होने के बाद अब सफेद गाजर के उत्पादन को बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। कृषि विभाग किसानों को बेहतर बीज और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने की तैयारी में है, ताकि पूरे वर्ष हलवा बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में सफेद गाजर उपलब्ध हो सके।
मऊ में दूध मिठाई और बलिया का सत्तू भी सूची में- प्रदेश सरकार ने मऊ जिले की दूध से बनने वाली पारंपरिक मिठाइयों और बलिया के मशहूर सत्तू को भी ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना में शामिल किया है। इससे पूर्वांचल के पारंपरिक स्वादों को नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि सरकारी ब्रांडिंग और वित्तीय सहायता मिलने से छोटे व्यापारियों को बड़ा बाजार मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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प्रभारी उपायुक्त उद्योग प्रभात रंजन ने बताया कि प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय व्यंजनों को नई पहचान दिलाने के साथ रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। योजना के तहत चयनित व्यंजनों की आकर्षक पैकेजिंग, ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग और प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे जिले के पारंपरिक स्वाद को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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आजमगढ़ का सफेद गाजर का हलवा लंबे समय से लोगों की पसंद बना हुआ है। खासकर मुबारकपुर क्षेत्र में तैयार होने वाला यह हलवा अपनी मिठास और अलग स्वाद के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। वहीं तहरी और लौंगलता भी जिले की पहचान मानी जाती हैं। शादी-ब्याह और त्योहारों से लेकर आम दिनों तक इन व्यंजनों की मांग बनी रहती है। व्यापारियों का मानना है कि सरकारी स्तर पर पहचान मिलने से इन व्यंजनों की मांग बढ़ेगी। पैकेजिंग और गुणवत्ता सुधार होने पर इन्हें प्रदेश के बाहर भी बड़े स्तर पर बाजार मिल सकता है। इससे स्थानीय दुकानदारों, हलवाईयों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत व्यंजन तैयार करने वालों को प्रशिक्षण देने के साथ खाद्य गुणवत्ता मानकों पर भी काम किया जाएगा। इससे पारंपरिक स्वाद को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
सफेद गाजर के उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा- मुबारकपुर क्षेत्र में पैदा होने वाली सफेद गाजर से तैयार हलवा जिले की खास पहचान है। ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना में शामिल होने के बाद अब सफेद गाजर के उत्पादन को बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। कृषि विभाग किसानों को बेहतर बीज और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने की तैयारी में है, ताकि पूरे वर्ष हलवा बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में सफेद गाजर उपलब्ध हो सके।
मऊ में दूध मिठाई और बलिया का सत्तू भी सूची में- प्रदेश सरकार ने मऊ जिले की दूध से बनने वाली पारंपरिक मिठाइयों और बलिया के मशहूर सत्तू को भी ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना में शामिल किया है। इससे पूर्वांचल के पारंपरिक स्वादों को नई पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। स्थानीय कारोबारियों का मानना है कि सरकारी ब्रांडिंग और वित्तीय सहायता मिलने से छोटे व्यापारियों को बड़ा बाजार मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।