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Azamgarh News: ग्राम देवता की पूजा कर लौट रहे परिवार की स्कॉर्पियो ट्रक से भिड़ी चार की मौत

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2026 01:54 AM IST
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Four people died when a Scorpio belonging to a family returning after worshipping the village deity collided with a truck.
जीयनपुर के बछउरखुर्द रामगढ़ गांव में अजीत के पैतृक गांव में ​स्थित आवास।
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सगड़ी। ग्राम देवता की पूजा-अर्चना कर महोबा लौट रहे एक ही परिवार पर बृहस्पतिवार सुबह दर्दनाक हादसे ने कहर बरपा दिया। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर गैस सिलिंडर लदे ट्रक से स्कॉर्पियो की भिड़ंत में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवती गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
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गांव के पूर्व प्रधान कैलाश राय ने बताया कि अजीत विश्वकर्मा (32) के चचेरे भाई शिवम की शादी फरवरी में हुई थी। शादी के बाद ग्राम देवता को कढ़ाई चढ़ाने की परंपरा निभाने के लिए परिवार के लोग जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के बछउरखुर्द रामगढ़ स्थित पैतृक गांव आए थे। यहां सभी ने पूजा-अर्चना की। बुधवार शाम को अजीत के चाचा राधेश्याम अपनी पत्नी, पुत्री ज्योति और चालक के साथ अल्टो कार से महोबा के लिए रवाना हो गए। इसके कुछ घंटे बाद रात करीब 11 बजे अजीत अपनी मां प्रेमशीला (58), दादी चंद्रावती (80), चाची निशा (40) और चचेरी बहन रिया (20) के साथ स्कॉर्पियो से महोबा के लिए निकले। बृहस्पतिवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर उनकी स्कॉर्पियो गैस सिलिंडर लदे ट्रक से टकरा गई। हादसे में अजीत, उनकी मां प्रेमशिला, दादी चंद्रावती और चाची निशा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि रिया गंभीर रूप से घायल हो गई। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। अजीत अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे और तीन बहनों में तीसरे नंबर पर थे। परिवार में छोटी बहन की शादी की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी। अजीत अपने पीछे एक पुत्र छोड़ गए हैं। हादसे की खबर मिलते ही गांव और परिवार में मातम छा गया।
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35 वर्ष पहले महोबा में बस गया था विश्वकर्मा परिवार
सगड़ी। बछउरखुर्द रामगढ़ गांव के पूर्व प्रधान कैलाश राय ने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे हादसे में जान गंवाने वाले अजीत विश्वकर्मा अपने परिवार का इकलौता सहारा था। पिता की मौत के बाद वह पूरे परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहे थे, लेकिन दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के बछउरखुर्द रामगढ़ गांव निवासी रामविनय विश्वकर्मा करीब 35 वर्ष पूर्व परिवार के साथ महोबा के कबरई स्थित बांदा चौराहे पर जाकर बस गए थे। बाद में उन्होंने अपने छोटे भाइयों श्यामनरायन विश्वकर्मा, राधेश्याम विश्वकर्मा और अजय विश्वकर्मा को भी महोबा बुला लिया। रामविनय विश्वकर्मा वेल्डिंग का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में एक पुत्र अजीत और तीन बेटियां थीं। अजीत अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। करीब दो वर्ष पूर्व रामविनय की मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अजीत के कंधों पर आ गई। वह अपने पिता के वेल्डिंग कारोबार को संभालते हुए परिवार का पालन-पोषण कर रहा था।
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