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फर्जीवाड़े पर हाईकोर्ट सख्त: आजमगढ़ मंडल के 600 शिक्षक जांच के घेरे में
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आजमगढ़। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। न्यायालय द्वारा ''गरिमा सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य'' याचिका में पारित आदेश 22 जनवरी 2026 के अनुपालन में शिक्षा निदेशक (बेसिक) प्रताप सिंह बघेल ने संदिग्ध शिक्षकों की समेकित सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस जांच की जद में आजमगढ़ मंडल के लगभग 600 शिक्षक आएंगे। इसमें आजमगढ़ के करीब 250 शिक्षक शामिल हैं।
सहायक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2008, 2009 और 2010 में चयनित विशिष्ट बीटीसी अभ्यर्थियों और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के अंकपत्रों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मंडल के तीन जिलों आजमगढ़, मऊ और बलिया में ऐसे कुल 600 शिक्षक चिह्नित किए गए हैं। यह मामला कोर्ट में गया था।
6 मार्च के आदेश पर भी नहीं भेजी रिपोर्ट, शासन नाराज
न्यायालय के आदेश पर शासन ने पूर्व में 6 मार्च 2026 को ही सभी जनपदों से निर्धारित प्रारूप में सूची मांगी थी। इसमें शिक्षक का नाम, नियुक्ति तिथि, फर्जी अभिलेख का विवरण और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देनी थी। निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद आजमगढ़, मऊ और बलिया से रिपोर्ट न मिलने पर शासन ने कड़ी नाराजगी जताई है।
गूगल शीट पर अपलोड होगी कुंडली
शिक्षा निदेशक ने निर्देश दिया है कि सभी मंडल अपने-अपने जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों से समन्वय कर निर्धारित गूगल शीट लिंक पर हर हाल में सूचना अपडेट करें। विभाग अब इन शिक्षकों के अभिलेखों का संबंधित संस्थाओं से सत्यापन कराकर अंतिम सूची तैयार कर रहा है। जांच में दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों की न सिर्फ सेवा समाप्त की जाएगी, बल्कि उनसे वेतन की रिकवरी और विधिक कार्रवाई भी सुनिश्चित होगी।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी बीएसए को गूगल शीट पर तत्काल सूचना अपलोड करने को कहा गया है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।— मनोज कुमार मिश्रा, एडी बेसिक
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सहायक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2008, 2009 और 2010 में चयनित विशिष्ट बीटीसी अभ्यर्थियों और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के अंकपत्रों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मंडल के तीन जिलों आजमगढ़, मऊ और बलिया में ऐसे कुल 600 शिक्षक चिह्नित किए गए हैं। यह मामला कोर्ट में गया था।
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6 मार्च के आदेश पर भी नहीं भेजी रिपोर्ट, शासन नाराज
न्यायालय के आदेश पर शासन ने पूर्व में 6 मार्च 2026 को ही सभी जनपदों से निर्धारित प्रारूप में सूची मांगी थी। इसमें शिक्षक का नाम, नियुक्ति तिथि, फर्जी अभिलेख का विवरण और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देनी थी। निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद आजमगढ़, मऊ और बलिया से रिपोर्ट न मिलने पर शासन ने कड़ी नाराजगी जताई है।
गूगल शीट पर अपलोड होगी कुंडली
शिक्षा निदेशक ने निर्देश दिया है कि सभी मंडल अपने-अपने जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों से समन्वय कर निर्धारित गूगल शीट लिंक पर हर हाल में सूचना अपडेट करें। विभाग अब इन शिक्षकों के अभिलेखों का संबंधित संस्थाओं से सत्यापन कराकर अंतिम सूची तैयार कर रहा है। जांच में दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों की न सिर्फ सेवा समाप्त की जाएगी, बल्कि उनसे वेतन की रिकवरी और विधिक कार्रवाई भी सुनिश्चित होगी।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी बीएसए को गूगल शीट पर तत्काल सूचना अपलोड करने को कहा गया है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।— मनोज कुमार मिश्रा, एडी बेसिक