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सरकारी खाते में वापस करें 1.43 लाख रुपये : कोर्ट
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आजमगढ़। जिला कारागार के सरकारी खाते से कूटरचना कर निकाली गई 52.85 लाख धनराशि के मामले में पुलिस की प्रभावी कार्रवाई के बाद न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने आरोपियों के बैंक खातों में जमा 1 लाख 43 हजार 2 रुपये को फिर से सरकारी खाते में जमा कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में 10 अक्तूबर 2025 को अधीक्षक जिला कारागार आदित्य सिंह ने कोतवाली में तहरीर दी थी।
शहर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय ने बताया कि जिला कारागार प्रशासन की ओर से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया था कि रामजीत यादव उर्फ संजय, शिवशंकर उर्फ गोरख, मुशीर अहमद एवं अवधेश कुमार पांडेय ने आपसी सांठगांठ कर कार्यालय से चेकबुक हासिल कर धोखाधड़ी करते हुए सरकारी धन का गमन किया। इस मामले में कोतवाली में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाते हुए पाया कि फर्जी तरीके से ट्रांसफर की गई धनराशि आरोपियों के विभिन्न बैंक खातों में शेष और होल्ड के रूप में मौजूद है, जिसकी कुल राशि 1,43,002 रुपये है। इस संबंध में पुलिस ने न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की। पुलिस की पैरवी को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने उक्त धनराशि को जिला कारागार के सरकारी खाते में वापस जमा कराने का आदेश दिया।
एक नजर मामले पर
- 10 अक्तूबर 2025 को अधीक्षक जिला कारागार ने तहरीर दी थी
- कारागार की चेकबुक का दुरुपयोग किया गया।
- जेलर के फर्जी व कूटरचित हस्ताक्षर बनाए गए
- अलग-अलग तिथियों में सरकारी खाते से कुल 5285000 रुपये निकाली गई
- कुल छह आरोपियों के नाम दर्ज की गई प्राथमिकी।
- गबन की रकम से वाहन खरीदे जाने की पुष्टि हुई।
- आरोपी रामजीत यादव द्वारा खरीदी गई बुलेट व मोटरसाइकिल जब्त हुई।
- विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया।
- 9 जनवरी 2026 को गैंगस्टर एक्ट की मंजूरी मिली।
- गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है
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शहर कोतवाल यादवेंद्र पांडेय ने बताया कि जिला कारागार प्रशासन की ओर से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया था कि रामजीत यादव उर्फ संजय, शिवशंकर उर्फ गोरख, मुशीर अहमद एवं अवधेश कुमार पांडेय ने आपसी सांठगांठ कर कार्यालय से चेकबुक हासिल कर धोखाधड़ी करते हुए सरकारी धन का गमन किया। इस मामले में कोतवाली में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाते हुए पाया कि फर्जी तरीके से ट्रांसफर की गई धनराशि आरोपियों के विभिन्न बैंक खातों में शेष और होल्ड के रूप में मौजूद है, जिसकी कुल राशि 1,43,002 रुपये है। इस संबंध में पुलिस ने न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की। पुलिस की पैरवी को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने उक्त धनराशि को जिला कारागार के सरकारी खाते में वापस जमा कराने का आदेश दिया।
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एक नजर मामले पर
- 10 अक्तूबर 2025 को अधीक्षक जिला कारागार ने तहरीर दी थी
- कारागार की चेकबुक का दुरुपयोग किया गया।
- जेलर के फर्जी व कूटरचित हस्ताक्षर बनाए गए
- अलग-अलग तिथियों में सरकारी खाते से कुल 5285000 रुपये निकाली गई
- कुल छह आरोपियों के नाम दर्ज की गई प्राथमिकी।
- गबन की रकम से वाहन खरीदे जाने की पुष्टि हुई।
- आरोपी रामजीत यादव द्वारा खरीदी गई बुलेट व मोटरसाइकिल जब्त हुई।
- विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया।
- 9 जनवरी 2026 को गैंगस्टर एक्ट की मंजूरी मिली।
- गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है