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Azamgarh News: डॉ. कन्हैया सिंह जयंती पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी, प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त को मिला साहित्य सम्मान
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डॉ. कन्हैया सिंह को जयंती कार्यक्रम में मंच पर मौजूद अतिथि। श्रोत-महाविद्यालय
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हिंदुस्तानी एकेडमी, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज एवं डीएवी पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को प्रख्यात साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह की जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने डॉ. कन्हैया सिंह के साहित्यिक अवदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
संगोष्ठी का विषय ‘हिन्दी सूफी काव्य में हिन्दू संस्कृति’ रहा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की।
मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के कुलपति प्रो. एन.के. शुक्ला रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह तथा जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे।
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डॉ. कन्हैया सिंह साहित्य सम्मान-2026 उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त को प्रदान किया गया। स्वागत भाषण डॉ. पंकज सिंह ने दिया, जबकि संगोष्ठी की प्रस्तावना सहायक आचार्य अवनीश राय ने प्रस्तुत की।
प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह ने हिंदी सूफी काव्य की भारतीयता को नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि सूफी कवियों ने अपने साहित्य में योग साधना, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को प्रमुख स्थान दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. एन.के. शुक्ला ने उन्हें आजमगढ़ की साहित्यिक परंपरा का महत्वपूर्ण सारथी बताते हुए पाठानुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि उनके शोध कार्यों ने हिन्दी सूफी काव्य में हिन्दू संस्कृति की विशिष्ट पहचान स्थापित की, जबकि प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने उनके मार्गदर्शन से जुड़े संस्मरण साझा किए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह का पाठानुसंधान संबंधी कार्य इतना महत्वपूर्ण है कि इसे विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ. निरंजन, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’, प्रो. निर्मला एस. मौर्य, डॉ. सुनील विपुल एवं प्रो. देवेंद्र प्रताप सिंह सहित अनेक विद्वानों ने शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत किए। संचालन प्रो. गीता सिंह एवं अवनीश राय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनम्र सेन सिंह ने किया।
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कार्यक्रम में आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों और शोधार्थियों ने डॉ. कन्हैया सिंह के साहित्यिक अवदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
संगोष्ठी का विषय ‘हिन्दी सूफी काव्य में हिन्दू संस्कृति’ रहा। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की।
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मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के कुलपति प्रो. एन.के. शुक्ला रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह तथा जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे।
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डॉ. कन्हैया सिंह साहित्य सम्मान-2026 उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त को प्रदान किया गया। स्वागत भाषण डॉ. पंकज सिंह ने दिया, जबकि संगोष्ठी की प्रस्तावना सहायक आचार्य अवनीश राय ने प्रस्तुत की।
प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह ने हिंदी सूफी काव्य की भारतीयता को नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि सूफी कवियों ने अपने साहित्य में योग साधना, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को प्रमुख स्थान दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. एन.के. शुक्ला ने उन्हें आजमगढ़ की साहित्यिक परंपरा का महत्वपूर्ण सारथी बताते हुए पाठानुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि उनके शोध कार्यों ने हिन्दी सूफी काव्य में हिन्दू संस्कृति की विशिष्ट पहचान स्थापित की, जबकि प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने उनके मार्गदर्शन से जुड़े संस्मरण साझा किए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह का पाठानुसंधान संबंधी कार्य इतना महत्वपूर्ण है कि इसे विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।
दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ. निरंजन, डॉ. सुजीत कुमार सिंह, प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’, प्रो. निर्मला एस. मौर्य, डॉ. सुनील विपुल एवं प्रो. देवेंद्र प्रताप सिंह सहित अनेक विद्वानों ने शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत किए। संचालन प्रो. गीता सिंह एवं अवनीश राय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनम्र सेन सिंह ने किया।