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Azamgarh News: सम्राट अशोक के आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प
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राजूपट्टी गांव में चक्रवर्ती सम्राट अशोक की जयंती समारोह उपस्थित लोग। संवाद
- फोटो : 1
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सगड़ी। क्षेत्र के राजूपट्टी गांव में सामाजिक संगठन अशोक सेवा संस्थान के तत्वावधान में चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की जयंती समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्रों पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर की गई। समारोह में उपस्थित लोगों ने सम्राट अशोक के विचारों को सुनते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अशांति और संघर्ष की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में बौद्ध धर्म के शांति और अहिंसा के मार्ग को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। सम्राट अशोक के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में थे।
संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम सुधार मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक के शासनकाल में न्याय व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ थी और वे अपनी प्रजा को पुत्र-पुत्री के समान मानते थे।
उनके शासन में शांति, समृद्धि और समानता का वातावरण था। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया तथा 84,000 स्तूपों के माध्यम से इन विचारों का प्रसार किया।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के आधुनिक भारत में सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाना आवश्यक है, जिससे समाज में व्याप्त जातिवाद, भ्रष्टाचार और असमानता को समाप्त किया जा सके और देश पुनः सोने की चिड़िया बन सके।
कार्यक्रम में बालचंद कुशवाहा, श्रवण कुमार मौर्य, राम सुधार मौर्य, राजेश यादव, हरिनाथ मौर्य, श्रवण मौर्य, प्रमोद मौर्य, मनोज चौरसिया, मंजू बौद्ध, अवधराज सरोज, जयप्रकाश यादव, बलिराम मौर्य, सुरेंद्र मौर्य आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राम सुधार मौर्य ने किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्रों पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर की गई। समारोह में उपस्थित लोगों ने सम्राट अशोक के विचारों को सुनते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अशांति और संघर्ष की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में बौद्ध धर्म के शांति और अहिंसा के मार्ग को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। सम्राट अशोक के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने प्राचीन काल में थे।
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संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम सुधार मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक के शासनकाल में न्याय व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ थी और वे अपनी प्रजा को पुत्र-पुत्री के समान मानते थे।
उनके शासन में शांति, समृद्धि और समानता का वातावरण था। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया तथा 84,000 स्तूपों के माध्यम से इन विचारों का प्रसार किया।
उन्होंने यह भी कहा कि आज के आधुनिक भारत में सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाना आवश्यक है, जिससे समाज में व्याप्त जातिवाद, भ्रष्टाचार और असमानता को समाप्त किया जा सके और देश पुनः सोने की चिड़िया बन सके।
कार्यक्रम में बालचंद कुशवाहा, श्रवण कुमार मौर्य, राम सुधार मौर्य, राजेश यादव, हरिनाथ मौर्य, श्रवण मौर्य, प्रमोद मौर्य, मनोज चौरसिया, मंजू बौद्ध, अवधराज सरोज, जयप्रकाश यादव, बलिराम मौर्य, सुरेंद्र मौर्य आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राम सुधार मौर्य ने किया।