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UP: हत्या के चार दशक पुराने केस की पत्रावली को दीमक ने किया चट, कोर्ट के आदेश पर FIR; जानें पूरा मामला

अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 11 Mar 2026 09:22 AM IST
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सार

Azamgarh News: इस मामले का निर्णय 10 अप्रैल 1986 को तत्कालीन द्वितीय अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश, आजमगढ़ द्वारा सुनाया गया था। निर्णय के बाद मई 1986 में मुकदमे की पत्रावली अभिलेखागार में जमा कर दी गई थी।

Termites eat away four-decade-old murder case files FIR filed on court orders in azamgarh
दुष्कर्म के आरोपी को कठोर कारावास की सजा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

UP News: लगभग चार दशक पुराने एक हत्या मामले की न्यायालयी पत्रावली दीमक से क्षतिग्रस्त पाए जाने के बाद न्यायालय के आदेश पर संबंधित प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय और जनपद न्यायाधीश के आदेश के अनुपालन में की गई है।

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मिली जानकारी के अनुसार, सत्र परीक्षण संख्या 313 वर्ष 1983, सरकार बनाम चन्द्रपाल राय व अन्य के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 323, 302 और 452 के तहत मुकदमा थाना कोपागंज (तत्कालीन जनपद आजमगढ़, वर्तमान जनपद मऊ) में दर्ज किया गया था। 
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अभिलेखपाल नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि इस मामले से संबंधित फौजदारी अपील संख्या 2301 वर्ष 1986, चंद्रपाल राय व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य उच्च न्यायालय में लंबित है। उच्च न्यायालय द्वारा 12 जनवरी 2018 को ई-मेल के माध्यम से उक्त सत्र परीक्षण की पत्रावली मांगी गई थी, जिसके अनुपालन में 7 मई 2018 को तत्कालीन सहायक अभिलेखपाल विजय प्रताप सिंह द्वारा चार नत्थियों के साथ पत्रावली उच्च न्यायालय भेजी गई।

न्यायालय ने दिए थे निर्देश

12 जुलाई 2023 को उच्च न्यायालय की ओर से सूचित किया गया कि भेजी गई पत्रावली के अधिकांश दस्तावेज दीमक द्वारा क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि प्रकरण में संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जाए तथा उस समय पत्रावली के अभिरक्षक रहे अभिलेखागार के कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भूमिका की गहन विवेचना कराई जाए।

कोतवाली प्रभारी यादवेंद्र पांडेय ने बताया कि जनपद न्यायाधीश के प्रशासनिक आदेश के अनुपालन में अभिलेखपाल (सिविल) नीरज कुमार गुप्त ने तहरीर दी थी। उनकी तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

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