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Azamgarh News: पढ़ाई का गणित गड़बड़ाया...विज्ञान की शिक्षिका पढ़ा रहीं अंग्रेजी, इतिहास के अध्यापक सुलझा रहे गणित
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अंबारी जीजीआईसी में पढ़ती छात्राएं। संवाद
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जिले के राजकीय इंटर कॉलेजों और राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी का असर छात्रों की पढ़ाई पर साफ दिखाई दे रहा है। विषय विशेषज्ञों के अभाव में कई विद्यालयों में दूसरे विषय के शिक्षक कक्षाएं लेने को मजबूर हैं।
कहीं विज्ञान की शिक्षिका अंग्रेजी पढ़ा रही हैं तो कहीं इतिहास के प्रवक्ता गणित पढ़ा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शनिवार को टीम की पड़ताल में सामने आया कि शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
जिले में संचालित 24 राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में 419 पदों में 169 शिक्षक-शिक्षिकाओं के पद रिक्त चल रहे हैं। इससे विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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कई स्थानों पर विद्यालय प्रबंधन निजी शिक्षकों के सहारे शैक्षणिक कार्य संचालित कर रहा है। शहर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में हाईस्कूल स्तर पर अंग्रेजी के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी रिक्त हैं।
वहीं, इंटरमीडिएट स्तर पर अर्थशास्त्र, इतिहास, शिक्षाशास्त्र, मनोविज्ञान और गणित के प्रवक्ताओं के पद भी वर्षों से खाली पड़े हैं। ऐसे में इंटरमीडिएट के उपलब्ध प्रवक्ताओं को हाईस्कूल की कक्षाएं भी लेनी पड़ रही हैं।
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हाईस्कूल की शिक्षिकाएं लेती हैं इंटर की क्लास
बिलरियागंज। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बगवार में इंटरमीडिएट स्तर पर केवल तीन प्रवक्ता शिक्षिकाएं ही तैनात हैं, जो अंग्रेजी, संस्कृत और जीव विज्ञान विषय पढ़ा रही हैं, जबकि अंग्रेजी, गणित सहित प्रमुख विषयों के प्रवक्ता पद रिक्त हैं। ऐसे में हाईस्कूल स्तर की छह शिक्षिकाओं पर इंटरमीडिएट के अधिकांश विषयों का अतिरिक्त भार डाल दिया गया है, जिससे दोनों कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका सबसे बड़ा असर गणित पर दिख रहा है, जहां इंटरमीडिएट में एक भी छात्रा का दाखिला नहीं हुआ। वर्तमान सत्र में अब तक 190 से अधिक छात्राओं का प्रवेश हो चुका है, जबकि नामांकन प्रक्रिया अभी जारी है। अभिभावकों ने शासन से रिक्त पदों पर स्थायी शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति की मांग की है। प्रभारी प्रधानाचार्या रंजना रानी का कहना है कि उपलब्ध अध्यापिकाओं के माध्यम से छात्राओं को बेहतर शिक्षण देने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। संवाद
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लालगंज में 16 के सापेक्ष सिर्फ छह शिक्षक तैनात
लालगंज। कस्बा स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में शिक्षकों के कुल 16 पद स्वीकृत है, जिसमें हाईस्कूल स्तर के लिए 7 शिक्षक और इंटरमीडिएट के लिए 9 शिक्षकों का पद है। वहीं वर्षों से यहां हाईस्कूल में 7 शिक्षकों के सापेक्ष सिर्फ तीन ही शिक्षक तैनात हैं। वहीं, इंटरमीडिएट में जहां 9 शिक्षकों के सापेक्ष भी केवल तीन ही शिक्षकों की तैनाती है। अंग्रेजी के शिक्षक तो हैं पर विज्ञान व गणित के शिक्षक नहीं हैं। प्रभारी प्रधानाचार्या अनुराधा गौतम ने बताया कि शिक्षकों की कमी के बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया है परंतु शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। विद्यालय में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के जो भी शिक्षक तैनात है वे ही शिक्षणीय कार्य संभालते हैं। कॉलेज में कुल 220 छात्राएं पंजीकृत हैं। संवाद
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प्राइवेट शिक्षक के जिम्मे भौतिक-रसायन और अंग्रेजी की कक्षाएं
अंबारी। भगवंती देवी स्मारक राजकीय बालिका इंटर कालेज अंबारी दो साल बाद 50 वर्ष का हो जाएगा, लेकिन विद्यालय में अध्ययन कर रही छात्राओं के लिए गणित सहित विज्ञान वर्ग पढ़ाने वाला कोई शिक्षक नहीं है। शिक्षकों की कमी के चलते विद्यालय में छात्राओं की संख्या घटती चली जा रही है। जूनियर की तीन कक्षाओं में मात्र 16 छात्राओं का प्रवेश हो पाया है। विद्यालय में कक्षा 6 में 6, कक्षा 7 में 1 और कक्षा 8 में 9 छात्राओं का प्रवेश हुआ है। वहीं इंटर विज्ञान वर्ग में कक्षा 11 में 18 और कक्षा 12 में 12 छात्राओं ने प्रवेश लिया है। उधर, कला वर्ग में कक्षा 11 में 55 और कक्षा 12 में 50 छात्राओं ने प्रवेश लिया है। विद्यालय में जीव विज्ञान, हिंदी, उर्दू, सामाजिक, शारीरिक शिक्षा के साथ हिंदी और संस्कृत की प्रवक्ताओं की नियुक्ति हुई है। इंटर विज्ञान वर्ग में जीव विज्ञान की जिम्मेदारी सहायक अध्यापिका दीपिका पाल के जिम्मे है। वहीं, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी की जिम्मेदारी एक प्राइबेट शिक्षक के जिम्मे है। विद्यालय में अंग्रेजी और गणित का कोई शिक्षक नियुक्त नहीं है। इंटर कला वर्ग में समाजशास्त्र और नागरिक शास्त्र और कम्प्यूटर की जिम्मेदारी भी एक निजी शिक्षक के भरोसे है। प्रधानाचार्या डॉ. गायत्री ने बताया कि शिक्षकों की कमी के चलते समस्या हो रही है। दो साल में विद्यालय 50 वर्ष पूरा करने जा रहा है, लेकिन विद्यालय में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है। संवाद
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विषय विशेषज्ञ नहीं, दूसरे शिक्षक संभाल रहे कक्षाएं
अतरौलिया। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में विषयवार शिक्षकों की भारी कमी का असर छात्राओं की पढ़ाई पर साफ दिखाई दे रहा है। पड़ताल में सामने आया कि विद्यालय में कुल सात शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें एक संस्कृत प्रवक्ता और छह एलटी सहायक अध्यापक हैं। कला वर्ग में हिंदी, समाजशास्त्र, नागरिक शास्त्र, गृह विज्ञान, अंग्रेजी और संस्कृत के प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं, जबकि विज्ञान वर्ग में भी विषय विशेषज्ञ नहीं हैं। विज्ञान की पढ़ाई के लिए विद्यालय ने एक निजी शिक्षक की व्यवस्था की है। विद्यालय में वर्तमान में 287 छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 277 थी। हाईस्कूल विज्ञान वर्ग की 35, कला वर्ग की 30 और इंटरमीडिएट की 125 छात्राएं ऐसे विषय पढ़ रही हैं, जिनके नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। गणित की सहायक अध्यापिका कला वर्ग की कक्षाएं ले रही हैं। विज्ञान वर्ग की छात्राओं का कहना है कि विषय विशेषज्ञों के अभाव में विज्ञान सहित अन्य विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
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राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। रिक्त पदों को भरने के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। विद्यालयों में समायोजन के लिए सभी विद्यालयों को प्रोजेक्ट अलंकार में शामिल कराया जा रहा है। विरेंद्र प्रताप सिंह, सहायक जिला विद्यालय निरीक्षक।
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कहीं विज्ञान की शिक्षिका अंग्रेजी पढ़ा रही हैं तो कहीं इतिहास के प्रवक्ता गणित पढ़ा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शनिवार को टीम की पड़ताल में सामने आया कि शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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जिले में संचालित 24 राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में 419 पदों में 169 शिक्षक-शिक्षिकाओं के पद रिक्त चल रहे हैं। इससे विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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कई स्थानों पर विद्यालय प्रबंधन निजी शिक्षकों के सहारे शैक्षणिक कार्य संचालित कर रहा है। शहर स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में हाईस्कूल स्तर पर अंग्रेजी के चार पद स्वीकृत हैं, लेकिन सभी रिक्त हैं।
वहीं, इंटरमीडिएट स्तर पर अर्थशास्त्र, इतिहास, शिक्षाशास्त्र, मनोविज्ञान और गणित के प्रवक्ताओं के पद भी वर्षों से खाली पड़े हैं। ऐसे में इंटरमीडिएट के उपलब्ध प्रवक्ताओं को हाईस्कूल की कक्षाएं भी लेनी पड़ रही हैं।
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हाईस्कूल की शिक्षिकाएं लेती हैं इंटर की क्लास
बिलरियागंज। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बगवार में इंटरमीडिएट स्तर पर केवल तीन प्रवक्ता शिक्षिकाएं ही तैनात हैं, जो अंग्रेजी, संस्कृत और जीव विज्ञान विषय पढ़ा रही हैं, जबकि अंग्रेजी, गणित सहित प्रमुख विषयों के प्रवक्ता पद रिक्त हैं। ऐसे में हाईस्कूल स्तर की छह शिक्षिकाओं पर इंटरमीडिएट के अधिकांश विषयों का अतिरिक्त भार डाल दिया गया है, जिससे दोनों कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका सबसे बड़ा असर गणित पर दिख रहा है, जहां इंटरमीडिएट में एक भी छात्रा का दाखिला नहीं हुआ। वर्तमान सत्र में अब तक 190 से अधिक छात्राओं का प्रवेश हो चुका है, जबकि नामांकन प्रक्रिया अभी जारी है। अभिभावकों ने शासन से रिक्त पदों पर स्थायी शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति की मांग की है। प्रभारी प्रधानाचार्या रंजना रानी का कहना है कि उपलब्ध अध्यापिकाओं के माध्यम से छात्राओं को बेहतर शिक्षण देने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। संवाद
लालगंज में 16 के सापेक्ष सिर्फ छह शिक्षक तैनात
लालगंज। कस्बा स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में शिक्षकों के कुल 16 पद स्वीकृत है, जिसमें हाईस्कूल स्तर के लिए 7 शिक्षक और इंटरमीडिएट के लिए 9 शिक्षकों का पद है। वहीं वर्षों से यहां हाईस्कूल में 7 शिक्षकों के सापेक्ष सिर्फ तीन ही शिक्षक तैनात हैं। वहीं, इंटरमीडिएट में जहां 9 शिक्षकों के सापेक्ष भी केवल तीन ही शिक्षकों की तैनाती है। अंग्रेजी के शिक्षक तो हैं पर विज्ञान व गणित के शिक्षक नहीं हैं। प्रभारी प्रधानाचार्या अनुराधा गौतम ने बताया कि शिक्षकों की कमी के बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया है परंतु शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। विद्यालय में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के जो भी शिक्षक तैनात है वे ही शिक्षणीय कार्य संभालते हैं। कॉलेज में कुल 220 छात्राएं पंजीकृत हैं। संवाद
प्राइवेट शिक्षक के जिम्मे भौतिक-रसायन और अंग्रेजी की कक्षाएं
अंबारी। भगवंती देवी स्मारक राजकीय बालिका इंटर कालेज अंबारी दो साल बाद 50 वर्ष का हो जाएगा, लेकिन विद्यालय में अध्ययन कर रही छात्राओं के लिए गणित सहित विज्ञान वर्ग पढ़ाने वाला कोई शिक्षक नहीं है। शिक्षकों की कमी के चलते विद्यालय में छात्राओं की संख्या घटती चली जा रही है। जूनियर की तीन कक्षाओं में मात्र 16 छात्राओं का प्रवेश हो पाया है। विद्यालय में कक्षा 6 में 6, कक्षा 7 में 1 और कक्षा 8 में 9 छात्राओं का प्रवेश हुआ है। वहीं इंटर विज्ञान वर्ग में कक्षा 11 में 18 और कक्षा 12 में 12 छात्राओं ने प्रवेश लिया है। उधर, कला वर्ग में कक्षा 11 में 55 और कक्षा 12 में 50 छात्राओं ने प्रवेश लिया है। विद्यालय में जीव विज्ञान, हिंदी, उर्दू, सामाजिक, शारीरिक शिक्षा के साथ हिंदी और संस्कृत की प्रवक्ताओं की नियुक्ति हुई है। इंटर विज्ञान वर्ग में जीव विज्ञान की जिम्मेदारी सहायक अध्यापिका दीपिका पाल के जिम्मे है। वहीं, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी की जिम्मेदारी एक प्राइबेट शिक्षक के जिम्मे है। विद्यालय में अंग्रेजी और गणित का कोई शिक्षक नियुक्त नहीं है। इंटर कला वर्ग में समाजशास्त्र और नागरिक शास्त्र और कम्प्यूटर की जिम्मेदारी भी एक निजी शिक्षक के भरोसे है। प्रधानाचार्या डॉ. गायत्री ने बताया कि शिक्षकों की कमी के चलते समस्या हो रही है। दो साल में विद्यालय 50 वर्ष पूरा करने जा रहा है, लेकिन विद्यालय में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है। संवाद
विषय विशेषज्ञ नहीं, दूसरे शिक्षक संभाल रहे कक्षाएं
अतरौलिया। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में विषयवार शिक्षकों की भारी कमी का असर छात्राओं की पढ़ाई पर साफ दिखाई दे रहा है। पड़ताल में सामने आया कि विद्यालय में कुल सात शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें एक संस्कृत प्रवक्ता और छह एलटी सहायक अध्यापक हैं। कला वर्ग में हिंदी, समाजशास्त्र, नागरिक शास्त्र, गृह विज्ञान, अंग्रेजी और संस्कृत के प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं, जबकि विज्ञान वर्ग में भी विषय विशेषज्ञ नहीं हैं। विज्ञान की पढ़ाई के लिए विद्यालय ने एक निजी शिक्षक की व्यवस्था की है। विद्यालय में वर्तमान में 287 छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 277 थी। हाईस्कूल विज्ञान वर्ग की 35, कला वर्ग की 30 और इंटरमीडिएट की 125 छात्राएं ऐसे विषय पढ़ रही हैं, जिनके नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। गणित की सहायक अध्यापिका कला वर्ग की कक्षाएं ले रही हैं। विज्ञान वर्ग की छात्राओं का कहना है कि विषय विशेषज्ञों के अभाव में विज्ञान सहित अन्य विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। संवाद
राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। रिक्त पदों को भरने के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। विद्यालयों में समायोजन के लिए सभी विद्यालयों को प्रोजेक्ट अलंकार में शामिल कराया जा रहा है। विरेंद्र प्रताप सिंह, सहायक जिला विद्यालय निरीक्षक।