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Azamgarh News: विद्यालय के पीछे से जा रहे तारों को मुख्य गेट पर लाया, अब लीपापोती में जुटा विभाग
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बिलरियागंज। श्रीनगर सियरहा स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर 11,000 वोल्ट की हाई-वोल्टेज लाइन को स्कूल के पीछे से हटाकर मुख्य गेट के सामने शिफ्ट कर दिया गया है। समाचार पत्र में खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। अब जिम्मेदार अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैं और पूरे मामले पर लीपापोती की कोशिश शुरू हो गई है।
प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर सियरहा के पीछे से करीब 15-20 फीट की दूरी पर बिजली के तार पोल के सहारे गुजर रहे थे। विद्युत निगम ने इन सुरक्षित तारों को वहां से हटाकर विद्यालय के ठीक सामने 11,000 वोल्ट की लाइन के पोल पर शिफ्ट कर दिया। बुधवार को इस गंभीर लापरवाही पर समाचार ''विद्यालय के सामने से 11 हजार वोल्ट की लाइन हटाने की जगह खींची नई लाइन'' शीर्षक से प्रकाशित होने के बाद मुख्य अभियंता रामबाबू ने अधिशासी अभियंता (सगड़ी) डी.के. अग्रवाल से जवाब तलब किया। जवाब में अधिशासी अभियंता ने बीएसए कार्यालय द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया।
हैरानी की बात यह है कि प्रधानाध्यापक ने प्रस्ताव दिया कि तार विद्यालय को छू रहे हैं, इसलिए उन्हें हटाया जाए। लेकिन न तो बेसिक शिक्षा विभाग ने और न ही बिजली निगम ने मौके पर जाकर जांच करना मुनासिब समझा। बिना किसी तकनीकी निरीक्षण के तार को पीछे से हटाकर गेट के सामने लगा दिया गया, जिससे खतरा कम होने के बजाय और बढ़ गया है।
प्रधानाध्यापक ने मांग की थी कि तार विद्यालय को छू रहे हैं, इसलिए उन्हें हटाना जरूरी है। लेकिन तार को गेट के सामने क्यों शिफ्ट किया गया, यह गंभीर जांच का विषय है। प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।— राजीव पाठक, बीएसए
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प्राथमिक विद्यालय श्रीनगर सियरहा के पीछे से करीब 15-20 फीट की दूरी पर बिजली के तार पोल के सहारे गुजर रहे थे। विद्युत निगम ने इन सुरक्षित तारों को वहां से हटाकर विद्यालय के ठीक सामने 11,000 वोल्ट की लाइन के पोल पर शिफ्ट कर दिया। बुधवार को इस गंभीर लापरवाही पर समाचार ''विद्यालय के सामने से 11 हजार वोल्ट की लाइन हटाने की जगह खींची नई लाइन'' शीर्षक से प्रकाशित होने के बाद मुख्य अभियंता रामबाबू ने अधिशासी अभियंता (सगड़ी) डी.के. अग्रवाल से जवाब तलब किया। जवाब में अधिशासी अभियंता ने बीएसए कार्यालय द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया।
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हैरानी की बात यह है कि प्रधानाध्यापक ने प्रस्ताव दिया कि तार विद्यालय को छू रहे हैं, इसलिए उन्हें हटाया जाए। लेकिन न तो बेसिक शिक्षा विभाग ने और न ही बिजली निगम ने मौके पर जाकर जांच करना मुनासिब समझा। बिना किसी तकनीकी निरीक्षण के तार को पीछे से हटाकर गेट के सामने लगा दिया गया, जिससे खतरा कम होने के बजाय और बढ़ गया है।
प्रधानाध्यापक ने मांग की थी कि तार विद्यालय को छू रहे हैं, इसलिए उन्हें हटाना जरूरी है। लेकिन तार को गेट के सामने क्यों शिफ्ट किया गया, यह गंभीर जांच का विषय है। प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। मामले की निष्पक्ष जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।— राजीव पाठक, बीएसए