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Baghpat News: पानी में बह गए 15 करोड़ रुपये, किसानों के अरमान डूब गए
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किशनपुर बराल के जंगल में क्षतिग्रस्त हुई पूर्वी यमुना नहर की पटरी। संवाद
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- किशनपुर बराल में पूर्वी यमुना नहर की पटरी टूटी, सफाई व मरम्मत पर एक महीने पहले खर्च हुए थे 15 करोड़ रुपये
- आसपास की एक हजार बीघा फसल जलमग्न हो गई, गेहूं की फसल पूरी तरह से डूबने से बर्बाद हो गई
संवाद न्यूज़ एजेंसी
बड़ौत/रमाला। किशनपुर बराल के जंगल में सोमवार को पूर्वी यमुना नहर की पटरी टूटने से एक हजार बीघा में फसल जलमग्न हो गई। इसमें गेहूं की करीब 700 बीघा फसल पूरी तरह से डूबने पर बर्बाद हो गई और इस तरह फसल ही नहीं, बल्कि किसानों के अरमान भी डूब गए। किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर नहर की सफाई व मरम्मत के नाम पर 15 करोड़ रुपये बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
किसान राजपाल, देवेंद्र आदि ने 15 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि न तो नहर की तली को समतल किया गया और न ही किनारों को सही से मजबूत किया गया। वहां हंगामा होने की सूचना पर पहुंचे सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रजनीश कुमार को किसानों ने खरी-खोटी सुनाई।
आरोप लगाया कि किशनपुर झाल के गेट बंद रहने के कारण भी नहर में पानी का दबाव बढ़ा और पटरी टूट गई, जिससे पानी खेतों में भर गया। वहां राजपाल, देवेंद्र, वीरेंद्र, सत्यप्रकाश, महेंद्र, जयवीर, रामवीर समेत सैकड़ों किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। वहां शामली खंड के अधिकारी भी पहुंचे जो नहर की पटरी टूटने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं मंगलवार तक नहर की पटरी को ठीक कराया गया।
- सांसद ने खुद भी उठाए सवाल, जांच कराने की बात कही
सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान भी नहर की पटरी टूटने से फसल जलमग्न होने का पता चलने पर वहां पहुंच गए। उन्होंने नहर की सफाई व मरम्मत कार्य में अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही। इसके साथ ही नहर की पटरी ठीक कराने के निर्देश दिए। किसानों ने सांसद के सामने फसल के नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग रखी, जिसके लिए भी किसानों को आश्वासन दिया।
वर्जन-- जिस स्थान पर नहर टूटी है, उसका संचालन शामली लोअर खंड के अधिकारियों और कर्मचारियों के अधीन है। किशनपुर झाल खुला हुआ था और नहर का रेगुलेशन शामली क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जिस तरह के आरोप लगाए गए हैं, वह निराधार है। - रजनीश कुमार, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग बड़ौत
वर्जन--
यदि सिंचाई विभाग बड़ौत द्वारा नहर का संचालन सही तरीके से किया जाता, तो नहर नहीं टूटती। नहर टूटने की जिम्मेदारी सिंचाई खंड बड़ौत की है। जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें मुआवजा दिलाने के लिए उच्च अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। विवेक वाष्र्णेय, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग शामली
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
बड़ौत/रमाला। किशनपुर बराल के जंगल में सोमवार को पूर्वी यमुना नहर की पटरी टूटने से एक हजार बीघा में फसल जलमग्न हो गई। इसमें गेहूं की करीब 700 बीघा फसल पूरी तरह से डूबने पर बर्बाद हो गई और इस तरह फसल ही नहीं, बल्कि किसानों के अरमान भी डूब गए। किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर नहर की सफाई व मरम्मत के नाम पर 15 करोड़ रुपये बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
किसान राजपाल, देवेंद्र आदि ने 15 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि न तो नहर की तली को समतल किया गया और न ही किनारों को सही से मजबूत किया गया। वहां हंगामा होने की सूचना पर पहुंचे सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रजनीश कुमार को किसानों ने खरी-खोटी सुनाई।
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आरोप लगाया कि किशनपुर झाल के गेट बंद रहने के कारण भी नहर में पानी का दबाव बढ़ा और पटरी टूट गई, जिससे पानी खेतों में भर गया। वहां राजपाल, देवेंद्र, वीरेंद्र, सत्यप्रकाश, महेंद्र, जयवीर, रामवीर समेत सैकड़ों किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। वहां शामली खंड के अधिकारी भी पहुंचे जो नहर की पटरी टूटने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं मंगलवार तक नहर की पटरी को ठीक कराया गया।
- सांसद ने खुद भी उठाए सवाल, जांच कराने की बात कही
सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान भी नहर की पटरी टूटने से फसल जलमग्न होने का पता चलने पर वहां पहुंच गए। उन्होंने नहर की सफाई व मरम्मत कार्य में अनियमितता बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच कराने की बात कही। इसके साथ ही नहर की पटरी ठीक कराने के निर्देश दिए। किसानों ने सांसद के सामने फसल के नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग रखी, जिसके लिए भी किसानों को आश्वासन दिया।
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यदि सिंचाई विभाग बड़ौत द्वारा नहर का संचालन सही तरीके से किया जाता, तो नहर नहीं टूटती। नहर टूटने की जिम्मेदारी सिंचाई खंड बड़ौत की है। जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें मुआवजा दिलाने के लिए उच्च अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। विवेक वाष्र्णेय, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग शामली
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