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Baghpat News: डॉक्टरों से पहले पुलिस आएगी, तभी मिलेगी जिंदगी की मोहलत
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बागपत। जिला अस्पताल में शनिवार को घायल मजदूर मोबीन और तौशीन तड़पते रहे और दर्द होने पर चिल्लाते रहे, मगर चिकित्सक वहां पुलिस के आने का इंतजार करते रहे। घायलों के परिजन चिकित्सकों के आगे हाथ जोड़ते रहे, तब भी चिकित्सकों का दिल नहीं पसीजा। जब परिजनों ने हंगामा किया तो चिकित्सकों ने दोनों घायलों का उपचार शुरू किया।
खेड़ा इस्लामपुर गांव में ईंट भट्ठे पर सहारनपुर के हज्जीपुर निवासी मोबिन व तौशीन परिजनों के साथ ईंट पथाई का काम करते हैं। शनिवार सुबह वहां ट्रैक्टर हटाने को लेकर मजदूरों के दो पक्षों में झगड़ा हो गया। इसमें दो मजदूर मोबिन व तौशीन गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों के पहुंचने पर उनको देखकर आरोपी वहां से भाग गए। परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया और घायलों को सरूरपुर सीएचसी में लेकर पहुंचे। वहां से बड़ौत थाना क्षेत्र का मामला बताते हुए जिला अस्पताल भेज दिया गया। परिजन जब जिला अस्पताल में घायलों को लेकर पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने उपचार करने से मना कर दिया।
घायलों को स्ट्रेचर पर लेटा दिया गया और घायल तड़पते रहे, लेकिन चिकित्सकों ने उपचार शुरू नहीं किया। चिकित्सक बार-बार पुलिस थाने में पहले शिकायत दर्ज कराने और पुलिस के अस्पताल में आने पर उपचार करने की बात कहते रहे। घायलों के साथ आया उनके परिवार का सदस्य उस्मान काफी देर तक चिकित्सकों के सामने हाथ जोड़ता रहा, लेकिन वे नहीं माने और वापस सरूरपुर सीएचसी व बड़ौत लेकर जाने की बात करते रहे। जब परिजनों ने हंगामा शुरू किया तो आधा घंटे के बाद चिकित्सकों ने उनका उपचार किया। बाद में परिजनों ने बड़ौत थाने में शिकायत दी। जांच अधिकारी दीक्षित त्यागी का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है और उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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वर्जन
मारपीट के मामले में पुलिस थाने की रिपोर्ट जरूरी होती है, इसलिए चिकित्सक बिना पुलिस रिपोर्ट के उपचार नहीं करते हैं। घायलों का 15 से 20 मिनट बाद उपचार शुरू कर दिया गया था।
-डॉ. अनुराग सीएमएस जिला अस्पताल
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खेड़ा इस्लामपुर गांव में ईंट भट्ठे पर सहारनपुर के हज्जीपुर निवासी मोबिन व तौशीन परिजनों के साथ ईंट पथाई का काम करते हैं। शनिवार सुबह वहां ट्रैक्टर हटाने को लेकर मजदूरों के दो पक्षों में झगड़ा हो गया। इसमें दो मजदूर मोबिन व तौशीन गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों के पहुंचने पर उनको देखकर आरोपी वहां से भाग गए। परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया और घायलों को सरूरपुर सीएचसी में लेकर पहुंचे। वहां से बड़ौत थाना क्षेत्र का मामला बताते हुए जिला अस्पताल भेज दिया गया। परिजन जब जिला अस्पताल में घायलों को लेकर पहुंचे तो वहां चिकित्सकों ने उपचार करने से मना कर दिया।
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घायलों को स्ट्रेचर पर लेटा दिया गया और घायल तड़पते रहे, लेकिन चिकित्सकों ने उपचार शुरू नहीं किया। चिकित्सक बार-बार पुलिस थाने में पहले शिकायत दर्ज कराने और पुलिस के अस्पताल में आने पर उपचार करने की बात कहते रहे। घायलों के साथ आया उनके परिवार का सदस्य उस्मान काफी देर तक चिकित्सकों के सामने हाथ जोड़ता रहा, लेकिन वे नहीं माने और वापस सरूरपुर सीएचसी व बड़ौत लेकर जाने की बात करते रहे। जब परिजनों ने हंगामा शुरू किया तो आधा घंटे के बाद चिकित्सकों ने उनका उपचार किया। बाद में परिजनों ने बड़ौत थाने में शिकायत दी। जांच अधिकारी दीक्षित त्यागी का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है और उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन
मारपीट के मामले में पुलिस थाने की रिपोर्ट जरूरी होती है, इसलिए चिकित्सक बिना पुलिस रिपोर्ट के उपचार नहीं करते हैं। घायलों का 15 से 20 मिनट बाद उपचार शुरू कर दिया गया था।
-डॉ. अनुराग सीएमएस जिला अस्पताल