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Baghpat News: डोली में सवार होकर आएंगी और हाथी पर बैठकर जाएंगी माता रानी
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बागपत। चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं। इस बार माता रानी डोली पर सवार होकर आ रही हैं और हाथी पर सवार होकर जाएंगी। सुबह 6.54 से 7.40 और 9.16 से 11.40 तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस बार लोगों में असंतोष हो सकता है और राजनीति में भी उथल-पुथल का योग बन रहा है।
शहर के बाबा जानकीदास मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि इस बार 19 मार्च बृहस्पतिवार से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। 19 मार्च को सुबह 6.53 बजे तक अमावस्या तिथि रहेगी। 20 मार्च को सुबह चार बजकर 53 मिनट तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। सूर्योदय के बाद तिथि का प्रवेश और सूर्योदय से पूर्व तिथि का समापन होने के कारणवश तिथि का क्षय माना जाता है। इस बार माता रानी का आगमन डोली पर हो रहा है। माता रानी का डोली पर आगमन शास्त्रों में शुभ नहीं माना जाता है। माता रानी के डोली पर आने से देश में अस्थिरता और राजनीति में उथल-पुथल का योग बन रहा है। हालांकि माता का प्रस्थान हाथी पर होने से शुभ संकेत हैं। विशेष रूप से अच्छी वर्षा होने से फसल की अच्छी पैदावार होगी। इस वर्ष के राजा देव गुरु बृहस्पति और मंत्री मंगल होने से शुभ है। नवरात्र में तन्मय होकर शक्ति की आराधना करने से उत्तम फल की प्राप्ति होगी। 26 मार्च को महाष्टमी और 27 मार्च को रामनवमी का महापर्व मनाया जाएगा।
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ऐसे करें कलश की स्थापना
ज्यातिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि में सुबह स्नान करने के उपरांत उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सात प्रकार के अनाज (जौ) मिट्टी के पात्र में बोएं। मिट्टी या फिर तांबे के कलश में जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ रखकर कंठ पर कलावा बांधें और और उसके ऊपर नारियल रखकर स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान गणेश, वरुण देव और फिर मां दुर्गा का ध्यान व आशन करने से उत्तम और शुभ फल की प्राप्ति होगी।
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ऐसे करें कलश की स्थापना
ज्यातिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि में सुबह स्नान करने के उपरांत उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सात प्रकार के अनाज (जौ) मिट्टी के पात्र में बोएं। मिट्टी या फिर तांबे के कलश में जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी, हल्दी की गांठ रखकर कंठ पर कलावा बांधें और और उसके ऊपर नारियल रखकर स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान गणेश, वरुण देव और फिर मां दुर्गा का ध्यान व आशन करने से उत्तम और शुभ फल की प्राप्ति होगी।