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नवरात्रि का पहला दिन: पीले वस्त्र पहनें, मिलेगा मां शैलपुत्री का आशीर्वाद, नवरात्रि का हर दिन है खास

अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Thu, 19 Mar 2026 10:27 AM IST
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सार

Meerut News: नवरात्रि के नौ दिनों में मातारानी के प्रत्येक स्वरूप के लिए विशेष रंग के वस्त्र धारण करने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इन रंगों के वस्त्र पहनने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

First day of Navratri: Wear yellow clothes to get blessings of Goddess Shailputri
आचार्य प्रेम सागर भारद्वा और पंडित गणेश दत्त शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रकृति नव-वसंत के रंगों में खिल उठी है। आस्था भी अपने चरम पर है। मंदिरों में गूंजते शंख-घंटे, जलती अखंड ज्योति और भक्तों के मन में उमड़ती श्रद्धा, यही संकेत है कि आज 19 मार्च को चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आरंभ हो चुका है। 27 मार्च तक चलने वाला यह नौ दिन का उत्सव केवल पूजा नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, ऊर्जा और देवी कृपा का दिव्य अवसर है।
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First day of Navratri: Wear yellow clothes to get blessings of Goddess Shailputri
नवरात्रि की खरीदारी। - फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि के पहले दिन, यानी आज मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। मां शैलपुत्री को हिमालय राज की पुत्री के रूप में जाना जाता है और वे दृढ़ता तथा शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों में वस्त्रों के रंगों का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मातारानी के प्रत्येक स्वरूप के लिए विशेष रंग के वस्त्र धारण करने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इन विशेष रंगों के वस्त्र पहनने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 
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First day of Navratri: Wear yellow clothes to get blessings of Goddess Shailputri
मूर्तियां बनाता कारीगर। - फोटो : अमर उजाला
रंगों में छिपा है देवी का आशीर्वाद
भारतीय परंपरा में रंग केवल सौंदर्य नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के वाहक माने जाते हैं। नवरात्रि के प्रत्येक दिन का एक विशेष रंग होता है, जो देवी के स्वरूप से जुड़ा होता है। इन रंगों को धारण करने से भक्त देवी के और निकट महसूस करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मां शैलपुत्री: स्थिरता और शक्ति का प्रथम स्वरूप
नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा से जीवन में स्थिरता, धैर्य और आत्मबल का संचार होता है। उनका शांत और सौम्य स्वरूप भक्तों को आंतरिक शांति प्रदान करता है। विधिपूर्वक पूजा, मंत्र जाप और भक्ति भाव से उनकी आराधना करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
 

पहले दिन पीला रंग का विधान: आचार्य प्रेमसागर भारद्वाज 
आचार्य प्रेमसागर भारद्वाज ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पीला रंग मां शैलपुत्री का पसंदीदा रंग है। पीले वस्त्र पहनकर पूजा करने से भक्तों में नई ऊर्जा का संचार होता है। यह रंग जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है। भक्तगण इस दिन पीले रंग के परिधान पहनकर मां शैलपुत्री का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पीला रंग सूर्य और प्रकाश का प्रतीक: पंडित गणेश दत्त शर्मा 
पंडित गणेश दत्त शर्मा के अनुसार, मां शैलपुत्री प्रकृति और शक्ति का स्वरूप हैं और नवरात्रि का पहला दिन जीवन में नई ऊर्जा का संदेश देता है। पीला रंग सूर्य और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन पीले वस्त्र पहनकर पूजा करने से सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। साथ ही उन्होंने बताया कि अगर आप पूरे दिन पीला रंग नहीं पहन सकते तो आप उस रंग का रुमाल, दुपट्टा या कोई छोटी चीज भी पहन सकते हैं या अपने पास रख सकते हैं, उसका प्रभाव भी उतना ही मिलता है।
 

चैत्र नवरात्रि:  मां की मूर्तियों से सजी आस्था की गलियां
चैत्र नवरात्रि शुरू होते ही मेरठ में भक्ति का रंग और गहरा हो गया है। शहर की गलियों, बाजारों और कारीगरों की कार्यशालाओं में अब मां दुर्गा की मूर्तियां पूरी तरह सजकर तैयार हैं और श्रद्धालु इन्हें अपने घरों व पंडालों में स्थापित करने के लिए खरीद रहे हैं। नवरात्रि के आरंभ के साथ ही प्रतिमाओं की मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे मूर्तिकारों के यहां दिनभर चहल-पहल बनी हुई है।

प्रतिमा निर्माता प्रमोद प्रजापति बताते हैं कि इस बार उन्होंने पूरे उत्साह के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की मूर्तियां तैयार की हैं। हर मूर्ति को अलग भाव, रंग और स्वरूप देकर जीवंत बनाने की कोशिश की गई है, ताकि भक्तों को साक्षात देवी के दर्शन का अनुभव हो सके। उनकी बनाई मूर्तियां मेरठ के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली तक भेजी जा रही हैं, जहां से पहले ही बुकिंग आ चुकी थी। कारीगर मनोज प्रजापति के अनुसार, इस समय मिट्टी, फाइबर और पीओपी से बनी मूर्तियां की सबसे ज्यादा मांग है। खासकर पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। मूर्तियों की कीमत आकार और सजावट के अनुसार तय होती है। छोटी मूर्तियां 400 से 1000 रुपये तक, जबकि बड़ी 1500 से 2500 रुपये या उससे अधिक में उपलब्ध हैं।
 

पूजन सामग्री का बाजार भी पहका
नवरात्रि के चलते पूजा सामग्री के बाजार में भी रौनक है। लाल चुनरी, अगरबत्ती, कपूर और घी दीपक जैसी वस्तुओं की बिक्री तेज हो गई है। कुछ सामानों के दामों में हल्का इजाफा जरूर हुआ है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा। नवरात्रि का यह उत्सव केवल पूजा का नहीं, बल्कि कारीगरों की मेहनत और कला का भी पर्व बन गया है। मां दुर्गा की प्रतिमाओं के साथ शहर में भक्ति, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

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