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Baghpat News: बंदरों ने चार बच्चों का चेहरा नोच डाला, दो महिलाओं को भी काटा

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 12:53 AM IST
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Monkeys scratched the faces of four children and bit two women.
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बालैनी। सैदपुर कलां गांव में बंदरों ने चार बच्चों का चेहरा नोच डाला तो दो महिलाओं को भी काटकर घायल कर दिया। बच्चों का जिला अस्पताल व पीएचसी में उपचार कराया गया। साथ ही सभी को एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाई गई। इस तरह केवल सैदपुर ही नहीं, बल्कि अधिकतर गांवों में बंदरों का आतंक हो रहा है। लोगों ने बंदरों को पकड़वाने की मांग की।
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सैदपुर गांव में बंदरों ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। गांव में 50 से अधिक बंदर घूम रहे हैं और आए दिन लोगों पर हमला रहे हैं। सोमवार व मंगलवार को बंदरों ने तीन वर्षीय धैर्य के चेहरे को नोच दिया तो आशु के हाथ व चेहरे पर काट लिया। बच्चे शुभम व गौतम के चेहरे, हाथ पर काटकर घायल कर दिया। इनके अलावा सुरेश देवी सहित दो महिलाओं को घायल कर दिया। परिजनों ने सभी को जिला अस्पताल व पिलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया और वहां उपचार कराने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाई।
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गांव के रामवीर, ओमवीर, जितेंद्र, सोमेंद्र, सुभाष, धर्मवीर, इकबाल, सतेंद्र प्रधान, ओमप्रकाश ने बताया कि बंदरों के आतंक के कारण बच्चों व महिलाओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों को स्कूल छोड़कर आने में परेशानी हो रही है। यदि कोई छत पर जाता है तो बंदर हमला कर देते हैं। डर के कारण कोई भी छत पर नहीं बैठ पाता है। कई बार बंदरों को पकड़वाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन ध्यान तक नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने डीएम से बंदरों को पकड़वाकर दूसरे स्थान पर भेजने की मांग की ताकि लोग सुरक्षित रह सकें और उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े।
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बंदरों के हमले से बुजुर्ग की हो गई थी मौत
बंदरों का केवल एक ही गांव में आतंक नहीं हैं, बल्कि अधिकतर गांवों में बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं। फतेहपुर गांव में भी 30 दिसंबर को छत पर बैठे 60 वर्षीय रोहताश गिरी पर बंदरों ने हमला बोल दिया था। उनकी छत से गिरकर मौत हो गई थी। इसके अलावा गांव में कई लोगों को बंदर काटकर घायल कर चुके हैं। वहीं लहचौड़ा, रटौल, बागपत, बड़ौत, खेकड़ा आदि स्थानों पर भी बंदरों के हमले से बच्चे, महिलाएं व लोग घायल हो चुके हैं।
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-कई बार बंदरों को पकड़वाने की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। इसके कारण लोगों को परेशानी हो रही है। -सचिन ढाका

- बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है, क्योंकि बच्चों को देखकर बंदर हमला करके सामान छीनकर ले जाते हैं। इससे बच्चों में दहशत बनी हुई है। -मनीष ढाका
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बंदरों को पकड़वाने के लिए अधिकारियों के पास शिकायत की गई है। बंदरों को पकड़वाकर जल्द ही समस्या का समाधान कराया जाएगा। -प्रवेश देवी, प्रधान
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