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Baghpat News: 50 से ज्यादा बच्चों और लोगों की तस्करी करने का मुख्य आरोपी नाै माह बाद झारखंड से गिरफ्तार
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बड़ाैत (बागपत)। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने मानव तस्करी के आरोपी नजरुल को नाै माह बाद गिरफ्तार किया है। झारखंड के जिला साहिबगंज के छोटा कदमा गांव स्थित उसके घर से शुक्रवार को दबाेच लिया। इसके बाद साहिबगंज न्यायालय में पेश करके 72 घंटे के ट्रांजिट रिमांड पर उसे बागपत लेकर आई। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। आरोपी ने 50 से अधिक बच्चों और लोगों को बेचने की बात कबूल की है। वह नेपाल, बिहार और झारखंड से गरीबों के बच्चों व गरीब लोगों को अच्छी मजदूरी दिलाने का लालच देकर लाता था और 20-20 हजार रुपये में पश्चिम यूपी, हरियाणा और दिल्ली में बेच देता था।
ग्रामीण समाज विकास केंद्र के प्रोजेक्ट मैनेजर गजेंद्र सिंह ने 19 सितंबर 2025 में एएचटीयू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि ट्योढ़ी गांव में कुछ बच्चों और श्रमिकों को बंधक बनाकर खेतों में काम कराया जा रहा है। इसके बाद श्रम विभाग, प्रोबेशन विभाग और पुलिस की टीम ने ट्योढ़ी गांव में छापा मारकर तीन किशोरों समेत छह श्रमिकों को मुक्त कराया था। पूछताछ में किसानों ने गांव के ही सहारनपुर में तैनात हेड कांस्टेबल प्रवेश पर 20-20 हजार रुपये में श्रमिकों को बेचने का आरोप लगाया था। पूछताछ में श्रमिकों ने नौ महीने पहले ट्योढ़ी गांव में लाने और मजदूरी मांगने पर पीटने, भूखा रखने का आरोप लगाया था।
मामले में पुलिस ने सहारनपुर में तैनात ट्योढ़ी के हेड कांस्टेबल प्रवेश उर्फ कल्लू, किसान महेश शर्मा, नितिन, सुभाष, राम मोहन शर्मा, जगवीर को गिरफ्तार किया था। नजरुल फरार चल रहा था। शुक्रवार को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने की टीम झारखंड के साहिबगंज जिले के छोटा कदम गांव पहुंची। दबिश देकर आरोपी नजरुल को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि नजरुल ही श्रमिकों को लाकर 20-20 हजार रुपये में बेचा था। उसने कई अन्य श्रमिकों के बेचने के बारे में भी बताया है।
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मानव तस्कर के दिल्ली, हरियाणा और गाजियाबाद में संपर्क
पूछताछ में आरोपी नजरुल ने बताया कि वह कई साल से मानव तस्करी कर रहा है। झारखंड, बिहार और नेपाल से ऐसे श्रमिकों को चिह्नित कर भेजता था, जो काफी गरीब हैं। उनको मजदूरी कराने और अच्छे पैसे दिलवाने की बात कहकर लाता था। इन मजदूराें को जिन्हें वह बेचता था वह मजदूरों को प्रताड़ित कराकर काम कराते थे। न तो मजदूरी देते थे न ही सही भोजन-पानी देते थे। पूरी तरह से बंधक बना लेते थे। बागपत, दिल्ली, गाजियाबाद, हरियाणा के अलावा अन्य जगहों पर भी नजरुल ने 20-20 हजार रुपये में मजदूर बेचे हैं। नजरुल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दी।
हेड कांस्टेबल समेत छह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
जांच अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि मानव तस्करी के मामले में सहारनपुर में तैनात हेड कांस्टेबल को अधिकारियों ने रिपोर्ट मिलने पर निलंबित कर दिया था। इसके बाद उच्चाधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद हेड कांस्टेबल प्रवेश, महेश शर्मा, नितिन, सुभाष, राममोहन, जगवीर के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।
ग्रामीण समाज विकास केंद्र के प्रोजेक्ट मैनेजर गजेंद्र सिंह ने 19 सितंबर 2025 में एएचटीयू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि ट्योढ़ी गांव में कुछ बच्चों और श्रमिकों को बंधक बनाकर खेतों में काम कराया जा रहा है। इसके बाद श्रम विभाग, प्रोबेशन विभाग और पुलिस की टीम ने ट्योढ़ी गांव में छापा मारकर तीन किशोरों समेत छह श्रमिकों को मुक्त कराया था। पूछताछ में किसानों ने गांव के ही सहारनपुर में तैनात हेड कांस्टेबल प्रवेश पर 20-20 हजार रुपये में श्रमिकों को बेचने का आरोप लगाया था। पूछताछ में श्रमिकों ने नौ महीने पहले ट्योढ़ी गांव में लाने और मजदूरी मांगने पर पीटने, भूखा रखने का आरोप लगाया था।
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मामले में पुलिस ने सहारनपुर में तैनात ट्योढ़ी के हेड कांस्टेबल प्रवेश उर्फ कल्लू, किसान महेश शर्मा, नितिन, सुभाष, राम मोहन शर्मा, जगवीर को गिरफ्तार किया था। नजरुल फरार चल रहा था। शुक्रवार को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने की टीम झारखंड के साहिबगंज जिले के छोटा कदम गांव पहुंची। दबिश देकर आरोपी नजरुल को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर विनोद कुमार ने बताया कि नजरुल ही श्रमिकों को लाकर 20-20 हजार रुपये में बेचा था। उसने कई अन्य श्रमिकों के बेचने के बारे में भी बताया है।
मानव तस्कर के दिल्ली, हरियाणा और गाजियाबाद में संपर्क
पूछताछ में आरोपी नजरुल ने बताया कि वह कई साल से मानव तस्करी कर रहा है। झारखंड, बिहार और नेपाल से ऐसे श्रमिकों को चिह्नित कर भेजता था, जो काफी गरीब हैं। उनको मजदूरी कराने और अच्छे पैसे दिलवाने की बात कहकर लाता था। इन मजदूराें को जिन्हें वह बेचता था वह मजदूरों को प्रताड़ित कराकर काम कराते थे। न तो मजदूरी देते थे न ही सही भोजन-पानी देते थे। पूरी तरह से बंधक बना लेते थे। बागपत, दिल्ली, गाजियाबाद, हरियाणा के अलावा अन्य जगहों पर भी नजरुल ने 20-20 हजार रुपये में मजदूर बेचे हैं। नजरुल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू कर दी।
हेड कांस्टेबल समेत छह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
जांच अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि मानव तस्करी के मामले में सहारनपुर में तैनात हेड कांस्टेबल को अधिकारियों ने रिपोर्ट मिलने पर निलंबित कर दिया था। इसके बाद उच्चाधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद हेड कांस्टेबल प्रवेश, महेश शर्मा, नितिन, सुभाष, राममोहन, जगवीर के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।