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Bahraich News: लंदन तक चमक बिखेर रहीं बहराइच की बेटियां
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लंदन में अमल क्लूनी महिला सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित हुईं रिसिया की नैना।
- फोटो : लंदन में अमल क्लूनी महिला सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित हुईं रिसिया की नैना।
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बहराइच। लंदन के बकिंघम पैलेस के शाही अल्बर्ट हॉल तक तराई क्षेत्र की बेटियों की दृढ़ इच्छाशक्ति की गूंज सुनी और महसूस की जा रही है। रिसिया के पटेल नगर की नैना ने लंदन स्थित शाही महल में इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजी गईं। नैना ही नहीं बहराइच की ही आरती ने भी दो वर्ष पूर्व इस मंच पर सम्मानित हो चुकी हैं। तमाम बंदिशों को तोड़ आरती के पिंक ई रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर होने की कहानी लंदन में गूंजी थी। इस बार दूसरों के बेहतर जीवन की मजबूत बुनियाद रखने वाली नैना की दास्तान इस बार दुनिया भर के लोगों को बहराइच की बेटियों के समर्पण का लोहा मनवा रही हैं।
जनपद की बेटियों के लिए नई मिसाल बनकर उभरी नैना ने बताया कि 11 मई को लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में आयोजित किंग्स ट्रस्ट समारोह में उन्हें ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और महारानी कैमिला से मिलने का अवसर भी मिला। समारोह में अमल क्लूनी, जॉर्ज क्लूनी, शार्लोट टिलबरी, रीटा ओरा और सर रॉड स्टीवर्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी मौजूद थीं। नैना ने कहा कि यह सम्मान उन सभी लड़कियों को समर्पित है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखती हैं।
खेतों में मजदूरी करने वाले और स्कूल का मुंह तक न देखने वाले तमाम बच्चों के सुनहरे भविष्य का ताना-बाना बुना। उन्हें स्कूल पहुंचाया और उनके बेहतर जीवन की नींव तैयार की। इतना ही नहीं क्षेत्र में बाल विवाह के खिलाफ भी मुहिम छेड़ी और तमाम किशोरियों को सपनों को पंख दिए।
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खेतों में मजदूरी से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
-रिसिया ब्लॉक के पटेल नगर गांव की निवासी हैं नैना।
-पढ़ाई जारी रखने के लिए खेतों में मजदूरी की और ट्यूशन पढ़ाई।
-प्रोजेक्ट लहर ने दोबारा स्कूल से जोड़ा।
-आज किशोरियों को शिक्षा व आत्मनिर्भरता के लिए कर रहीं प्रेरित।
-बाल विवाह रोकने के लिए गांवों में चला रहीं जागरूकता अभियान।
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नैना से पहले आरती को मिल चुका है पुरस्कार
नैना से पहले रिसिया के ही ग्राम बभनी निवासी ऑटो चालक आरती को भी यह पुरस्कार मिल चुका है। आगा खां फाउंडेशन की कंसल्टेंट सीमा शुक्ला ने कहा कि जिले की महिलाएं नैना और आरती से प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। नैना के पिता विजय बहादुर राजगीर हैं और मेहनत मजदूरी करते हैं, जबकि मां सोना देवी गृहिणी हैं।
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जनपद की बेटियों के लिए नई मिसाल बनकर उभरी नैना ने बताया कि 11 मई को लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में आयोजित किंग्स ट्रस्ट समारोह में उन्हें ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और महारानी कैमिला से मिलने का अवसर भी मिला। समारोह में अमल क्लूनी, जॉर्ज क्लूनी, शार्लोट टिलबरी, रीटा ओरा और सर रॉड स्टीवर्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्तियां भी मौजूद थीं। नैना ने कहा कि यह सम्मान उन सभी लड़कियों को समर्पित है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखती हैं।
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खेतों में मजदूरी करने वाले और स्कूल का मुंह तक न देखने वाले तमाम बच्चों के सुनहरे भविष्य का ताना-बाना बुना। उन्हें स्कूल पहुंचाया और उनके बेहतर जीवन की नींव तैयार की। इतना ही नहीं क्षेत्र में बाल विवाह के खिलाफ भी मुहिम छेड़ी और तमाम किशोरियों को सपनों को पंख दिए।
खेतों में मजदूरी से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
-रिसिया ब्लॉक के पटेल नगर गांव की निवासी हैं नैना।
-पढ़ाई जारी रखने के लिए खेतों में मजदूरी की और ट्यूशन पढ़ाई।
-प्रोजेक्ट लहर ने दोबारा स्कूल से जोड़ा।
-आज किशोरियों को शिक्षा व आत्मनिर्भरता के लिए कर रहीं प्रेरित।
-बाल विवाह रोकने के लिए गांवों में चला रहीं जागरूकता अभियान।
नैना से पहले आरती को मिल चुका है पुरस्कार
नैना से पहले रिसिया के ही ग्राम बभनी निवासी ऑटो चालक आरती को भी यह पुरस्कार मिल चुका है। आगा खां फाउंडेशन की कंसल्टेंट सीमा शुक्ला ने कहा कि जिले की महिलाएं नैना और आरती से प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। नैना के पिता विजय बहादुर राजगीर हैं और मेहनत मजदूरी करते हैं, जबकि मां सोना देवी गृहिणी हैं।