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Bahraich News: कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार में बढ़ा वन मार्ग शुल्क
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Mon, 09 Feb 2026 12:33 AM IST
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कतर्नियाघाट में भ्रमण करते पर्यटक। (फाइल फोटो)
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बहराइच। कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार में जंगल भ्रमण करने वाले सैलानियों के लिए अब खर्च बढ़ गया है। वन विभाग ने वन मार्ग शुल्क 300 से बढ़ाकर 500 और प्रति व्यक्ति शुल्क 200 से बढ़ाकर 250 रुपये कर दिया है। इसका मतलब कि एक जंगल सफारी में छह लोगों को अब 500 रुपये अतिरिक्त देने पड़ेंगे।
पहले कतर्नियाघाट रेंज में छह व्यक्तियों की सफारी का कुल शुल्क 3850 रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 4350 रुपये कर दिया गया है। वहीं निशानगढ़ा रेंज की सफारी पहले से ही 4850 रुपये थी, अब वहां छह लोगों की टीम को कुल 5350 रुपये देने पड़ेंगे।
कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष बीडी लखमानी ने कहा कि दुधवा और किशनपुर में सैलानियों को सफारी में ढाई से तीन घंटे का अनुभव मिलता है, जबकि कतर्नियाघाट में सिर्फ डेढ़ घंटे की सफारी होती है और शुल्क दोनों जगह समान है। अब शुल्क बढ़ने के बाद कतर्नियाघाट में सैलानियों की संख्या और घट सकती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसी तरह दरें बढ़ती रहीं तो कतर्नियाघाट में इको-पर्यटन खत्म हो सकता है। इससे स्थानीय लोग, जो इको-पर्यटन पर निर्भर हैं, बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि वन विभाग को शुल्क वृद्धि पर विचार करना चाहिए और सैलानियों की सुविधा बनाए रखनी चाहिए, ताकि पर्यटन और रोजगार दोनों सुरक्षित रहें।
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पहले कतर्नियाघाट रेंज में छह व्यक्तियों की सफारी का कुल शुल्क 3850 रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 4350 रुपये कर दिया गया है। वहीं निशानगढ़ा रेंज की सफारी पहले से ही 4850 रुपये थी, अब वहां छह लोगों की टीम को कुल 5350 रुपये देने पड़ेंगे।
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कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष बीडी लखमानी ने कहा कि दुधवा और किशनपुर में सैलानियों को सफारी में ढाई से तीन घंटे का अनुभव मिलता है, जबकि कतर्नियाघाट में सिर्फ डेढ़ घंटे की सफारी होती है और शुल्क दोनों जगह समान है। अब शुल्क बढ़ने के बाद कतर्नियाघाट में सैलानियों की संख्या और घट सकती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसी तरह दरें बढ़ती रहीं तो कतर्नियाघाट में इको-पर्यटन खत्म हो सकता है। इससे स्थानीय लोग, जो इको-पर्यटन पर निर्भर हैं, बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि वन विभाग को शुल्क वृद्धि पर विचार करना चाहिए और सैलानियों की सुविधा बनाए रखनी चाहिए, ताकि पर्यटन और रोजगार दोनों सुरक्षित रहें।