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Bahraich News: सरयू मैया तुम्हें ममता का वास्ता, मुझे मेरे घर का चिराग लौटा दो
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मुंसारी में सरयू नदी में युवकों के डूबने के बाद तलाश करते गोताखोर व जमा भीड़।
- फोटो : मुंसारी में सरयू नदी में युवकों के डूबने के बाद तलाश करते गोताखोर व जमा भीड़।
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महसी/बौंडी। सरयू नदी में बुधवार को तीन युवकों के डूबने से नदी का किनारा परिजनों की चीत्कार से गूंज उठा। दोस्तों के साथ दोपहर में नदी में नहाते समय सूरज जायसवाल, गोलू और मोहित के सरयू की तेज धारा में बह जाने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इकलौते बेटे सूरज के लिए व्याकुल मां किरन देवी व दो युवकों के परिजन नदी किनारे किसी चमत्कार की आस में बिलखते रहे। किरन देवी कांपते होंठों से बह यही कह रही थीं कि सरयू मैया तुम्हें ममता का वास्ता, मुझे मेरे घर का चिराग लौटा दो...।
बंजारी मोड़ निवासी सूरज घर का इकलौता था। पिता की मौत के बाद मां किरन देवी का वही एकमात्र सहारा था। वह रोज सुबह ऑटो लेकर घर से निकलता और शाम को मां के लिए दवा व घर का राशन लेकर लौटता था। नदी तट पर बिलखते हुए किरन देवी ने बताया कि सूरज कल कह रहा था, मां तेरे घुटनों का इलाज बड़े डॉक्टर से कराऊंगा। पर आज...इतना कहते-कहते वह बेसुध होकर नदी तट पर ही गिर पड़ीं।
बुधवार को दोस्तों के कहने पर सूरज शहर से 25 किलोमीटर दूर कोरहवा मुंसारी नहाने आया था। किसे पता था कि यह उसकी आखिरी यात्रा होगी। सूरज के साथ गोलू और मोहित भी सरयू की लहरों में समा गए।
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मेरे बेटे का एक बार मुंह दिखा दो
नदी किनारे बिलख रही किरन देवी गोताखोरों का हाथ पकड़कर गिड़गिड़ाती रहीं। वह रोते हुए बोलीं, भैया, एक बार और देख लो। मेरा बच्चा पानी से डरता था, एक बार उसका मुंह दिखा दो। गांव की महिलाएं उन्हें संभालने की कोशिश करती रहीं, लेकिन मां का कलेजा मानने को तैयार नहीं था। यही हाल मोहित के परिजनों का भी रहा। एसडीआरएफ और गोताखोरों की टीम बुधवार शाम तक तलाश में जुटी रही, लेकिन तीनों युवकों का कोई पता नहीं चल सका।
ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का पेट भरते थे तीनों
सरयू नदी में डूबे सूरज, गोलू और मोहित ऑटो रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। तीनों युवक अपने-अपने परिवारों का सहारा थे और बेहतर जिंदगी की उम्मीद बने हुए थे, लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।
बंजारी मोड़ निवासी सूरज घर का इकलौता था। पिता की मौत के बाद मां किरन देवी का वही एकमात्र सहारा था। वह रोज सुबह ऑटो लेकर घर से निकलता और शाम को मां के लिए दवा व घर का राशन लेकर लौटता था। नदी तट पर बिलखते हुए किरन देवी ने बताया कि सूरज कल कह रहा था, मां तेरे घुटनों का इलाज बड़े डॉक्टर से कराऊंगा। पर आज...इतना कहते-कहते वह बेसुध होकर नदी तट पर ही गिर पड़ीं।
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बुधवार को दोस्तों के कहने पर सूरज शहर से 25 किलोमीटर दूर कोरहवा मुंसारी नहाने आया था। किसे पता था कि यह उसकी आखिरी यात्रा होगी। सूरज के साथ गोलू और मोहित भी सरयू की लहरों में समा गए।
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ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का पेट भरते थे तीनों
सरयू नदी में डूबे सूरज, गोलू और मोहित ऑटो रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। तीनों युवक अपने-अपने परिवारों का सहारा थे और बेहतर जिंदगी की उम्मीद बने हुए थे, लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।