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Bahraich News: पीसीबी टीम पहुंची ताल बघेल झील, देखे पर्यावरणीय हालात
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एनजीटी के निर्देश पर ताल बघेल के पानी की जांच करते पर्यावरण संरक्षण टीम के सदस्य।
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पयागपुर। प्रदेश के प्रमुख वेटलैंड क्षेत्रों में शामिल 14 वर्ग किलोमीटर में फैली ताल बघेल झील की मौजूदा स्थिति अब जांच के दायरे में है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अयोध्या की टीम शनिवार को तालाब पहुंची और करीब दो साल बाद इसके जल और पर्यावरणीय हालात का स्थलीय आकलन किया। टीम ने झील के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण करने के साथ जल गुणवत्ता की जांच के लिए पानी के नमूने लिए। अब इन नमूनों की जांच और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर तैयार रिपोर्ट से झील की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अयोध्या के अवर अभियंता अभिषेक कुमार और एमटीएस सुधांशु कुमार ने झील में जलभराव की स्थिति, प्राकृतिक स्वरूप और आसपास के पर्यावरण का जायजा लिया। टीम ने स्थानीय प्रशासन से झील के रखरखाव, जलभराव, आसपास हो रही गतिविधियों और संरक्षण के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। निरीक्षण के दौरान एसडीएम पयागपुर संजय कुमार पांडेय, तहसीलदार अंबिका चौधरी, बीडीओ आशुतोष श्रीवास्तव समेत तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारी मौजूद रहे।
2024 के डिमार्केशन के बाद क्या बदला, होगी पड़ताल
ताल बघेल झील का वर्ष 2024 में डिमार्केशन कराया गया था। अब दो साल बाद एनजीटी के निर्देश पर हुए निरीक्षण को इसी अवधि में झील की स्थिति में आए बदलावों के आकलन से जोड़कर देखा जा रहा है। टीम जल गुणवत्ता के विभिन्न मानकों की जांच करेगी। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर झील के संरक्षण और पर्यावरणीय व्यवस्थाओं को लेकर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
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पर्यटन केंद्र बनाने की उठती रही है मांग
करीब 14 वर्ग किलोमीटर में फैली ताल बघेल झील वेटलैंड के रूप में भूजल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्षेत्र के लोग लंबे समय से इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग भी करते रहे हैं। ऐसे में एनजीटी के निर्देश पर हुई जांच को झील के भविष्य के संरक्षण और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अयोध्या के अवर अभियंता अभिषेक कुमार और एमटीएस सुधांशु कुमार ने झील में जलभराव की स्थिति, प्राकृतिक स्वरूप और आसपास के पर्यावरण का जायजा लिया। टीम ने स्थानीय प्रशासन से झील के रखरखाव, जलभराव, आसपास हो रही गतिविधियों और संरक्षण के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली। निरीक्षण के दौरान एसडीएम पयागपुर संजय कुमार पांडेय, तहसीलदार अंबिका चौधरी, बीडीओ आशुतोष श्रीवास्तव समेत तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारी मौजूद रहे।
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2024 के डिमार्केशन के बाद क्या बदला, होगी पड़ताल
ताल बघेल झील का वर्ष 2024 में डिमार्केशन कराया गया था। अब दो साल बाद एनजीटी के निर्देश पर हुए निरीक्षण को इसी अवधि में झील की स्थिति में आए बदलावों के आकलन से जोड़कर देखा जा रहा है। टीम जल गुणवत्ता के विभिन्न मानकों की जांच करेगी। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर झील के संरक्षण और पर्यावरणीय व्यवस्थाओं को लेकर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
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पर्यटन केंद्र बनाने की उठती रही है मांग
करीब 14 वर्ग किलोमीटर में फैली ताल बघेल झील वेटलैंड के रूप में भूजल संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्षेत्र के लोग लंबे समय से इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की मांग भी करते रहे हैं। ऐसे में एनजीटी के निर्देश पर हुई जांच को झील के भविष्य के संरक्षण और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।