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Bahraich News: भरतपुर में विस्थापितों का 750 वर्गफीट का होगा आवास
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भरतपुर गांव के लिए चिह्नित जमीन की पैमाइश करती टीम।
- फोटो : भरतपुर गांव के लिए चिह्नित जमीन की पैमाइश करती टीम।
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मिहींपुरवा। कतर्नियाघाट जंगल के बीच बसे भरथापुर गांव के ग्रामीणों को नानपारा लखीमपुर हाईवे के किनारे सेमरहना गांव के निकट सीएम योगी द्वारा दिए गए भरतपुर नाम से नए गांव में बसाया जाएगा। इसकी कवायद शुरू कर दी गई है। प्रत्येक परिवार को 750 वर्ग फीट का प्लॉट दिया जाएगा। इसके लिए लेखपालों ने चिह्नित जमीन पर पैमाइश का काम शुरू कर दिया है।
शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने इस योजना को तेजी से जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। प्रस्तावित भरतपुर गांव को आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक बस्ती के रूप में विकसित किया जाएगा। नानपारा-लखीमपुर हाईवे के किनारे बसाई जा रही इस कॉलोनी का निरीक्षण पूर्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं।
कॉलोनी में कुल 136 आवास बनाए जाएंगे। प्रत्येक आवास के साथ शौचालय की सुविधा भी होगी और पहली किस्त लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है। लोक निर्माण विभाग के मानक नक्शे के अनुसार सभी मकान एक ही डिजाइन में बनाए जाएंगे, जिससे पूरी बस्ती व्यवस्थित और सुदृढ़ दिखे।
सिर्फ मकान ही नहीं, बल्कि यहां सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, नालियां, शुद्ध पेयजल पाइपलाइन, बिजली के लिए नया ट्रांसफॉर्मर, स्ट्रीट लाइट, पार्क, अन्नपूर्णा भवन और स्कूल जैसी सभी जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
इस परियोजना की निगरानी एसडीएम मिहीपुरवा और खंड विकास अधिकारी विनोद यादव कर रहे हैं। जिला प्रशासन की मंशा है कि विस्थापित परिवारों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर जीवन स्तर वाला वातावरण दिया जाए। भरथापुर कॉलोनी को जिले में पुनर्वास की एक आदर्श योजना के रूप में विकसित करने की तैयारी है, ताकि जंगल से विस्थापित परिवारों को नई शुरुआत का बेहतर मौका मिल सके।
नायब तहसीलदार, सहायक खंड विकास अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, पीडब्ल्यूडी और आरईडी के अवर अभियंता सहित 13 विभागीय अधिकारियों को नोडल बनाया गया है, जबकि ग्राम पंचायत सचिव और लेखपाल सहित 16 कर्मियों को सहायक नोडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विभागवार जिम्मेदारियां तय
राजस्व विभाग: भूमि उपलब्ध कराना और योजनाओं की निगरानी।
विकास विभाग: आवास निर्माण एवं सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन।
पंचायती राज विभाग: शौचालय निर्माण व पात्रता निर्धारण।
लोक निर्माण विभाग : सड़क, नाली और इंटरलॉकिंग कार्य।
बिजली विभाग: ट्रांसफॉर्मर, विद्युत लाइन व स्ट्रीट लाइट।
पूर्ति विभाग: अन्नपूर्णा भवन व राशन कार्ड व्यवस्था।
बाल विकास विभाग: पोषण एवं आंगनबाड़ी सेवाएं।
स्वास्थ्य विभाग: उपकेंद्र निर्माण व स्वास्थ्य सेवाएं।
शिक्षा विभाग: बच्चों का स्कूलों में नामांकन एवं शिक्षा व्यवस्था।
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शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने इस योजना को तेजी से जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। प्रस्तावित भरतपुर गांव को आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक बस्ती के रूप में विकसित किया जाएगा। नानपारा-लखीमपुर हाईवे के किनारे बसाई जा रही इस कॉलोनी का निरीक्षण पूर्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं।
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कॉलोनी में कुल 136 आवास बनाए जाएंगे। प्रत्येक आवास के साथ शौचालय की सुविधा भी होगी और पहली किस्त लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है। लोक निर्माण विभाग के मानक नक्शे के अनुसार सभी मकान एक ही डिजाइन में बनाए जाएंगे, जिससे पूरी बस्ती व्यवस्थित और सुदृढ़ दिखे।
सिर्फ मकान ही नहीं, बल्कि यहां सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, नालियां, शुद्ध पेयजल पाइपलाइन, बिजली के लिए नया ट्रांसफॉर्मर, स्ट्रीट लाइट, पार्क, अन्नपूर्णा भवन और स्कूल जैसी सभी जरूरी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
इस परियोजना की निगरानी एसडीएम मिहीपुरवा और खंड विकास अधिकारी विनोद यादव कर रहे हैं। जिला प्रशासन की मंशा है कि विस्थापित परिवारों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर जीवन स्तर वाला वातावरण दिया जाए। भरथापुर कॉलोनी को जिले में पुनर्वास की एक आदर्श योजना के रूप में विकसित करने की तैयारी है, ताकि जंगल से विस्थापित परिवारों को नई शुरुआत का बेहतर मौका मिल सके।
नायब तहसीलदार, सहायक खंड विकास अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, पीडब्ल्यूडी और आरईडी के अवर अभियंता सहित 13 विभागीय अधिकारियों को नोडल बनाया गया है, जबकि ग्राम पंचायत सचिव और लेखपाल सहित 16 कर्मियों को सहायक नोडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विभागवार जिम्मेदारियां तय
राजस्व विभाग: भूमि उपलब्ध कराना और योजनाओं की निगरानी।
विकास विभाग: आवास निर्माण एवं सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन।
पंचायती राज विभाग: शौचालय निर्माण व पात्रता निर्धारण।
लोक निर्माण विभाग : सड़क, नाली और इंटरलॉकिंग कार्य।
बिजली विभाग: ट्रांसफॉर्मर, विद्युत लाइन व स्ट्रीट लाइट।
पूर्ति विभाग: अन्नपूर्णा भवन व राशन कार्ड व्यवस्था।
बाल विकास विभाग: पोषण एवं आंगनबाड़ी सेवाएं।
स्वास्थ्य विभाग: उपकेंद्र निर्माण व स्वास्थ्य सेवाएं।
शिक्षा विभाग: बच्चों का स्कूलों में नामांकन एवं शिक्षा व्यवस्था।