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UP: ग्रामीणों की सेहत के लिए सेतु बन रहीं स्वास्थ्य सखियां, महिलाओं को कर रहीं जागरूक; निभाती हैं अहम भूमिका

चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 12 Mar 2026 09:54 PM IST
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सार

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सखियां ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार में अहम भूमिका निभा रही हैं। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रशिक्षित महिलाएं गांवों में कुपोषण, टीबी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर जागरूकता फैला रही हैं, जिससे ग्रामीणों की सेहत और स्वास्थ्य व्यवहार में सुधार हो रहा है।

UP: Health friends are becoming a bridge for the health of villagers, raising awareness among women; they play
स्वास्थ्य सखियां - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

'अपनी तारीख का उनवान (शीर्षक) बदलना है तुझे, उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे'। प्रदेश की स्वास्थ्य सखियों ने ऐसा करके दिखाया है। बीते कई साल में उन्होंने न सिर्फ आत्मनिर्भर बनने की कोशिश की है बल्कि अपने परिवार व समाज के स्वास्थ्य व्यवहार को भी मजबूत की हैं।

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गांव में जच्चा-बच्चा का ख्याल रखने से लेकर कुपोषण, ट्यूबरक्लोसिस, फाइलेरिया जैसी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग को धरातल पर सेहत से जुड़े मानकों को सुधारने में मदद मिल रही है। पेश है स्वास्थ्य सखियों की कहानी ।

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खुद के साथ पूरे गांव को संभाला

लखनऊ के उदेतखेदा निवासी स्वास्थ्य सखी मीना देवी (37) के पति दिहाड़ी मजदूर हैं। चार बेटियों व एक बेटे के परिवार का खर्च पूरा न होने पर मीना ने गौपालन, कंपोस्ट खाद, उपले बनाने का काम किया। वह वर्ष 2021 में स्वास्थ्य सखी बन गईं।


राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) से खाद्य-पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता विषय पर प्रशिक्षण प्राप्त किया। मीना अपने कार्य के 10 दिनों में रोजाना चार घरों का भ्रमण करती हैं। इस दौरान गर्भवती, धात्री व 0-24 माह के बच्चों को स्तनपान और छह माह से ऊपर के बच्चों की माता को ऊपरी आहार के बारे में समझाती हैं।

मीना के कार्यक्षेत्र में कुल 10 स्वयं सहायता समूह व एक ग्राम संगठन है। वह टीबी व फाइलेरिया पर चलने वाले विशेष अभियानों में सहयोग करती हैं। मीना ने बताया कि उनके गांव में बच्चे के जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने संबंधी मिथक में कमी आई है।

सुदामा ने गांव वालों की भ्रांतियों को दूर किया

सुलतानपुर की स्वास्थ्य सखी सुदामा देवी (39) के प्रयासों से उनके गांव परऊपुर में काफी बदलाव हुए हैं। गांव में स्वास्थ्य संसाधनों की पहुंच बनीं। सुदामा ने ग्रामीणों की भ्रांतियों को दूर किया। आज गांव के लोग कुपोषण, टीकाकरण, स्तनपान, माहवारी जैसे विषयों पर बात करते हैं। गांव में जांच, टीकाकरण और संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी हुई है, वहीं कुपोषण में कमी आई है। सुदामा परिवार की मदद के लिए बकरी और भैंस पालन करती है। इससे वह अपने तीनों बच्चों को पढ़ा रही है।

बिंदिया कर रही हैं कुपोषण दूर करने का कार्य

जालौन के अगवापुर इटौरा गांव की स्वास्थ्य सखी बिंदिया (42) ने गांव में कुपोषण दूर करने का काम किया है। वह सभी 10 समूह की लक्षित गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं व 6 माह से 2 वर्ष के बच्चों की सूची बनाकर उनको माड्यूल के अनुसार भोजन के लिए समझाती हैं।

इससे उनके पोषण में सुधार हो रहा है। वह सेनेटरी पैड मंगवाकर गांव में बेचती हैं, जिससे मासिक धर्म स्वच्छता में परिवर्तन आ रहा है। वहीं, इसकी आमदनी से घर खर्च भी चल जाता है। बिंदिया ने बताया कि प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पोषाहार वितरण, पेंशन, आवास आदि का लाभ भी गांव वालों को मिल रहा है। गांव की ज्यादातर महिलाएं समूहों से जुड़ गईं हैं, वे लोन लेकर रोजगार व खेतीबाड़ी के जरिये परिवार की मदद कर रही हैं।

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