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Bahraich News: ताबूत जुलूस में बुलंद हुईं सदाएं

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 11 Mar 2026 11:58 PM IST
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Voices were raised in the coffin procession
इक्कीसवीं रमजान के जुलूस में मातम करते लोग।
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बहराइच। काजीपुरा स्थित सैयदवाड़ा में बुधवार शाम शिया समुदाय की ओर से हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में ताबूत का जुलूस निकाला गया। जुलूस से पहले मस्जिद में अलविदाई मजलिस का आयोजन किया गया, जिसे मौलाना मोहम्मद मेंहदी रिजवी इमाम-ए-जुमा ने खिताब किया।
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मौलाना ने अपने बयान में हजरत अली की सीरत पर रोशनी डालते हुए कहा कि इल्म इंसान की सबसे बड़ी दौलत है। उन्होंने कहा कि इल्म दो तरह का होता है। एक वह जो दिल में उतर जाता है और इंसान के काम आता है, जबकि दूसरा वह जो सिर्फ कान तक रह जाता है और जल्द ही निकल जाता है।
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मौलाना ने अपने बयान में मौला अली के कथनों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने फरमाया था कि जैसा मैं सखी था वैसा कोई मांगने वाला नहीं था और जैसा मैं आलिम था वैसा कोई इल्म लेने वाला नहीं था। जब मौलाना ने हजरत अली की शहादत का जिक्र किया तो मजलिस में मौजूद लोग भावुक हो गए।
मजलिस के बाद शबीहे ताबूत मौला-ए-कायनात बरामद हुआ और जुलूस अपने पारंपरिक रास्तों से होता हुआ शाम करीब छह बजे करबला पहुंचा। वहां रोजा इफ्तार किया गया। जुलूस में बच्चे, बुजुर्ग और युवा काले कपड़े पहनकर शामिल हुए और या अली मौला, हैदर मौला की सदाएं बुलंद करते रहे।
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