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Ballia News: क्रय केंद्रों पर पहुंचे 21000 बोरे फिर भी कई केंद्रों पर संकट
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बलिया। जिले में गेहूं क्रय केंद्रों पर अब खरीद धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ने लगी है। शुरूआत में ही बोरों की कमी सामने आ गई। आखिर बृहस्पतिवार को क्रय केंद्रों पर 21000 बोरे भेजे गए।
जिला विपणन विभाग के अनुसार जिला में 41 गांठ बोरे उपलब्ध हो चुके है। कोटेदारों से बोरा लिया जा रहा है। करीब 21000 बोरे फिलहाल उपलब्ध हैं। बृहस्पतिवार तक जिले में 51 किसानों से 358.60 एमटी गेहूं की खरीद हुई है। जिले में किसानों से खरीद के लिए 51 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। अभी भी कई केंद्रों पर बोरे के कमी के कारण खरीद शुरू नहीं हो सकी है। किसान इन केंद्रों का प्रतिदिन चक्कर लगा रहे हैं।
सिकंदरपुर। विकास खंड नवानगर के हड़सर स्थित गेहूं क्रय केंद्र पर बोरी के अभाव में खरीद प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। किसान कई दिनों से अपना गेहूं लेकर केंद्र के बाहर डटे हुए हैं, लेकिन बोरी न मिलने के कारण न तो तौल हो पा रही है और न ही खरीद शुरू हो सकी है। हुसैनपुर निवासी किसान दिग्विजय सिंह ने बताया कि गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है और वे कई दिनों से फसल लेकर क्रय केंद्र पर पड़े हैं, लेकिन बोरी के अभाव में खरीद नहीं हो रही है। हड़सर निवासी किसान जयशंकर तिवारी ने बताया कि एक अप्रैल को ही गेहूं केंद्र पर पहुंचा दिया था। घर से पुराने और फटे बोरे लाकर किसी तरह कुछ गेहूं भर दिया, जबकि आधे से अधिक गेहूं अब भी खुले में पड़ा है। डुहाविहरा के सचिव दीपक सिंह ने बताया कि किसान गेहूं लेकर केंद्र पर आ रहे हैं, लेकिन बोरी के अभाव में खरीद संभव नहीं हो पा रही है।
पंजीयन का सत्यापन न होना चुनौती
रेवती। क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाने के कारण किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं खरीद के रजिस्ट्रेशन के बाद दूसरी समस्या सत्यापन की है। तपते मौसम में बार-बार जाने के बाद भी सत्यापन नहीं होने के चलते किसानों के लिए गेहूं को स्टाक करके रखना एक दूसरी बड़ी समस्या है। विपणन निरीक्षक विष्णु शंकर राय ने बताया कि बोरियां अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। रेवती तथा गायघाट दो स्थानों पर क्रय केंद्र रहे लेकिन इस साल केवल गायघाट में ही क्रय केंद्र बनाया गया है। नगर के किसान राजेश कुमार पाण्डेय ,प्रवीण ओझा, कंचनपुर के शिव शंकर पाण्डेय ने बताया कंबाइन मशीनों के चलते किसानों ने गेहूं की कटिंग तेजी से करा लिया है लेकिन खरीद नहीं होने से हम परेशान हैं।
औने-पौने दाम पर बिचौलियों को बेचने को मजबूर
चितबड़ागांव। मर्ची निवासी किसान साहु प्रसाद ने बताया कि उन्हें 12 क्विंटल गेहूं विक्रय करना है, जो बोरियों के अभाव में नहीं हो पा रहा है। किसान हीरा लाल तिवारी ने बताया कि उन्हें 50 क्विंटल गेहूं बेचना है, जिसके चलते वे कई दिनों से क्रय केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं कृष्ण गोपाल तिवारी ने बताया कि उन्हें भी 60 क्विंटल गेहूं विक्रय करना है। किसान रामलाल यादव ने बताया कि उन्हें 27 क्विंटल गेहूं विक्रय करना है, जबकि अशोक सिंह ने 89 क्विंटल गेहूं बेचने की बात कही। विपणन अधिकारी पुणन्दु प्रवीण ने बताया कि अमेरिका-ईरान के युद्ध के चलते बोरियों का देश में न आ पाना इस समस्या का कारण बना है।
क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसान फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य
बलिया। सरकार ने फार्मर रजिस्ट्री पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। इसके आधार पर ही किसानों को सरकारी योजनाओं को लाभ मिलेगा। अब गेहूं खरीद के लिए भी फार्मर रजिस्ट्री जरूरी है। फार्मर रजिस्ट्री बनवाने वाले किसान ही सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेच कर न्यूनतम ही समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ पा सकेंगे। खाद्य एवं रसद विभाग और कृषि विभाग द्वारा एमएसपी ने समस्त खरीद में तत्काल प्रभाव से किसान पहचान पत्र को अनिवार्य करने का आदेश दिया है। अब केवल उन्हीं किसानों से खरीद की जाएगी, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री होगी। जिला विपणन अधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि गेहूं क्रय केंद्रों पर बेचने के लिए फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। इसके लिए शासन निर्देश जारी हो गया है।
जिला विपणन अधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि लोकल स्तर पर प्रशासन के सहयोग से बोरियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। जिला पूर्ति विभाग व जिला विपणन विभाग समन्वय स्थापित कर कोटेदारों से बोरा लिया जा रहा है। दो-तीन दिन में सभी केंद्रों पर पर्याप्त बोरा उपलब्ध हो जाएगा।
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जिला विपणन विभाग के अनुसार जिला में 41 गांठ बोरे उपलब्ध हो चुके है। कोटेदारों से बोरा लिया जा रहा है। करीब 21000 बोरे फिलहाल उपलब्ध हैं। बृहस्पतिवार तक जिले में 51 किसानों से 358.60 एमटी गेहूं की खरीद हुई है। जिले में किसानों से खरीद के लिए 51 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। अभी भी कई केंद्रों पर बोरे के कमी के कारण खरीद शुरू नहीं हो सकी है। किसान इन केंद्रों का प्रतिदिन चक्कर लगा रहे हैं।
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सिकंदरपुर। विकास खंड नवानगर के हड़सर स्थित गेहूं क्रय केंद्र पर बोरी के अभाव में खरीद प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। किसान कई दिनों से अपना गेहूं लेकर केंद्र के बाहर डटे हुए हैं, लेकिन बोरी न मिलने के कारण न तो तौल हो पा रही है और न ही खरीद शुरू हो सकी है। हुसैनपुर निवासी किसान दिग्विजय सिंह ने बताया कि गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है और वे कई दिनों से फसल लेकर क्रय केंद्र पर पड़े हैं, लेकिन बोरी के अभाव में खरीद नहीं हो रही है। हड़सर निवासी किसान जयशंकर तिवारी ने बताया कि एक अप्रैल को ही गेहूं केंद्र पर पहुंचा दिया था। घर से पुराने और फटे बोरे लाकर किसी तरह कुछ गेहूं भर दिया, जबकि आधे से अधिक गेहूं अब भी खुले में पड़ा है। डुहाविहरा के सचिव दीपक सिंह ने बताया कि किसान गेहूं लेकर केंद्र पर आ रहे हैं, लेकिन बोरी के अभाव में खरीद संभव नहीं हो पा रही है।
पंजीयन का सत्यापन न होना चुनौती
रेवती। क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाने के कारण किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि गेहूं खरीद के रजिस्ट्रेशन के बाद दूसरी समस्या सत्यापन की है। तपते मौसम में बार-बार जाने के बाद भी सत्यापन नहीं होने के चलते किसानों के लिए गेहूं को स्टाक करके रखना एक दूसरी बड़ी समस्या है। विपणन निरीक्षक विष्णु शंकर राय ने बताया कि बोरियां अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। रेवती तथा गायघाट दो स्थानों पर क्रय केंद्र रहे लेकिन इस साल केवल गायघाट में ही क्रय केंद्र बनाया गया है। नगर के किसान राजेश कुमार पाण्डेय ,प्रवीण ओझा, कंचनपुर के शिव शंकर पाण्डेय ने बताया कंबाइन मशीनों के चलते किसानों ने गेहूं की कटिंग तेजी से करा लिया है लेकिन खरीद नहीं होने से हम परेशान हैं।
औने-पौने दाम पर बिचौलियों को बेचने को मजबूर
चितबड़ागांव। मर्ची निवासी किसान साहु प्रसाद ने बताया कि उन्हें 12 क्विंटल गेहूं विक्रय करना है, जो बोरियों के अभाव में नहीं हो पा रहा है। किसान हीरा लाल तिवारी ने बताया कि उन्हें 50 क्विंटल गेहूं बेचना है, जिसके चलते वे कई दिनों से क्रय केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं कृष्ण गोपाल तिवारी ने बताया कि उन्हें भी 60 क्विंटल गेहूं विक्रय करना है। किसान रामलाल यादव ने बताया कि उन्हें 27 क्विंटल गेहूं विक्रय करना है, जबकि अशोक सिंह ने 89 क्विंटल गेहूं बेचने की बात कही। विपणन अधिकारी पुणन्दु प्रवीण ने बताया कि अमेरिका-ईरान के युद्ध के चलते बोरियों का देश में न आ पाना इस समस्या का कारण बना है।
क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसान फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य
बलिया। सरकार ने फार्मर रजिस्ट्री पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। इसके आधार पर ही किसानों को सरकारी योजनाओं को लाभ मिलेगा। अब गेहूं खरीद के लिए भी फार्मर रजिस्ट्री जरूरी है। फार्मर रजिस्ट्री बनवाने वाले किसान ही सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेच कर न्यूनतम ही समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ पा सकेंगे। खाद्य एवं रसद विभाग और कृषि विभाग द्वारा एमएसपी ने समस्त खरीद में तत्काल प्रभाव से किसान पहचान पत्र को अनिवार्य करने का आदेश दिया है। अब केवल उन्हीं किसानों से खरीद की जाएगी, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री होगी। जिला विपणन अधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि गेहूं क्रय केंद्रों पर बेचने के लिए फार्मर रजिस्ट्री होना अनिवार्य है। इसके लिए शासन निर्देश जारी हो गया है।
जिला विपणन अधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि लोकल स्तर पर प्रशासन के सहयोग से बोरियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। जिला पूर्ति विभाग व जिला विपणन विभाग समन्वय स्थापित कर कोटेदारों से बोरा लिया जा रहा है। दो-तीन दिन में सभी केंद्रों पर पर्याप्त बोरा उपलब्ध हो जाएगा।