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Ballia News: खानपान व जीवनशैली में बदलाव से रोज 20-30 मरीज यूरिक एसिड वाले मिल रहे
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जिला अस्पताल परिसर में उपचार के अपना नंबर आने के इंतजार में बैठे मरीज और तीमारदार। संवाद
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बलिया। जिला अस्पताल में रोजाना 20 से 30 मरीज जोड़ों में दर्द, पैर के अंगूठे, घुटने, टखने में सूजन, अकड़न, हाथ-पैरों में जलन और झनझनाहट की समस्या वाले पहुंच रहे हैं। जांच में यूरिक एसिड बढ़ा मिल रहा है।
खानपान में बदलाव और बदलती जीवनशैली के कारण युवाओं में यूरिक एसिड की समस्या देखने को मिल रही है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि ओपीडी में रोजाना करीब 314 के आसपास मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें 20 से 30 मरीज यूरिक एसिड के लक्षण मिल रहे है, खून व यूरीन जांच के बाद 10 से 15 मरीज इसकी समस्या के चपेटे में हैं। बताया कि वजन ज्यादा होने पर शरीर की कोशिकाएं अधिक यूरिक एसिड बनाती हैं और किडनी इसे उतनी तेजी से बाहर नहीं निकाल पाती।
शारीरिक गतिविधि की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है। उन्होंने बताया कि यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर से यह तत्व सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता। इसके चलते मरीजों में जोड़ों में दर्द, (खासकर पैर के अंगूठे, घुटने, टखने में) सूजन, अकड़नहाथ-पैरों में जलन और झनझनाहट जैसी परेशानियां होती हैं। जांच के लिए मरीजों का ब्लड टेस्ट और यूरिन सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा का सही आकलन किया जा जाता है।
यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी है। डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि बीमारी से बचने के लिए अधिक पानी पीएं, नियमित व्यायाम कर, मीठे पेय का प्रयोग कम करें। संतरा, आंवला, नींबू, और चेरी का सेवन यूरिक एसिड कम करने में सहायक है। हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाएं। दही, छाछ और स्किम्ड मिल्क फायदेमंद हो सकते हैं।
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खानपान में बदलाव और बदलती जीवनशैली के कारण युवाओं में यूरिक एसिड की समस्या देखने को मिल रही है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि ओपीडी में रोजाना करीब 314 के आसपास मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें 20 से 30 मरीज यूरिक एसिड के लक्षण मिल रहे है, खून व यूरीन जांच के बाद 10 से 15 मरीज इसकी समस्या के चपेटे में हैं। बताया कि वजन ज्यादा होने पर शरीर की कोशिकाएं अधिक यूरिक एसिड बनाती हैं और किडनी इसे उतनी तेजी से बाहर नहीं निकाल पाती।
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शारीरिक गतिविधि की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे यह समस्या और गंभीर हो जाती है। उन्होंने बताया कि यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और शरीर से यह तत्व सही तरीके से बाहर नहीं निकल पाता। इसके चलते मरीजों में जोड़ों में दर्द, (खासकर पैर के अंगूठे, घुटने, टखने में) सूजन, अकड़नहाथ-पैरों में जलन और झनझनाहट जैसी परेशानियां होती हैं। जांच के लिए मरीजों का ब्लड टेस्ट और यूरिन सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा का सही आकलन किया जा जाता है।
यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए खानपान और दिनचर्या में बदलाव जरूरी है। डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि बीमारी से बचने के लिए अधिक पानी पीएं, नियमित व्यायाम कर, मीठे पेय का प्रयोग कम करें। संतरा, आंवला, नींबू, और चेरी का सेवन यूरिक एसिड कम करने में सहायक है। हरी सब्जियां और फल ज्यादा खाएं। दही, छाछ और स्किम्ड मिल्क फायदेमंद हो सकते हैं।
